JSSC CGL Case: झारखंड में JSSC-CGL परीक्षा और भर्ती प्रक्रिया को लेकर चल रहा विवाद एक बार फिर चर्चा में आ गया है। झारखंड उच्च न्यायालय ने JSSC-CGL भर्ती प्रक्रिया को रद्द किए जाने को चुनौती देने वाली कई अलग-अलग याचिकाओं पर अपना फैसला सुना दिया है। न्यायमूर्ति दीपक रोशन की अदालत ने रमेश उरांव व अन्य, आकाश गौरव व अन्य, और निरोज खेस व अन्य द्वारा दायर याचिकाओं पर सुनवाई के बाद अपना फैसला सुनाया।
इस मामले में राज्य सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मीनाक्षी अरोड़ा ने पक्ष रखा। वहीं, याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता राजीव रंजन ने अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन, इंद्रजीत सिन्हा और अमृतांश वत्स के साथ मिलकर दलीलें पेश कीं।
JSSC CGL Case: अभ्यर्थियों ने नियुक्ति रद्द करने को दी थी चुनौती
पिछली सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से अदालत को बताया गया कि JSSC-CGL मामले पर हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट दोनों ही पहले फैसला सुना चुके हैं। उन्होंने तर्क दिया कि अदालतों के निर्देशों के अनुसार, दोषी और निर्दोष उम्मीदवारों के बीच फर्क किया जाना चाहिए और भर्ती प्रक्रिया को आपराधिक मुकदमे के नतीजों पर निर्भर रखा जाना चाहिए।
याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया कि पूरी भर्ती प्रक्रिया को रद्द करने का कोई औचित्य नहीं था। सरकार के फैसले को चुनौती देते हुए, उन्होंने कहा कि यह न्यायिक आदेशों के विपरीत था।
सरकार ने परीक्षा में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी का दिया था हवाला
इस बीच राज्य सरकार ने परीक्षा रद्द करने के अपने फैसले का बचाव किया। सरकार ने अदालत को बताया कि JSSC-CGL परीक्षा के दौरान बड़े पैमाने पर अनियमितताएं और भ्रष्टाचार हुआ था। परीक्षा आयोजित करने वाली एजेंसी पर आरोप लगा कि उसने प्रश्न पत्र लीक होने दिया।
सरकार ने तर्क दिया कि कुछ उम्मीदवारों को नेपाल और अन्य जगहों पर सवालों के जवाब उपलब्ध कराए गए थे और उन्हें ये जवाब याद भी करवा दिए गए थे। इससे परीक्षा की पारदर्शिता और निष्पक्षता प्रभावित हुई।
सरकार ने बताया था परीक्षा रद्द करना जरूरी
राज्य सरकार ने अदालत में कहा था कि भर्ती प्रक्रिया में आम जनता और उम्मीदवारों का भरोसा बनाए रखना जरूरी है। यह भी बताया गया कि जांच के दौरान परीक्षा में हुई गड़बड़ियों और धांधली से जुड़े दस्तावेज और सबूत सामने आए हैं।
सरकार ने तर्क दिया कि दोषी और निर्दोष उम्मीदवारों के बीच फर्क करना मुश्किल है। इसी आधार पर, कैबिनेट ने परीक्षा रद्द करने का फैसला लिया। अब, हाई कोर्ट के फैसले के बाद, JSSC-CGL भर्ती प्रक्रिया में शामिल उम्मीदवार आगे की कानूनी कार्यवाही और कोर्ट के आदेश के नतीजों पर बारीकी से नजर रखेंगे।
यह भी पढ़ें: Jharkhand Politics: सीएम हेमंत सोरेन से मिले कांग्रेस प्रभारी के राजू
यह भी पढ़ें: AISSEE 2027: सैनिक स्कूल में एडमिशन का सुनहरा मौका, जानिए उम्र









1 thought on “JSSC CGL Case: परीक्षा रद्द करने के फैसले पर हाईकोर्ट में सुनवाई”