School Inspection: सरकारी विद्यालयों की व्यवस्था सुधारने और बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के दावों के बीच उत्क्रमित प्राथमिक विद्यालय ब्रह्मपुर मोड़ की स्थिति पर गंभीर सवाल उठे हैं। विद्यालय की पड़ताल के दौरान शिक्षकों की कमी, भवन की जर्जर हालत, बच्चों के बैठने की खराब व्यवस्था और मध्याह्न भोजन योजना के तहत अंडे व फल दिए जाने में कथित अनियमितताओं की बातें सामने आई हैं। इन परिस्थितियों ने विद्यालय में पढ़ने वाले बच्चों की शिक्षा, पोषण और बुनियादी सुविधाओं को लेकर चिंता बढ़ा दी है।
School Inspection: 50 से अधिक नामांकित बच्चों के लिए केवल एक शिक्षक
विद्यालय की पड़ताल के दौरान बताया गया कि यहां 50 से अधिक बच्चे नामांकित हैं, लेकिन मौके पर केवल एक प्रतिनियुक्त शिक्षक मौजूद मिले। वहीं, औचक निरीक्षण के दौरान विद्यालय के सचिव अनुपस्थित पाए जाने का दावा किया गया है।
ऐसे में सवाल उठता है कि सीमित शिक्षक के सहारे बच्चों की पढ़ाई और विद्यालय की अन्य शैक्षणिक गतिविधियां किस तरह संचालित हो रही हैं। प्राथमिक स्तर पर बच्चों की बुनियादी शिक्षा मजबूत करने के लिए पर्याप्त शिक्षकों की उपलब्धता बेहद जरूरी है। शिक्षक की कमी का असर बच्चों की पढ़ाई पर पड़ने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
उपस्थिति पंजी में 28 बच्चों के नाम, मौके पर 20 से 21 उपस्थित होने का दावा
पड़ताल के दौरान विद्यालय की उपस्थिति पंजी और मौके पर मौजूद बच्चों की संख्या में अंतर होने की बात सामने आई। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, रजिस्टर में 28 बच्चों की उपस्थिति दर्ज थी, जबकि मौके पर गिनती करने पर केवल 20 से 21 बच्चे ही उपस्थित मिले।
यदि यह अंतर जांच में सही पाया जाता है, तो यह विद्यालय की उपस्थिति व्यवस्था की गंभीरता से जांच किए जाने का विषय है। हालांकि, इस अंतर के कारणों और किसी वित्तीय अनियमितता की पुष्टि संबंधित अभिलेखों की जांच के बाद ही हो सकेगी।
School Inspection: मिड-डे मील में अंडे और फल नियमित नहीं मिलने का आरोप
विद्यालय में मध्याह्न भोजन योजना के संचालन को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि गुप्त कैमरे के सामने बातचीत के दौरान रसोइया ने बच्चों को नियमित रूप से अंडे और फल नहीं दिए जाने की बात कही। आरोप के मुताबिक, बच्चों को ये खाद्य सामग्री एक से दो महीने में कभी-कभार ही उपलब्ध कराई जाती है।

यदि यह दावा सही साबित होता है, तो बच्चों के पोषण से जुड़ी योजना के क्रियान्वयन की जांच आवश्यक होगी। मध्याह्न भोजन योजना का उद्देश्य बच्चों को विद्यालय में पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराने के साथ उनकी उपस्थिति और पढ़ाई के प्रति रुचि बढ़ाना भी है।
ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि यदि निर्धारित मीनू के अनुसार अंडे और फल नियमित रूप से नहीं दिए जा रहे हैं, तो इसके पीछे क्या कारण हैं। योजना से संबंधित रिकॉर्ड, खरीदारी के बिल और वितरण विवरण की जांच से वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकती है।
School Inspection: जर्जर भवन और फटी दरियों पर पढ़ाई करने को मजबूर बच्चे
विद्यालय भवन की स्थिति भी चिंता का विषय बताई गई है। पड़ताल के दौरान सामने आई तस्वीरों और विवरण के अनुसार, भवन की दीवारों की हालत खराब है और रंग-रोगन का भी अभाव दिखाई देता है। कक्षाओं में बच्चों के बैठने के लिए फटी हुई दरियों का इस्तेमाल किए जाने की बात कही गई है।
जिस विद्यालय में बच्चों के भविष्य की नींव तैयार की जानी चाहिए, वहां बुनियादी सुविधाओं की ऐसी स्थिति शिक्षा के अनुकूल वातावरण पर सवाल खड़े करती है। जर्जर भवन की सुरक्षा का आकलन कराना और बच्चों को सुरक्षित कक्षाएं उपलब्ध कराना भी जरूरी है।
शौचालय होने के बावजूद बच्चियों को परेशानी का आरोप
विद्यालय में शौचालय उपलब्ध होने के बावजूद छोटी बच्चियों को खुले में, पेड़ों की आड़ में शौच के लिए जाने को मजबूर होना पड़ता है। रिपोर्ट में शिक्षक के हवाले से यह बात कही गई है।
यदि विद्यालय में शौचालय होने के बावजूद उसका उपयोग नहीं हो पा रहा है, तो इसके कारणों की जांच आवश्यक है। शौचालय की साफ-सफाई, पानी की उपलब्धता, दरवाजे और अन्य जरूरी सुविधाओं की स्थिति का पता लगाना जरूरी होगा, ताकि बच्चियों को सुरक्षित और सम्मानजनक वातावरण मिल सके।
अब शिक्षा विभाग की कार्रवाई पर टिकी निगाहें
उत्क्रमित प्राथमिक विद्यालय ब्रह्मपुर मोड़ से जुड़ी इन शिकायतों ने शिक्षा विभाग और स्थानीय प्रशासन की निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं। शिक्षक की कमी, उपस्थिति पंजी में कथित अंतर, मध्याह्न भोजन में अनियमितताओं के आरोप और बुनियादी सुविधाओं का अभाव ऐसे मुद्दे हैं, जिनकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
अब देखना होगा कि संबंधित अधिकारी विद्यालय का निरीक्षण कर इन शिकायतों की वास्तविकता की जांच करते हैं या नहीं। साथ ही, बच्चों को पर्याप्त शिक्षक, सुरक्षित भवन, स्वच्छ शौचालय और निर्धारित मीनू के अनुसार भोजन उपलब्ध कराने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।
बच्चों की शिक्षा और पोषण से जुड़े मामलों में केवल कागजी व्यवस्था पर्याप्त नहीं है। जरूरी है कि सरकारी योजनाओं का लाभ वास्तविक रूप से विद्यार्थियों तक पहुंचे और जिम्मेदारियों में लापरवाही पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
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