गढ़वा में सवर्ण समाज के संवैधानिक अधिकारों, समान शिक्षा और समान अवसर की मांग को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया गया। परशुराम उपाध्याय की अध्यक्षता में आयोजित कार्यक्रम के दौरान टाउनहॉल से समाहरणालय तक पैदल मार्च निकाला गया। मार्च के बाद राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू के नाम मांग-पत्र उचित माध्यम से भेजा गया।
मांग-पत्र में जातिगत आरक्षण व्यवस्था की व्यापक समीक्षा, UGC से जुड़े विवादित प्रावधानों को वापस लेने तथा सवर्ण आयोग के गठन की मांग प्रमुखता से उठाई गई। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि शिक्षा और रोजगार के क्षेत्र में सभी वर्गों को समान अवसर मिलना चाहिए तथा नीतियों की समीक्षा समय-समय पर व्यापक सामाजिक हित को ध्यान में रखते हुए की जानी चाहिए।
सवर्ण आयोग के गठन की मांग

सवर्ण समाज की ओर से अपनी समस्याओं और अधिकारों से जुड़े मामलों के समाधान के लिए सवर्ण आयोग के गठन की मांग भी प्रमुखता से रखी गई। प्रतिनिधियों का कहना है कि समाज से जुड़े विभिन्न मुद्दों के अध्ययन और उनके समाधान के लिए एक प्रभावी संस्थागत व्यवस्था जरूरी है।
SC/ST एक्ट में सुधार की मांग
मांग-पत्र में SC/ST (अत्याचार निवारण) अधिनियम को लेकर भी अपनी आपत्ति दर्ज कराई गई। सवर्ण समाज ने कानून के कथित दुरुपयोग को रोकने के लिए इसकी व्यापक समीक्षा और आवश्यक सुधार की मांग की।

प्रदर्शनकारियों ने कहा कि कानून का उद्देश्य सामाजिक न्याय और सुरक्षा सुनिश्चित करना है, लेकिन इसके किसी भी प्रकार के कथित दुरुपयोग को रोकने के लिए प्रभावी प्रावधानों पर विचार किया जाना चाहिए।
कथित अपमानजनक भाषा पर भी जताई आपत्ति
कार्यक्रम के दौरान सार्वजनिक मंचों पर किसी समाज या वर्ग को निशाना बनाकर कथित तौर पर अपमानजनक एवं विभाजनकारी भाषा के इस्तेमाल पर भी कड़ी आपत्ति जताई गई। ऐसे मामलों में संबंधित व्यक्ति या संस्था की पहचान कर नियमानुसार कार्रवाई की मांग की गई।

संवैधानिक तरीके से आवाज उठाने का दावा
कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि सवर्ण समाज अपनी मांगों को लोकतांत्रिक और संवैधानिक तरीके से सरकार के समक्ष रख रहा है। प्रतिनिधियों ने राष्ट्रपति से केंद्र सरकार और संबंधित संवैधानिक संस्थाओं का ध्यान इन मुद्दों की ओर आकृष्ट कराने की अपील की।
प्रतिनिधियों ने समानता, समान अवसर और न्यायपूर्ण व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए उचित पहल की मांग की। पैदल मार्च और मांग-पत्र के माध्यम से सवर्ण समाज ने अपनी विभिन्न मांगों को सरकार तक पहुंचाने का प्रयास किया।




