Jharkhand Pharmacy Scam: झारखंड में फार्मेसी संस्थानों की मान्यता, फर्जी प्रशिक्षण प्रमाण पत्र और कथित अवैध नियुक्तियों को लेकर एक बार फिर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। नेता प्रतिपक्ष एवं झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र लिखकर इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है। उन्होंने कथित अनियमितताओं को गंभीर वित्तीय एवं प्रशासनिक भ्रष्टाचार बताते हुए प्रवर्तन निदेशालय (ED), केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) और सीआईडी से जांच कराने की मांग उठाई है।
बाबूलाल मरांडी ने अपने पत्र में आरोप लगाया है कि झारखंड में फार्मेसी संस्थानों की मान्यता और संबंधित नियुक्तियों की प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं हुई हैं। उनके अनुसार, इस पूरी प्रक्रिया का उद्देश्य ऐसे निजी फार्मेसी संस्थानों को संरक्षण देना था, जो कथित तौर पर बिना पर्याप्त भूमि, प्रयोगशाला, पुस्तकालय और योग्य शिक्षकों के केवल कागजों पर संचालित हो रहे थे।
पत्र में दावा किया गया है कि राज्य में लगभग 154 से 156 निजी फार्मेसी संस्थानों को लेकर अनियमितताओं की शिकायतें सामने आई थीं, जबकि निर्धारित मानकों के अनुरूप केवल आठ संस्थान ही स्वीकृत थे। मरांडी ने आरोप लगाया कि दलालों के माध्यम से फर्जी मुहरों का इस्तेमाल कर 500 घंटे की अनिवार्य क्लिनिकल ट्रेनिंग के जाली प्रमाण पत्र तैयार किए गए। इसके अलावा हजारों अयोग्य छात्रों के फर्जी निबंधन और फार्मेसी शिक्षा से संबंधित नियमों के उल्लंघन का भी आरोप लगाया गया है।
Jharkhand Pharmacy Scam: 78 संस्थानों की मान्यता रद्द करने की कार्रवाई का भी जिक्र
बाबूलाल मरांडी ने अपने पत्र में उल्लेख किया है कि भारी जनविरोध और शिकायतों के बाद सरकार की ओर से लगभग 78 संस्थानों की मान्यता रद्द करने की कार्रवाई की गई थी। उन्होंने इस पूरे घटनाक्रम को पहले दी गई मान्यताओं की वैधता और संबंधित अधिकारियों की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े करने वाला बताया है।
पत्र में नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर भी कई गंभीर आरोप लगाए गए हैं। मरांडी के अनुसार, कार्यालय आदेश संख्या 0-237(8), दिनांक 17 अगस्त 2026 के तहत श्री प्रशांत कुमार पांडेय को पदमुक्त किया गया था। हालांकि, उनके द्वारा इस कार्रवाई के विरुद्ध झारखंड उच्च न्यायालय में रिट याचिका दायर की गई, जिसके बाद 20 अगस्त 2026 को स्थगन आदेश (Stay) प्राप्त कर लिया गया।
इसके बाद विभाग के संयुक्त सचिव श्री अनुज कुमार प्रसाद के हस्ताक्षर से 29 अक्टूबर 2026 को जारी पत्रांक 08/फार्मेसी-08-12/2025-298(8) के माध्यम से आगे की प्रक्रिया बढ़ाए जाने का भी उल्लेख किया गया है। नेता प्रतिपक्ष ने इस पूरे घटनाक्रम पर सवाल उठाते हुए प्रशासनिक आदेशों और न्यायिक प्रक्रियाओं के अनुपालन की जांच की मांग की है।
झारखंड में डी. फार्मा परीक्षा एवं निबंधन की आड़ में 100 करोड़ रुपये से अधिक के घोटाले और संगठित सिंडिकेट का मामला बेहद गंभीर है।
निजी फार्मेसी कॉलेजों को अवैध मान्यता देने, फर्जी प्रमाणपत्रों के आधार पर निबंधन और राजनीतिक-प्रशासनिक संरक्षण में चल रहे कथित सिंडिकेट ने हजारों युवाओं के भविष्य के साथ-साथ आम जनता के स्वास्थ्य को भी खतरे में डाला है।
मुख्यमंत्री श्री @HemantSorenJMM जी को पत्र लिखकर पूरे प्रकरण की CBI एवं ED से निष्पक्ष जाँच कराने, दोषियों पर कठोर कार्रवाई करने और हजारों विद्यार्थियों का भविष्य सुरक्षित रखने की माँग की।
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— Babulal Marandi (@yourBabulal) November 2, 2026
100 करोड़ रुपये की कथित अवैध वसूली की ED से जांच की मांग
बाबूलाल मरांडी ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि इस मामले में कथित 100 करोड़ रुपये की अवैध वसूली, मनी लॉन्ड्रिंग और संबंधित वित्तीय लेन-देन की जांच प्रवर्तन निदेशालय (ED) से कराई जाए।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया है कि मामले में कुछ प्रभावशाली लोगों, अधिकारियों और संबंधित व्यक्तियों की भूमिका की निष्पक्ष जांच आवश्यक है। इसके साथ ही फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया के नियमों के उल्लंघन, बाहरी रजिस्ट्रार की संदिग्ध नियुक्ति और अंतरराज्यीय माफिया गठजोड़ की कथित भूमिका का पर्दाफाश करने के लिए पूरे प्रकरण को केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंपने की मांग की गई है।
फर्जी प्रमाण पत्र और प्रशिक्षण दस्तावेजों की जांच की मांग
पत्र में फर्जी प्रमाण पत्रों और जाली अस्पताल प्रशिक्षण दस्तावेजों के मामले को भी गंभीरता से उठाया गया है। मरांडी ने मांग की है कि इन दस्तावेजों की फॉरेंसिक जांच झारखंड पुलिस की सीआईडी या विशेष जांच दल (SIT) के माध्यम से कराई जाए।
उनका कहना है कि इस पूरे मामले में यदि अनियमितताएं और भ्रष्टाचार प्रमाणित होते हैं, तो दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए। साथ ही, फार्मेसी शिक्षा की गुणवत्ता और राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए पारदर्शी व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिए।
Jharkhand Pharmacy Scam: मुख्यमंत्री से तत्काल हस्तक्षेप की अपील
बाबूलाल मरांडी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से इस कथित घोटाले की लीपापोती बंद कराने और मामले की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने की अपील की है। उनका कहना है कि फार्मेसी शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र में अनियमितताओं का सीधा असर आम लोगों के स्वास्थ्य और युवाओं के भविष्य पर पड़ सकता है।
अब इस मामले में राज्य सरकार की प्रतिक्रिया और जांच को लेकर उठाए जाने वाले कदमों पर सबकी नजरें टिकी हैं। यदि पत्र में लगाए गए आरोपों की निष्पक्ष जांच होती है, तो फार्मेसी संस्थानों की मान्यता, प्रशिक्षण प्रमाण पत्र, नियुक्तियों और संबंधित वित्तीय लेन-देन से जुड़े कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं।
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