बिहार में सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री की भूमिका निभाने वाले नीतीश कुमार ने बिहार विधान परिषद की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। हालांकि बिहार के नए मुख्यमंत्री के चुनाव होने तक वो मुख्यमंत्री बने रहेंगे। इसी महीन नीतीश कुमार राज्यसभा के लिए चुने गए हैं। और एक हफ्ते पहले ही उनका चुनाव जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद पर निर्विरोध हुआ है।

राज्यसभा के लिए चुने जाने के बाद नीतीश कुमार के लिए ये कदम उठान जरूरी हो गया था। नियमों के अनुसार कोई भी व्यक्ति एक साथ संसद (राज्यसभा) और राज्य की विधानसभा या विधान परिषद का सदस्य नहीं रह सकता। इसलिए उन्हें एक पद छोड़ना जरूरी था।
नीतीश कुमार का यह इस्तीफा बिहार की राजनीति में एक महत्वपूर्ण बदलाव माना जा रहा है। इससे यह संकेत मिलता है कि वे अब राष्ट्रीय राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाएंगे।
नीतीश कुमार साल 2006 से विधान परिषद के सदस्य हैं। साल 2024 में नीतीश लगातार चौथी बार विधान परिषद के सदस्य बने थे। उनका कार्यकाल 2030 में पूरा होना था। लेकिन इसी बीच वो 16 मार्च 2026 को राज्यसभा के लिए निर्वाचित हो गए। इसलिए उन्हें 30 मार्च तक बिहार विधान परिषद से इस्तीफा देना था।
Also Read- भारतीय शेयर बाजार में आज ‘ब्लैक मंडे’, सेंसेक्स 1000 प्वाइंट और निफ्टी 300 प्वाइंट से ज्यादा लुढ़का





