Gram Cultivation: किसानों की आमदनी बढ़ाने और दलहन फसलों के उत्पादन को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से कृषि विज्ञान केंद्र बेना, जामताड़ा की ओर से वैज्ञानिक तरीके से चना की खेती को लेकर विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। बुधवार को जामताड़ा प्रखंड के चंद्रदीपा पंचायत अंतर्गत गोवाकोला गांव में आयोजित इस कार्यक्रम में दर्जनों किसानों ने भाग लिया। इस दौरान किसानों को चना की उन्नत एवं वैज्ञानिक खेती की जानकारी देने के साथ-साथ चना के बीज का भी वितरण किया गया।
कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य किसानों को पारंपरिक खेती के साथ आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाने के लिए जागरूक करना था, ताकि कम लागत में बेहतर उत्पादन प्राप्त किया जा सके और किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत हो।
Gram Cultivation: वैज्ञानिकों ने खेती की आधुनिक तकनीकों की दी जानकारी
प्रशिक्षण कार्यक्रम में कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. देवकांत प्रसाद एवं कार्यक्रम सहायक रमन कुमार श्रीवास्तव ने किसानों को चना की खेती से जुड़े विभिन्न तकनीकी पहलुओं की विस्तारपूर्वक जानकारी दी। उन्होंने बताया कि बेहतर उत्पादन के लिए फसल की शुरुआत से ही वैज्ञानिक पद्धतियों को अपनाना जरूरी है।
वैज्ञानिकों ने किसानों को खेत की उचित तैयारी, गुणवत्तापूर्ण बीज का चयन, बीज उपचार, बुआई की सही विधि एवं पौधों के बीच उचित दूरी बनाए रखने के बारे में जानकारी दी। इसके अलावा उर्वरक प्रबंधन, आवश्यकतानुसार सिंचाई, खरपतवार नियंत्रण तथा फसल को विभिन्न कीटों और रोगों से बचाने के उपाय भी बताए गए।
उन्होंने चना की बुआई के उपयुक्त समय पर विशेष जोर देते हुए कहा कि सही समय पर बुआई और संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन से फसल की गुणवत्ता एवं उत्पादन में सुधार किया जा सकता है। किसानों को बताया गया कि खेती के प्रत्येक चरण में उचित तकनीक अपनाने से अनावश्यक खर्च कम करने के साथ बेहतर उपज हासिल की जा सकती है।
किसानों के बीच चना बीज का वितरण
कार्यक्रम के दौरान किसानों को चना के बीज वितरित किए गए, ताकि वे प्रशिक्षण में प्राप्त जानकारी को अपने खेतों में व्यवहारिक रूप से अपना सकें। वैज्ञानिकों ने किसानों को गुणवत्तापूर्ण बीज के महत्व के बारे में भी समझाया। उन्होंने कहा कि अच्छी फसल के लिए बीज का चयन और बुआई से पहले उसका उचित उपचार बेहद जरूरी है।
खेतों में पहुंचकर वैज्ञानिकों ने किया तकनीकों का प्रदर्शन
प्रशिक्षण को केवल सैद्धांतिक जानकारी तक सीमित नहीं रखा गया। इसके तहत कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों ने किसानों के खेतों का भ्रमण भी किया। खेतों में पहुंचकर उन्होंने भूमि की तैयारी और खरपतवार नियंत्रण के विभिन्न तरीकों की व्यावहारिक जानकारी दी तथा आवश्यक तकनीकों का प्रदर्शन किया।
वैज्ञानिकों ने किसानों को समझाया कि खेत में खरपतवार का समय पर नियंत्रण नहीं होने से फसल के विकास और उत्पादन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। इसलिए फसल की नियमित निगरानी और समय पर उचित प्रबंधन आवश्यक है।
Gram Cultivation: किसानों ने प्रशिक्षण को बताया उपयोगी
कार्यक्रम में काजल पंडित, तपन लोहार, बोदनी मुर्मू, फुलकु मुर्मू, रंजीत मरांडी, राजा हांसदा, रोशनी किस्कू सहित दर्जनों किसान मौजूद रहे। किसानों ने कृषि वैज्ञानिकों से खेती से संबंधित विभिन्न सवाल पूछे और उपयोगी जानकारी प्राप्त की।
किसानों ने इस पहल को लाभकारी बताते हुए कहा कि ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रमों से उन्हें आधुनिक खेती की नई तकनीकों को समझने और उन्हें अपने खेतों में अपनाने का अवसर मिलता है।
कृषि विज्ञान केंद्र बेना की यह पहल स्थानीय किसानों को वैज्ञानिक खेती से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इससे क्षेत्र में दलहन उत्पादन को बढ़ावा मिलने के साथ किसानों की आय में वृद्धि की संभावनाएं भी मजबूत होंगी।
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