झारखंड में आदिवासी ज़मीन पर कब्ज़े के मामले अक्सर सामने आते रहते हैं, लेकिन अब आरोप लग रहे हैं कि ज़मीन माफिया सरकारी संपत्तियों को भी निशाना बना रहे हैं। बोकारो में इस तरह का एक गंभीर मामला सामने आया है, जहां सालों से चल रहे एक आदिवासी स्कूल (tribal school) की इमारत को कथित तौर पर JCB मशीन से गिरा दिया गया, इसके बाद जमीन की घेराबंदी कर प्लॉट बनाने का काम शुरू कर दिया गया।यह घटना बोकारो के सेक्टर-12 पुलिस स्टेशन इलाके में आने वाले टेटुलिया मौज़ा क्षेत्र के बिरसा नगर भट्टाटोला में स्थित बिरसा मिडिल स्कूल से जुड़ी है। आरोप है कि स्कूल (tribal school) की इमारत को रातों-रात JCB मशीन से जमींदोज कर दिया गया। साथ ही, स्कूल का नेमप्लेट भी नष्ट कर दिया गया। स्थानीय लोगों का कहना है कि स्कूल (tribal school) परिसर में अभी भी तीन पोलिंग बूथ मौजूद हैं; हालांकि, इमारत के गिराए जाने के बाद स्कूल (tribal school) के अस्तित्व के सभी निशान मिटते हुए दिख रहे हैं।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि प्रशासन और स्थानीय अधिकारियों को स्कूल की इमारत गिराए जाने की भनक तक कैसे नहीं लगी—जो कथित तौर पर रात के अंधेरे में किया गया? क्या स्कूल की ज़मीन या संपत्ति से जुड़े दस्तावेज़ों की जाँच की गई है? क्या इस ज़मीन पर प्लॉट विकसित करने की अनुमति है? और अगर नहीं, तो अब तक कोई कार्रवाई क्यों नहीं की गई?
स्थानीय आदिवासी समुदाय और आस-पास के निवासियों ने स्कूल की इमारत गिराए जाने का विरोध किया है। इस मामले को लेकर ग्रामीणों में डर और नाराज़गी का माहौल है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि इलाके में प्रभावशाली ज़मीन माफिया का इतना दबदबा है कि लोग उनके खिलाफ खुलकर बोलने से डरते हैं।
घटना की जानकारी मिलने पर सतनपुर पंचायत के मुखिया कालीपद सिंह ने अपना विरोध जताया। उन्होंने कहा कि माफिया ने सारी हदें पार कर दी हैं और अब इस मामले का विरोध किया जा रहा है।
वहीं, दुर्गा सोरेन सेना की महिला विंग की अध्यक्ष देवला टुडू ने कहा कि आदिवासियों के साथ हो रहे अन्याय को अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि संबंधित अधिकारियों को मामले की जानकारी दी जाएगी और कार्रवाई की मांग की जाएगी।
आखिरकार, इस पूरे मामले में सबसे अहम सवाल ज़िला प्रशासन और संबंधित विभागों की भूमिका को लेकर है। अगर स्कूल की ज़मीन पर अवैध कब्ज़ा किया जा रहा है या उसे प्लॉट में बांटा जा रहा है, तो ज़िम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई कब होगी? इसके अलावा, अगर प्रशासन को इन घटनाक्रमों की जानकारी नहीं थी, तो यह सरकारी संपत्ति की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है।
अब यह देखना बाकी है कि क्या बोकारो ज़िला प्रशासन इस मामले की जांच करेगा और स्कूल की ज़मीन व संपत्ति से जुड़े रिकॉर्ड सार्वजनिक करेगा, या फिर यह मामला सिर्फ़ आरोप-प्रत्यारोप के दौर तक ही सीमित रह जाएगा।
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