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बांकीपुर उपचुनाव के नतीजे 3 अगस्त को, MP और गुजरात के 2 विधानसभा सीटों पर हुए उपचुनावों के नतीजे भी आएंगे

On: August 2, 2026 2:31 PM
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पटना का बांकीपुर उपचुनाव के नतीजे 3 अगस्त को, MP और गुजरात के 2 विधानसभा सीटों पर हुए उपचुनावों के नतीजे भी आएंगे
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बिहार की राजधानी पटना स्थित बांकीपुर विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव ने मतदान से पहले जितनी राजनीतिक चर्चा बटोरी, मतदान के दिन उतना उत्साह मतदाताओं के बीच दिखाई नहीं दिया। जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर के चुनाव मैदान में उतरने से इस सीट पर मुकाबला बेहद दिलचस्प माना जा रहा था, लेकिन मतदान प्रतिशत ने अलग ही कहानी बयां की। चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार बांकीपुर में 35 प्रतिशत से भी कम मतदान दर्ज किया गया, जो वर्ष 2025 के विधानसभा चुनाव की तुलना में लगभग सात प्रतिशत कम है। हालांकि यह सीट परंपरागत रूप से कम मतदान वाली मानी जाती रही है, फिर भी इस बार की गिरावट ने राजनीतिक दलों और चुनाव विश्लेषकों का ध्यान अपनी ओर खींचा है।

बांकीपुर विधानसभा सीट भाजपा के लिए केवल एक चुनावी क्षेत्र नहीं, बल्कि प्रतिष्ठा का प्रश्न भी बन गई है। यह सीट भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन के इस्तीफे के बाद रिक्त हुई थी। ऐसे में पार्टी ने नीरज कुमार सिन्हा को उम्मीदवार बनाया है, जबकि जन सुराज की ओर से प्रशांत किशोर और राष्ट्रीय जनता दल ने रेखा गुप्ता को मैदान में उतारा है। तीन प्रमुख दलों के उम्मीदवारों के बीच मुकाबले ने इस उपचुनाव को राज्य की सबसे चर्चित राजनीतिक लड़ाइयों में शामिल कर दिया।

बांकीपुर को बिहार की सबसे अधिक शहरी मतदाताओं वाली विधानसभा सीटों में गिना जाता है और इसे लंबे समय से भाजपा का मजबूत गढ़ माना जाता है। वर्ष 2025 के विधानसभा चुनाव में यहां 41.35 प्रतिशत मतदान हुआ था, जिसमें भाजपा के नितिन नबीन ने राजद उम्मीदवार रेखा गुप्ता को 51,936 मतों के बड़े अंतर से पराजित किया था। इस बार भी भाजपा अपनी परंपरागत बढ़त बनाए रखने का प्रयास कर रही है, जबकि विपक्ष और जन सुराज इस सीट पर नई राजनीतिक संभावनाओं की तलाश में हैं।

प्रशांत किशोर की उम्मीदवारी इस चुनाव की सबसे बड़ी चर्चा रही। बिहार में वैकल्पिक राजनीति की बात करने वाले प्रशांत किशोर ने पहली बार किसी विधानसभा चुनाव में स्वयं मैदान संभाला है। उनके चुनाव प्रचार ने युवाओं और शहरी मतदाताओं के बीच चर्चा तो पैदा की, लेकिन मतदान प्रतिशत में इसका अपेक्षित असर दिखाई नहीं दिया। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कम मतदान का सीधा लाभ किस दल को मिलेगा, इसका उत्तर मतगणना के बाद ही स्पष्ट होगा।

मतदान के दौरान राजनीतिक विवाद भी सामने आए। प्रशांत किशोर ने बिहार पुलिस पर गंभीर आरोप लगाते हुए दावा किया कि उनकी पार्टी के कम से कम 20 कार्यकर्ताओं को मतदान प्रक्रिया के दौरान हिरासत में लिया गया। उन्होंने देर रात बड़ी संख्या में समर्थकों के साथ जक्कनपुर थाने पहुंचकर विरोध दर्ज कराया। इस दौरान थाना प्रभारी के साथ उनकी तीखी बहस भी हुई, जिसने चुनावी माहौल को और अधिक गर्मा दिया। हालांकि प्रशासन की ओर से इन आरोपों पर अपनी प्रक्रिया के अनुसार कार्रवाई की बात कही गई।

बांकीपुर के साथ ही मध्य प्रदेश की दतिया और गुजरात की मंजलपुर विधानसभा सीटों पर भी उपचुनाव संपन्न हुए। इन तीनों राज्यों के मतदान प्रतिशत की तुलना करें तो बांकीपुर सबसे पीछे दिखाई दिया। मध्य प्रदेश की दतिया सीट पर 71.41 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया, जो पिछले विधानसभा चुनाव के 80 प्रतिशत मतदान से कम जरूर है, लेकिन फिर भी मतदाताओं की सक्रिय भागीदारी को दर्शाता है। यह सीट कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती के एक मामले में दोषी ठहराए जाने के बाद रिक्त हुई थी। यहां मुख्य मुकाबला कांग्रेस के घनश्याम सिंह और भाजपा के अशुतोष तिवारी के बीच माना जा रहा है।

वहीं गुजरात की मंजलपुर विधानसभा सीट पर 37.5 प्रतिशत मतदान हुआ। यह आंकड़ा वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में हुए 63.61 प्रतिशत मतदान से काफी कम है। भाजपा विधायक योगेशभाई पटेल के निधन के बाद इस सीट पर उपचुनाव कराया गया। यहां भाजपा के सतीश पटेल और कांग्रेस के भीखाभाई रबारी के बीच सीधी टक्कर देखी जा रही है।

तीनों राज्यों के उपचुनावों की मतगणना 3 अगस्त को होगी। बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र में कुल 3,79,611 मतदाता हैं और इस बार 25 उम्मीदवार चुनाव मैदान में अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। परिणाम केवल एक सीट का भविष्य तय नहीं करेंगे, बल्कि बिहार सहित अन्य राज्यों की राजनीतिक दिशा और दलों की रणनीति पर भी असर डाल सकते हैं।

राजनीतिक दृष्टि से देखा जाए तो उपचुनाव केवल रिक्त सीट भरने की प्रक्रिया नहीं होते, बल्कि वे जनता के मौजूदा राजनीतिक रुझान, सरकार और विपक्ष के प्रति विश्वास तथा नए राजनीतिक विकल्पों की स्वीकार्यता का संकेत भी देते हैं। विशेषकर बिहार जैसे राज्य में, जहां अगले विधानसभा चुनाव की तैयारियां धीरे-धीरे गति पकड़ रही हैं, बांकीपुर का परिणाम राजनीतिक दलों के लिए मनोवैज्ञानिक बढ़त या चुनौती दोनों साबित हो सकता है। कम मतदान ने जहां कई सवाल खड़े किए हैं, वहीं मतगणना यह तय करेगी कि शांत दिखने वाले इस चुनाव में जनता ने किसे अपना समर्थन दिया है।

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