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सरायकेला-खरसावां: 25 करोड़ का अस्पताल तैयार, फिर भी इलाज के लिए तरस रही चांडिल की जनता

On: August 17, 2026 5:55 PM
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सरायकेला-खरसावां: 25 करोड़ का अस्पताल तैयार, फिर भी इलाज के लिए तरस रही चांडिल की जनता
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सरायकेला-खरसावां जिले के चांडिल अनुमंडल क्षेत्र के लोगों को बेहतर और आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से गांगुडीह में 50 बेड का नया अनुमंडलीय अस्पताल तैयार हो चुका है। करीब 18 वर्षों के लंबे इंतजार के बाद अस्पताल का भवन बनकर तैयार हुआ, लेकिन अब तक आम लोगों के लिए इसके दरवाजे नहीं खुले हैं। ऐसे में करोड़ों रुपये की लागत से तैयार इस अस्पताल का लाभ क्षेत्रवासियों को नहीं मिल पा रहा है। जून 2026 की रिपोर्ट में भी अस्पताल के तैयार होने के बावजूद स्वास्थ्य विभाग को भवन हैंडओवर और संचालन को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं होने की बात सामने आई थी।

अस्पताल का सफर भी कम लंबा नहीं रहा। वर्ष 2008 में तत्कालीन विधायक एवं पूर्व उपमुख्यमंत्री स्व. सुधीर महतो की पहल पर 50 बेड वाले अनुमंडलीय अस्पताल की नींव रखी गई थी। शुरुआती निर्माण कार्य निर्धारित समय में पूरा नहीं हो सका। बाद में कई चरणों में राशि स्वीकृत हुई और अधूरे भवन को पूरा करने की कोशिश की गई। वर्ष 2023 में अस्पताल के अधूरे निर्माण को पूरा करने के लिए 17 करोड़ 51 लाख रुपये से अधिक की प्रशासनिक स्वीकृति दी गई थी।

अब अस्पताल आधुनिक सुविधाओं से लैस होकर तैयार है। यहां 50 बेड के अलावा ऑपरेशन थिएटर, आईसीयू, एनआईसीयू, डायलिसिस, अल्ट्रासाउंड, ईसीजी, आधुनिक पैथोलॉजी लैब, फिजियोथेरेपी, रिकवरी रूम और अन्य चिकित्सा सुविधाओं की व्यवस्था की गई है। डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों के लिए आवास की सुविधा भी उपलब्ध है।

दूसरी ओर, पुराने अनुमंडलीय अस्पताल की स्थिति क्षेत्र के लोगों के लिए चिंता का विषय बनी हुई है। सीमित संसाधनों, डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों की कमी के कारण मरीजों को पर्याप्त सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं। जांच सुविधाओं को लेकर भी पहले समस्याएं सामने आती रही हैं। उदाहरण के तौर पर वर्ष 2025 में अल्ट्रासाउंड मशीन उपलब्ध होने के बावजूद रेडियोलॉजिस्ट की कमी के कारण जांच शुरू होने में देरी हुई थी।

चांडिल क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति को देखते हुए नए अस्पताल का संचालन और भी महत्वपूर्ण हो जाता है। राष्ट्रीय राजमार्गों पर होने वाली दुर्घटनाओं के मामलों में समय पर उपचार मिलना बेहद जरूरी है। गंभीर मरीजों को रांची या जमशेदपुर रेफर किए जाने की स्थिति में समय की बर्बादी उनके लिए जोखिम बढ़ा सकती है।

हालांकि, नए अस्पताल को जल्द शुरू कराने की मांग लगातार उठती रही है। विधायक सविता महतो पहले भी अस्पताल को चालू कराने के लिए सरकार और स्वास्थ्य विभाग के समक्ष मामला उठा चुकी हैं। वर्ष 2023 में उन्होंने अस्पताल के पुनर्विकास और अधूरे निर्माण को पूरा कराने के लिए प्रयास किए थे।

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब अस्पताल का भवन तैयार हो चुका है और उसमें आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाएं मौजूद हैं, तो इसे आम जनता के लिए पूरी तरह कब खोला जाएगा। करोड़ों रुपये खर्च कर तैयार किए गए इस अस्पताल का संचालन जल्द शुरू होने से चांडिल अनुमंडल के हजारों लोगों को बेहतर इलाज की सुविधा मिल सकती है और गंभीर मरीजों को दूसरे शहरों में रेफर करने की मजबूरी भी काफी हद तक कम हो सकती है।

जनता की उम्मीद अब अस्पताल के उद्घाटन और नियमित संचालन पर टिकी है। लंबे इंतजार के बाद तैयार हुए इस अस्पताल को यदि जल्द स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ दिया जाता है, तो यह चांडिल क्षेत्र की स्वास्थ्य व्यवस्था में एक महत्वपूर्ण बदलाव साबित हो सकता है।

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