लगातार हो रही बारिश ने झरिया के अग्नि प्रभावित इलाकों में रहने वाले लोगों की चिंता बढ़ा दी है। जमीन के नीचे वर्षों से सुलग रही आग के कारण अब भू-धंसान का खतरा और अधिक बढ़ गया है। वहीं जमीन से निकल रही जहरीली गैस लोगों की सेहत पर भी गंभीर असर डाल रही है।

झरिया के कई इलाकों में हजारों परिवार आज भी ऐसी जमीन पर रहने को मजबूर हैं जिसके नीचे लगातार आग धधक रही है। बारिश के कारण जमीन कमजोर हो रही है जिससे कभी भी भू-धंसान की आशंका बनी हुई है। स्थानीय लोग हर दिन डर के साये में जीवन जीने को मजबूर हैं।
सरकार ने झरिया मास्टर प्लान के तहत अग्नि प्रभावित क्षेत्रों से लोगों को सुरक्षित स्थानों पर बसाने की योजना बनाई थी। हालांकि अब तक केवल करीब 2,700 से 3,000 परिवारों का ही पुनर्वास हो सका है। वहीं एक लाख से अधिक परिवार अब भी खतरे वाले इलाकों में रह रहे हैं।
वर्ष 2009 में लगभग 7,112 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से झरिया मास्टर प्लान शुरू किया गया था जिसे 2021 तक पूरा करने का लक्ष्य था। बाद में 2025 में केंद्र सरकार ने संशोधित मास्टर प्लान के लिए 5,940.47 करोड़ रुपये की मंजूरी दी। इसके बावजूद पुनर्वास की प्रक्रिया अपेक्षित गति से आगे नहीं बढ़ सकी है।
बारिश के इस मौसम में लोगों की चिंता और बढ़ गई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि समय रहते सभी प्रभावित परिवारों का सुरक्षित स्थान पर पुनर्वास किया जाना चाहिए ताकि किसी बड़े हादसे से बचा जा सके।
धनबाद के झरिया इलाके में भूमिगत आग और भू-धंसान से सालाना हजारों परिवार प्रभावित होते हैं। झरिया पुनर्वास मास्टर प्लान के तहत इन खतरनाक और अति-संवेदनशील क्षेत्रों से करीब 1 लाख से ज्यादा परिवार विस्थापन की जद में हैं जिनमें से 15,000 से अधिक परिवारों को तत्काल उच्च-जोखिम वाले क्षेत्रों से निकालकर पुनर्वासित करने का लक्ष्य तय किया गया है। प्रभावित लोगों को सुरक्षित बसाने के लिए धनबाद के बेलगारिया और करमाटांड जैसी टाउनशिप में फ्लैट्स बनाए गए हैं।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि इन परिवाओं को कबतक पुनर्वासित किया जाएगा और आखिर कब तक झरिया के लोग आग और भू-धंसान के खतरे के बीच जिंदगी जीने को मजबूर रहेंगे।





