धनबाद में बढ़ते साइबर अपराध के बीच आम लोगों को ऑनलाइन ठगी से बचाने के लिए धनबाद पुलिस ने व्यापक साइबर सुरक्षा जागरूकता अभियान शुरू किया है। 21 अगस्त तक चलने वाले इस अभियान का उद्देश्य जिले की करीब 35 लाख आबादी तक साइबर अपराध से बचाव और सतर्कता का संदेश पहुंचाना है। अभियान की शुरुआत पुलिस लाइन से हुई, जहां साइबर ठगी के बदलते तरीकों को लेकर लोगों को जागरूक करने के साथ-साथ ‘धनबाद पुलिस विजडम ऑन प्रिवेंशन ऑफ साइबर क्राइम’ पुस्तिका का विमोचन भी किया गया।
इस पुस्तिका में साइबर ठगी के 30 अलग-अलग पैटर्न को शामिल किया गया है। पुलिस के अनुसार, इन तरीकों का इस्तेमाल साइबर अपराधी अलग-अलग मामलों में लोगों को ठगने के लिए करते रहे हैं। पुस्तिका में कार्टून और सरल उदाहरणों के माध्यम से ठगी के तरीकों और उससे बचने के उपायों को समझाया गया है, ताकि आम लोग आसानी से साइबर अपराध की पहचान कर सकें और समय रहते सतर्क हो जाएं।
साइबर अपराधी लगातार ठगी के नए तरीके अपना रहे हैं। कभी बैंक अधिकारी बनकर तो कभी केवाईसी अपडेट कराने के नाम पर लोगों से गोपनीय जानकारी हासिल की जाती है। फर्जी लिंक भेजना, ओटीपी मांगना, ऑनलाइन जॉब का झांसा देना, डिजिटल अरेस्ट के नाम पर डराना, निवेश में भारी मुनाफे का लालच देना और सोशल मीडिया के जरिए ठगी करना साइबर अपराध के प्रमुख तरीकों में शामिल हैं। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी अनजान कॉल, मैसेज या लिंक पर तुरंत भरोसा न करें और उसकी सत्यता जांचने के बाद ही कोई कदम उठाएं।
जागरूकता अभियान के शुभारंभ के अवसर पर 20 स्कूलों के छात्र-छात्राओं और शिक्षकों के अलावा चैंबर के पदाधिकारी, धनबाद बार एसोसिएशन के पदाधिकारी तथा डालसा सचिव को भी आमंत्रित किया गया। पुलिस का प्रयास है कि ये लोग अभियान की कड़ी बनकर साइबर सुरक्षा का संदेश अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाएं।
धनबाद उपायुक्त ने बताया कि अभियान के दौरान प्रत्येक स्कूल में एक ‘साइबर सुरक्षा मित्र’ बनाया जाएगा। यह छात्र अपने विद्यालय के अन्य विद्यार्थियों को ऑनलाइन ठगी से बचने के उपायों की जानकारी देगा। स्कूलों की मॉर्निंग असेंबली में सामान्य ज्ञान के सवालों और प्रेरक प्रसंगों के साथ साइबर सुरक्षा से जुड़े सवाल और जरूरी सावधानियां भी विद्यार्थियों को बताई जाएंगी। इसका उद्देश्य बच्चों को कम उम्र से ही साइबर अपराध के प्रति जागरूक और सतर्क बनाना है।
कार्यक्रम में अधिकारियों ने अनजान लिंक पर क्लिक नहीं करने, व्यक्तिगत जानकारी साझा नहीं करने, पिन और ओटीपी किसी को नहीं बताने तथा बैंक संबंधी गोपनीय जानकारी किसी के साथ साझा नहीं करने पर विशेष जोर दिया। पुलिस ने बताया कि साइबर ठग आमतौर पर लोगों का भरोसा जीतकर, डर पैदा करके या लालच देकर उन्हें अपने जाल में फंसाते हैं। ऐसे में किसी भी संदिग्ध कॉल या मैसेज पर जल्दबाजी में प्रतिक्रिया देने से बचना जरूरी है।
एसएसपी ने बताया कि एफआईआर में सामने आए मामलों के आधार पर तैयार की गई पुस्तिका में साइबर ठगी के 30 अलग-अलग तरीकों को शामिल किया गया है। इन तरीकों को समझने के बाद लोगों में साइबर अपराध को पहचानने और उससे बचने की क्षमता बढ़ेगी। उन्होंने बताया कि पुस्तिका में कार्टून के माध्यम से भी साइबर ठगी के तरीकों को समझाया गया है, जिससे इसे पढ़ने वालों में रुचि पैदा होगी और वे संदेश को आसानी से समझ सकेंगे।
कार्यक्रम के दौरान डीसी, एसएसपी, सिटी एसपी और ग्रामीण एसपी ने बच्चों और शिक्षकों से सीधा संवाद किया। अधिकारियों ने विद्यार्थियों से अपील की कि साइबर सुरक्षा से जुड़ी जानकारी केवल अपने तक सीमित न रखें, बल्कि सहपाठियों, परिवार के सदस्यों और आसपास के लोगों को भी जागरूक करें। विद्यार्थियों ने भी भरोसा दिलाया कि वे स्कूल लौटने के बाद अपने साथियों और परिवार के लोगों के साथ साइबर सुरक्षा की जरूरी सावधानियां साझा करेंगे।
अभियान के तहत पुलिस केंद्र से दो साइबर सुरक्षा जागरूकता रथों को भी हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया। ये रथ विभिन्न क्षेत्रों में जाकर लोगों को साइबर ठगी के नए तरीकों और उनसे बचाव के उपायों की जानकारी देंगे। स्कूलों, संस्थानों और आम लोगों तक जागरूकता का संदेश पहुंचाने के लिए पुलिस ने अभियान को व्यापक स्तर पर चलाने की तैयारी की है।
धनबाद पुलिस का यह जागरूकता अभियान 21 अगस्त तक चलेगा। पुलिस का स्पष्ट संदेश है कि साइबर अपराध से बचने का सबसे प्रभावी तरीका सतर्कता है। किसी अनजान कॉल, लिंक या मैसेज पर भरोसा करने से पहले उसकी जांच करें और ओटीपी, एटीएम पिन, पासवर्ड या बैंक संबंधी कोई भी गोपनीय जानकारी किसी के साथ साझा न करें। जागरूक रहें, सतर्क रहें और साइबर ठगी से सुरक्षित रहें।
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