सरकारी योजनाओं का उद्देश्य बच्चों को सुविधा देना होता है, लेकिन अगर उन्हीं बच्चों से सरकारी योजना का सामान ढुलवाया जाए तो क्या इसे उचित कहा जाएगा।सरकारी साइकिलों (govt. bicycles) के योजना के साथ लापरवाही देखा गया है। बता दें कि गोड्डा जिले के मेहरमा प्रखंड से सामने आई एक तस्वीर ने शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। तस्वीर में स्कूल ड्रेस पहने छात्र सरकारी साइकिलों (govt. bicycles) को ट्रैक्टर पर लोड करते नजर आ रहे हैं। मामला सामने आने के बाद जिला शिक्षा अधीक्षक ने भी संज्ञान लेने की बात कही है। गोड्डा जिले के मेहरमा प्रखंड सह अंचल कार्यालय परिसर कीजहां सरकारी योजना के तहत विद्यार्थियों को वितरण के लिए लाई गई साइकिलें (govt. bicycles) रखी हुई हैं। लेकिन इन तस्वीरों में सबसे ज्यादा ध्यान जिस बात ने खींचा, वह यह कि साइकिलों की लोडिंग और अनलोडिंग का काम स्कूल ड्रेस पहने छात्र करते दिखाई दे रहे हैं। छात्र ट्रैक्टर पर चढ़कर साइकिलें जमा रहे हैं तो वहीं कुछ छात्र नीचे से साइकिलें पकड़ाकर ऊपर भेज रहे हैं।

जानकारी के अनुसार ये छात्र उत्क्रमित मध्य विद्यालय, बरारी के हैं। तस्वीरों में विद्यालय के प्रधानाध्यापक भी मौके पर मौजूद दिखाई दे रहे हैं। जब उनसे इस पूरे मामले को लेकर सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि बच्चों को उन्होंने नहीं बुलाया था, बल्कि वे अपनी इच्छा से वहां पहुंचे थे।
हालांकि प्रधानाध्यापक के इस बयान के बाद कई सवाल खड़े हो रहे हैं। यदि बच्चों को विद्यालय की ओर से नहीं बुलाया गया था, तो वे विद्यालय समय में स्कूल ड्रेस पहनकर कई किलोमीटर दूर प्रखंड कार्यालय कैसे पहुंचे? क्या विद्यालय प्रशासन को इसकी जानकारी नहीं थी? यदि बच्चे स्वयं आए भी थे, तो उन्हें साइकिलें ट्रैक्टर पर चढ़ाने जैसे कार्य से क्यों नहीं रोका गया?
तस्वीरों में छात्र भारी साइकिलें उठाते और ट्रैक्टर पर चढ़ाते दिखाई दे रहे हैं। ऐसे में बच्चों की सुरक्षा भी बड़ा सवाल बनकर सामने आती है। यदि इस दौरान कोई छात्र ट्रैक्टर से गिर जाता या किसी अन्य दुर्घटना का शिकार हो जाता, तो इसकी जिम्मेदारी आखिर किसकी होती? क्या सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में बच्चों से इस तरह का कार्य कराना उचित है।
इस मामले की तस्वीरें सोशल मीडिया पर सामने आने और खबर प्रसारित होने के बाद शिक्षा विभाग हरकत में आया है। जिला शिक्षा अधीक्षक (डीएसई) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर प्रतिक्रिया देते हुए लिखा कि मामले का संज्ञान लिया गया है और दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाएगी। अब विभागीय जांच के बाद ही स्पष्ट होगा कि बच्चों के वहां पहुंचने और साइकिल लोडिंग की वास्तविक परिस्थितियां क्या थीं।
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