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गिरिडीह में बिना छत (Roof) के रहने पर मजबूर गरीब परिवार,गांव के विद्यालय में ले रहे है शरण

On: July 29, 2026 3:12 PM
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गिरिडीह में बिना छत (Roof) के रहने पर मजबूर गरीब परिवार,गांव के विद्यालय में ले रहे है शरण
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सरकार की महत्वाकांक्षी आवास योजनाओं का उद्देश्य हर गरीब परिवार को पक्की छत (Roof) उपलब्ध कराना है, लेकिन गिरिडीह जिले के तिसरी प्रखंड की थानसिंहडीह पंचायत अंतर्गत बड़की लतबेधवा गांव में एक आदिवासी परिवार की स्थिति इन दावों पर सवाल खड़े करती है। लाभुक सूची में नाम दर्ज होने के बावजूद परिवार बिना छत (Roof) के रहने पर मजबूरल है, जिसे आज भी विद्यालय के एक कमरे में रहने को मजबूर है। गांव निवासी पत्नी सोरेन ने बताया कि उनका खपरैल मकान वर्षों पहले जर्जर होकर रहने लायक नहीं रहा गया है , जिसे  बिना छत (Roof) के हो गए है,मजबूर गरिब परिवार ।
बरसात में छत टपकने और दीवारों के गिरने के खतरे के कारण परिवार ने गांव के विद्यालय के एक कमरे में शरण ली। परिवार के मुखिया मजदूरी कर किसी तरह घर का खर्च चलाते हैं, लेकिन आर्थिक तंगी के कारण नया मकान बनवाना संभव नहीं हो पा रहा है। उन्होंने बताया कि कर्ज लेकर पुराने मकान की मरम्मत भी कराई थी, लेकिन हर बारिश में छत फिर टपकने लगती है। ऐसे में पक्के मकान का सपना अब भी अधूरा है।
परिवार का कहना है कि उनका नाम प्रधानमंत्री आवास योजना के लाभुकों की सूची में शामिल किया गया था। इससे उम्मीद जगी थी कि जल्द ही अपना घर मिलेगा, लेकिन आज तक योजना का लाभ नहीं मिला। इससे परिवार खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहा है।पत्नी सोरेन ने आरोप लगाया कि इसी दौरान एक व्यक्ति ने मनरेगा के तहत पशु शेड दिलाने और उसमें रहने की व्यवस्था कराने का भरोसा देकर उनसे ₹10 हजार ले लिए। आरोप है कि न पशु शेड मिला और न ही रुपये वापस किए गए। ग्रामीणों का कहना है कि जिस विद्यालय का कमरा बच्चों की पढ़ाई के लिए होना चाहिए, वह आज एक परिवार का आशियाना बना हुआ है।
उनका कहना है कि सरकारी योजनाओं की सफलता तभी मानी जाएगी, जब लाभुक सूची में दर्ज नाम वास्तव में पक्के मकानों में बदलेंगे, न कि केवल कागजों तक सीमित रहेंगे। परिवार ने प्रशासन से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर उन्हें शीघ्र आवास योजना का लाभ दिलाया जाए, ताकि वे सम्मानपूर्वक अपने घर में रह सकें और विद्यालय का कमरा फिर से बच्चों की शिक्षा के लिए उपयोग हो सके।
जब इस संबंध में मुखिया पति से बात किया गया तो उन्होंने कहा कि मैंने आवास देने के लिए बहुत प्रयास प्राथमिकता सूची में 200 के बाद उसका नंबर था जिस वजह से नहीं हो पाया है सर्वे करने वाले लोग गलत सर्वे कर के लिस्ट तैयार किया जिस वजह से उसका नाम नीचे है। हालांकि मैने प्रखंड विकास पदाधिकारी को भी मौखिक रूप से इस मामले को अवगत किए लेकिन उन्होंने कहा कि अभी कोई फंड नहीं है फंड आने पर जल्द उसे दे दिया जाएगा।
जब पंचायत सेवक प्रभु हाजरा से बात किए तो उन्होंने अपना पल्ला झाड़ते हुए कहा कि उसका प्राथमिकता सूची में नाम बहुत नीचे है जब उसका नाम आएगा तो उसे दे दिया जाएगा।इसमें हम क्या कर सकते है।
वहीं ग्रामीणों का कहना है कि यदि लाभुक सूची में नाम आने के बाद भी गरीबों को वर्षों तक मकान नहीं मिलता, तो योजनाओं का वास्तविक लाभ आखिर किसे मिल रहा है।

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