झारखंड की राजधानी रांची में JPSC और JSSC भर्ती परीक्षाओं को लेकर चल रहा छात्र आंदोलन अब एक बड़े मोड़ पर पहुंच गया है। एक ओर राजधानी रांची में भर्ती परीक्षाओं में अनियमितताओं और पारदर्शिता की मांग को लेकर हजारों छात्रों का आंदोलन अपने चरम पर है, तो दूसरी ओर JPSC मामले की जांच में CID की कार्रवाई लगातार तेज होती दिखाई दे रही है। इसी क्रम में सोमवार को झारखंड CID ने JPSC के पूर्व अध्यक्ष एल खियांग्ते को गिरफ्तार कर लिया है। गिरफ्तारी से पहले CID उनसे कई दौर की पूछताछ कर चुकी थी।
एल खियांग्ते की गिरफ्तारी ऐसे समय हुई है जब JPSC की कार्यप्रणाली और भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों को लेकर राज्य में राजनीतिक और छात्र स्तर पर दबाव बढ़ा हुआ है। जांच एजेंसियां परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े विभिन्न पहलुओं की पड़ताल कर रही हैं। इससे पहले CID और रांची पुलिस की संयुक्त टीम ने JPSC कार्यालय समेत कई ठिकानों पर कार्रवाई की थी और परीक्षा से संबंधित दस्तावेजों को जांच के दायरे में लिया गया था।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच JPSC के तीन सदस्यों के इस्तीफे ने भी आयोग को लेकर चल रही चर्चाओं को और तेज कर दिया है। डॉ. अजीता भट्टाचार्य, डॉ. अनिमा हांसदा और डॉ. जमाल अहमद ने अपने पद से इस्तीफा दिया था। राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने कल रविवार 9 अगस्त को तीनों के इस्तीफे स्वीकार कर लिए। यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है, जब JPSC को लेकर अभ्यर्थियों के बीच असंतोष और आंदोलन लगातार जारी है।
छात्रों के आंदोलन की प्रमुख वजह भर्ती परीक्षाओं की निष्पक्षता, पारदर्शिता और कथित अनियमितताओं की जांच से जुड़ी मांगें हैं। अभ्यर्थियों का कहना है कि सरकारी नौकरियों की तैयारी में वर्षों का समय और मेहनत लगाने वाले युवाओं के भविष्य से जुड़ी परीक्षाओं में किसी भी तरह की गड़बड़ी की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। इसी मांग को लेकर आंदोलन लगातार जोर पकड़ता जा रहा है। ताजा घटनाक्रम के बीच रांची में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई की खबरें भी सामने आई हैं।
दिलचस्प बात यह भी है कि एल खियांग्ते ने इससे पहले JPSC अध्यक्ष पद से इस्तीफा देते हुए कहा था कि उन्होंने निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए पद छोड़ने का फैसला किया। उन्होंने जांच में पूरा सहयोग करने की बात कही थी। इसके बाद जांच का दायरा बढ़ा और अब उनकी गिरफ्तारी ने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया है।
JPSC विवाद में लगातार सामने आ रहे घटनाक्रम से अब कई बड़े सवाल भी खड़े हो रहे हैं। क्या जांच के बाद भर्ती प्रक्रिया से जुड़े आरोपों की पूरी तस्वीर सामने आएगी? क्या कथित अनियमितताओं के लिए जिम्मेदार लोगों की पहचान हो पाएगी? और सबसे महत्वपूर्ण, क्या आंदोलन कर रहे अभ्यर्थियों को परीक्षा प्रक्रिया की निष्पक्षता और पारदर्शिता का भरोसा दिलाया जा सकेगा?
फिलहाल पूर्व अध्यक्ष की गिरफ्तारी, तीन सदस्यों के इस्तीफे की स्वीकृति और छात्रों के जारी आंदोलन ने झारखंड में JPSC विवाद को बेहद संवेदनशील मोड़ पर ला खड़ा किया है। अब निगाहें CID की जांच और आने वाली कार्रवाई पर टिकी हैं। इस मामले में आगे होने वाली जांच और कानूनी प्रक्रिया से यह स्पष्ट होगा कि कथित अनियमितताओं की वास्तविकता क्या है और इसके लिए जिम्मेदारी किसकी तय होती है।
जेपीएसी को लेकर छात्रों का आंदोलन तेज हो चुका है साथ ही इसपर राजनीति भी गरम है। मुख्यमंत्री आवास का घेराव करने पहुंचे बीजेपी नेताओं को पुलिस ने हिरासत में लिया। हिरासत में लिए गए नेताओं में झारखंड विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी भी शामिल हैं। इसके विरोध और छात्रों के सपोर्ट में बीजेपी ने कल यानी 11 अगस्त को रांची बंद का ऐलान किया है।
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