मनोहरपुर रेलवे स्टेशन पर शालीमार – लोकमान्य तिलक एक्सप्रेस ट्रेन से आरपीएफ ने दो नाबालिग बच्चों को रेस्क्यू (rescues) किया गया है। इनमें एक लड़का और एक लड़की है। रेस्क्यू (rescues) किए दोनों नाबालिक की उम्र महज 16 साल है। ये दोनों अपने घर से भाग कर मजदूरी करने के लिए मुंबई जा रहे थे। ये नाबालिक बच्चे चक्रधरपुर के रहने वाले हैं। इन्हें मजदूरी करने के लिए युवक के बड़े भाई के द्वारा महाराष्ट्र की फैक्ट्रियों में कार्य कराने के लिए बुलाया गया था। संदेह यह भी है कि दोनों नाबालिग हैं और प्रेम – प्रसंग में लड़का लड़की को अपने साथ ले जा रहा था। वहीं इसकी सूचना मिलने पर रविवार की सुबह जिला बाल संरक्षण और डालसा के प्रतिनिधि यहां के आरपीएफ थाना पहुंचे और जरूरी कार्रवाई करने के दौरान के रेस्क्यू (rescues) किया गया है।

जानकारी के मुताबिक प्लेटफार्म परिसर पर कार्यरत आरपीएफ और जीआरपी की संयुक्त टीम द्वारा निगरानी करते समय चेकिंग के दौरान शक के आधार पर दोनों बच्चे को रेस्क्यू किया गया। इनके पास से चक्रधरपुर से लोकमान्य तिलक रेलवे स्टेशन के दो टिकट, आधार कार्ड और अन्य सामान मिले। उसके बाद दोनों के आधार कार्ड की जांच की गई। जिससे पता चला कि दोनों नाबालिग हैं। उसके बाद इसकी जानकारी जिला बाल संरक्षण केंद्र और डालसा को दी गई। सूचना प्राप्त मिलते है जिला बाल संरक्षण केन्द्र और डालसा के टीम द्वारा दोनों की थाने में ही काउंसिलिंग प्रक्रिया की गयी। डालसा के पी.एल.वी. अशोक महतो ने दोनों नाबालिग से बात की और इन बच्चों को आगे की पढ़ाई करने के लिए समझाया।
वहीं मौके पर एस्पायर संस्था की मंजू सवैया के द्वारा पूछताछ में पता चला कि दोनों के बीच प्रेम – प्रसंग है। साथ ही दोनों भागकर साथ रहने और रोजगार की नीयत से मुंबई जा रहे थे। जबकि मौके पर बाल संरक्षण विभाग के प्रोटेक्शन अधिकारी डॉ. कृष्णा कुमार तिवारी ने बताया कि इन दोनों बच्चों को बाल कल्याण समिति, चाईबासा को सुपुर्द कराई जाएगी। तत्पश्चात उक्त बच्चों के लिए पुर्नवास हेतु सरकार द्वारा चलाई जा रही स्पोंसरशिप योजना के तहत 4 हजार रूपये प्रति माह देने के लिए निर्णय लिया जायेगा। इस मौके पर रेलवे चाइल्ड हेल्प लाईन, चक्रधरपुर के फणींद्र बड़ाईक एवं मनोज दास, डालसा के जेराई हेंब्रम, अनिल महतो, एस्पायर की मंजू सवैया के अलावा आरपीएफ की टीम मौजूद थी।
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