Higher Education: बोकारो में उच्च शिक्षा को लेकर एक बार फिर विवाद गहराता नजर आ रहा है। बोकारो सिटी कॉलेज में स्नातकोत्तर (पीजी) के नए सत्र में नामांकन बंद करने के विश्वविद्यालय के फैसले के खिलाफ छात्रों में भारी नाराजगी है। इस निर्णय को लेकर छात्र नेताओं और विद्यार्थियों ने कॉलेज परिसर में विरोध जताते हुए विश्वविद्यालय प्रबंधन से तत्काल फैसले पर पुनर्विचार करने की मांग की है। छात्रों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि पीजी में नामांकन दोबारा शुरू नहीं किया गया तो व्यापक आंदोलन किया जाएगा।
छात्रों का कहना है कि बोकारो सिटी कॉलेज में पीजी की पढ़ाई बंद होने से जिले के हजारों विद्यार्थियों के सामने उच्च शिक्षा का संकट खड़ा हो जाएगा। उन्हें आगे की पढ़ाई के लिए धनबाद या रांची जैसे शहरों का रुख करना पड़ेगा। इससे विशेष रूप से आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों और दूरदराज के क्षेत्रों से आने वाले विद्यार्थियों को आर्थिक एवं अन्य परेशानियों का सामना करना पड़ेगा।
Higher Education: छात्रों ने दी आंदोलन की चेतावनी
छात्र प्रतिनिधियों ने बताया कि बोकारो में पीजी की पढ़ाई जारी रखने के लिए वर्ष 2018 में भी बड़ा आंदोलन हुआ था। उस दौरान कॉलेज के मुख्य द्वार पर आमरण अनशन तक किया गया था। तत्कालीन विधायक समरेश सिंह के आश्वासन के बाद आंदोलन समाप्त हुआ था। उस समय भरोसा दिलाया गया था कि बोकारो में स्नातकोत्तर की पढ़ाई बंद नहीं की जाएगी। ऐसे में अब विश्वविद्यालय की ओर से नए सत्र में नामांकन रोकने की सूचना जारी किए जाने से विद्यार्थियों में नाराजगी बढ़ गई है।
छात्र पिंटू राजा ने कहा कि वर्ष 2018 से बोकारो सिटी कॉलेज में पीजी की पढ़ाई नियमित रूप से संचालित हो रही थी। नए सत्र में नामांकन की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों को अचानक इस फैसले से निराशा हाथ लगी है। उन्होंने आशंका जताई कि विश्वविद्यालय के इस निर्णय से करीब ढाई से तीन हजार विद्यार्थियों का भविष्य प्रभावित हो सकता है। विश्वविद्यालय प्रबंधन शिक्षकों की कमी को नामांकन बंद करने की वजह बता रहा है, जबकि कॉलेज में कुछ शिक्षक अब भी पीजी की कक्षाएं संचालित कर रहे हैं।
छात्रों ने सवाल उठाया कि यदि शिक्षकों की कमी है तो विश्वविद्यालय और सरकार को शिक्षकों की बहाली की दिशा में कदम उठाना चाहिए। शिक्षकों की कमी का समाधान पढ़ाई बंद करना नहीं बल्कि आवश्यक संसाधन और शिक्षक उपलब्ध कराना होना चाहिए। विद्यार्थियों का कहना है कि उच्च शिक्षा (Higher Education) के अवसर सीमित करने के बजाय उन्हें और बेहतर बनाने की जरूरत है।
छात्र नेताओं ने विश्वविद्यालय प्रशासन और राज्य सरकार से मांग की है कि बोकारो सिटी कॉलेज में पीजी नामांकन बंद करने के फैसले को तत्काल वापस लिया जाए और नए सत्र में नामांकन प्रक्रिया शुरू की जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया तो आंदोलन को व्यापक रूप दिया जाएगा।
इतना ही नहीं, छात्रों ने जरूरत पड़ने पर अलग बोकारो विश्वविद्यालय के गठन की मांग को लेकर भी आंदोलन शुरू करने की बात कही है। उनका कहना है कि बोकारो जैसे औद्योगिक और शैक्षणिक रूप से महत्वपूर्ण जिले के विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के लिए दूसरे जिलों पर निर्भर रहना पड़ना दुर्भाग्यपूर्ण है।
अब देखना होगा कि विश्वविद्यालय प्रबंधन और राज्य सरकार छात्रों की इस मांग पर क्या रुख अपनाते हैं। फिलहाल पीजी नामांकन बंद करने का फैसला बोकारो में शिक्षा व्यवस्था और विद्यार्थियों के भविष्य को लेकर एक नई बहस का विषय बन गया है।
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