झारखंड में विश्व योग दिवस पर यह चर्चा का बिषय बाना हुआ है ऐसा माना जा रहा है कि AYUSH Department प्रणाली एक गंभीर संकट का सामना कर रही है। राज्य के AYUSH Department में आयुर्वेद, योग, यूनानी, सिद्ध और होम्योपैथी शामिल को पूरी तरह से दृष्टि प्रदान की गई है। राज्य के गठन के समय, स्वास्थ्य विभाग के तहत AYUSH Department वैज्ञानिकों के लिए 444 पद बनाए गए थे। समय के साथ डॉक्टर मिले, लेकिन कोई नई भर्ती नहीं हुई,परिणाम स्वरूप मंज़ूर किये गये जिसमें 444 चिकित्सकों के परामर्शदाता मात्र 44 आयुष चिकित्सक हैं। इनमें से पांच या छह अगस्त में अवकाश होने वाले हैं।

दस्तावेज हैं के अनुसार ऐसा माना जा रहा है कि कि आयुष चिकित्सकों के लिए मंजूरशुदा चिकित्सकों में से 90% अभी भी खाली हैं, और वास्तव में 10% पर ही भर्ती हुई है। इसके अलावा, इनमें से कई डॉक्टर मरीज़ों का इलाज करने के बजाय अवैध आवास में हैं जैसे आयुष विभाग में उप निदेशक या जिला आयुष अधिकारी। अगस्त में कई शिष्यों के शिष्य होने के साथ, आयुष शिष्यों की संख्या और कम होगी।
रांची जिला के आयुष अधिकारी एवं औषधि चिकित्सक डाॅ. साकेत कुमार का कहना है कि वह अगस्त में भी कई अन्य शिष्यों के साथ रह चुके हैं। यह स्थिति इसलिए पैदा हुई क्योंकि राज्य के गठन के बाद से आयुष विद्वानों की कोई भर्ती नहीं हुई है, जैसे-जैसे डॉक्टर हर साल पद पर होते जाते है, मंज़ूर पद खाली रह जाते हैं।
उन्होंने बताया कि सबसे पहले कई आयुष शिक्षार्थियों ने नियुक्ति की आयु सीमा बढ़ाने की मांग को लेकर अदालत का दरवाजा खटखटाया था। हालांकि झारखंड उच्च न्यायालय ने 2025 में आयुष वकीलों के लिए 65 से 67 वर्ष की आयु करने का आदेश दिया था, लेकिन वह अदालती आदेश अभी तक लागू नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि यदि उच्च न्यायालय का फ़ैसला लागू हो गया, तो वे 44 डॉक्टर दो साल और सेवा में बने रहे, जिससे उनकी संख्या में कमी नहीं आयी। उन्होंने आगे कहा कि आयुष समर्थकों ने सामूहिक रूप से झारखंड के अतिरिक्त मुख्य सचिव (स्वास्थ्य) को एक उद्देश्य दिया है, जिसमें पद की आयु बढ़ाने और रिक्त पद को मंजूरी देने के लिए तत्काल भर्ती की मांग की गई है।
अब फैसला सरकार और विभाग ने ले लिया है। इसमें कहा गया है कि जब तक आयुर्वेद, होम पैथी और ग्रीक रोगियों पर मंज़ूर स्थायी भर्ती नहीं की जाएगी, तब तक पूरा आयुष सिस्टम संस्थान हो जाएगा। यह प्रणाली पूरी तरह से संयुक्त राष्ट्र के सलाहकारों पर सहमति जताती रही है, जिसे राज्य सरकार द्वारा समय-समय पर बिहार से झारखंड में अनुमोदित किया गया था। समय के साथ, इनमें से कई डॉक्टर नियुक्त हो गए हैं, लेकिन उनकी जगह नए वकीलों की अपील नहीं की गई है। स्थिति इतनी गंभीर हो गई है कि अभी भी 44 प्रतिष्ठित अनुयायियों पर काम कर रहे हैं, जिनमें से कई आने वाले पूर्वज में डूबे हुए हैं। अगर तत्काल भर्ती प्रक्रिया शुरू नहीं हुई तो राज्य में कई आयुष विभाग, संयुक्त औषधालय, स्वास्थ्य सेवाएं और यहां तक कि आयुष मित्रों में भी अधिकारियों की कमी हो जाएगी। इसका सीधा असर ग्रामीण और दूर-दराज के इलाकों में रहने वाले लाखों लोगों पर है, जो बीमारी के इलाज के लिए अभी भी आयुष चिकित्सा पद्धति पर सलाह देते हैं।
झारखंड में आयुष की स्थिति तब बहुत खराब है जब केंद्र सरकार देसी चिकित्सा पद्धतियों और आयुष को बढ़ावा देने पर जोर दे रही है। विशेषज्ञ का मानना है कि आयुष ने अब केवल इलाज का कोई वैकल्पिक तरीका नहीं बताया है; प्रशिक्षण की रोकथाम, प्रशिक्षण के प्रबंधन और रोग क्षमता को बढ़ाने में इसकी अहम भूमिका को अब व्यापक रूप से माना जा रहा है। जहां केंद्र सरकार आयुष क्षेत्र को बढ़ावा दे रही है, वहीं झारखंड में मानव कल्याण की भारी कमी इस उद्देश्य को पूरा कर रही है।
आयुष आक्षेपकर्ताओं का तर्क है कि यदि सरकार समय पर भर्ती प्रक्रिया शुरू करती है और नियुक्ति की आयु में वृद्धि करती है, तो राज्य की आयुष प्रणाली लगभग भविष्य में लगभग सस्ती हो जाएगी। इससे न केवल स्वास्थ्य व्यवसाय में शामिल, बल्कि राज्य के औषधीय, होम्योपैथिक और ग्रीक चिकित्सा से वंचितों का भविष्य भी खतरे में पड़ जाएगा।
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