झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री सिर्फ विधायक महिलाओं के चमकता हुआ चेहरा देखते है,भले ही झारखंड के healthcare system धूमिल पड़ रही हो। जब हम बिमार होते है तो आपतकालिन समय में मरिज के लिए के एम्बुलेंस बुलाई जाती है,लेकिन अगर वही एम्बुलेंस की जगह आपको आज के समय में भी पुराने जमाने की तरह खांटो के सहारे मरिजों को अस्पताल पहुंचाया जाए तो उस राज्य की healthcare system कितनी बदहाल इसे पता तो लगा ही सकते है। जिस राज्य की healthcare system ऐसी हो उस राज्य का स्वास्थ मंत्री लोकतंत्र की रक्षा की बात करता है ।

स्वास्थ्य मंत्री के अपने चुनाव क्षेत्र में भी मरीज़ों को एम्बुलेंस सेवाएं नहीं मिल पा रही हैं,जिससे दुखद मौतें हो रही हैं। हाल ही में जामताड़ा के गोपालपुर गांव में एक घटना हुई। जब एक मरीज को एम्बुलेंस नहीं मिली, तो उसके परिवार वाले उसे खाट समेत ट्रैक्टर पर लादकर सदर अस्पताल ले गए। दुर्भाग्य से इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई, जिससे परिवार वालों में भारी आक्रोश फैल गया।
यह घटना शुक्रवार रात को शुरू हुई जब गोपालपुर गांव के मोनू टुडू अचानक बीमार पड़ गए। उनके परिवार ने 108 एम्बुलेंस सेवा को फ़ोन किया, लेकिन उनका आरोप है कि बार-बार कोशिश करने के बावजूद ऑपरेटर ने फ़ोन नहीं उठाया। नतीजतन, उन्होंने मरीज को खाट पर लिटाया उसे ट्रैक्टर पर रखा और जामताड़ा सदर अस्पताल ले गए, जहां बाद में उनकी मौत हो गई। परिवार बहुत नाराज़ है और उनका कहना है कि अगर एम्बुलेंस समय पर आ जाती तो मरीज़ की जान बचाई जा सकती थी। वे स्वास्थ्य सुविधाओं की हालत पर गंभीर सवाल उठा रहे हैं।
इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए, स्वास्थ्य मंत्री इरफ़ान अंसारी ने एम्बुलेंस न पहुंचने के कारण मरीज़ की मौत की रिपोर्ट को स्वीकार किया। उन्होंने माना कि 108 एम्बुलेंस सेवा में समस्याएं है,और बताया कि इस सेवा को बंद कर दिया गया है। घटना की जानकारी मिलते ही एम्बुलेंस ड्राइवर के ख़िलाफ कार्रवाई शुरू कर दी गई। अंसारी ने घोषणा की कि 108 सिस्टम अब काम नहीं करेगा, क्योंकि इससे लापरवाही होती है और प्रशासन की बदनामी होती है।
इसे भी पढ़े- Deputy Commissioner मंजूनाथ भजंत्री की अध्यक्षता में बैठक : जनगणना, वोटर मैपिंग, RTE पर किया गया चर्चा





