जामताड़ा जिले में राशन कार्ड में दर्ज अपात्र लाभुकों की पहचान और उनके नाम हटाने की कार्रवाई तेज कर दी गई है। खाद्य एवं आपूर्ति विभाग की समीक्षा में जिले के 24,119 मामलों को जांच के लिए चिन्हित किया गया है। इनमें 2,873 मामलों में नाम हटाने की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, जबकि 21,235 मामले अभी सत्यापन के स्तर पर लंबित हैं।
विभागीय आंकड़ों के अनुसार, जांच के दायरे में सबसे अधिक 10,283 साइलेंट लाभुक हैं। इनमें ऐसे लाभुक शामिल हैं, जिन्होंने छह महीने से लेकर एक वर्ष तक राशन का उठाव नहीं किया है। इसके अलावा 8,486 डुप्लीकेट लाभुक, 1,910 इनकम ग्रुप से जुड़े मामले, 350 वाहन मालिक, 324 ऐसे सदस्य जिनकी उम्र 100 वर्ष से अधिक दर्ज है और 2,292 ऐसे एकल सदस्य वाले मामले शामिल हैं, जिनकी उम्र 18 वर्ष से कम है।
भौतिक सत्यापन के बाद हटेंगे अपात्र नाम
जिला आपूर्ति पदाधिकारी क्यूम अंसारी के अनुसार विभागीय निर्देश के तहत राशन कार्डधारियों का भौतिक सत्यापन कराया जा रहा है। सत्यापन के दौरान जो लाभुक निर्धारित पात्रता मानकों पर खरे नहीं उतरेंगे, उनके नाम राशन कार्ड से हटाए जाएंगे। आयकरदाता और चार पहिया वाहन मालिकों समेत अन्य अपात्र श्रेणियों की भी जांच की जा रही है। जिला प्रशासन की आधिकारिक वेबसाइट पर क्यूम अंसारी को जिला आपूर्ति पदाधिकारी के रूप में दर्ज किया गया है।
विभाग पहले भी जिले में राशन कार्डधारियों की समीक्षा के दौरान लंबे समय से राशन नहीं उठाने वाले और अपात्र लाभुकों के नाम हटाने की प्रक्रिया तेज करने के निर्देश दे चुका है। साथ ही पात्र और जरूरतमंद लोगों को सूची में शामिल करने पर भी जोर दिया गया है।
आयकरदाता और दूसरे अपात्र लाभुक भी जांच के घेरे में
जामताड़ा में इससे पहले भी ऐसे राशन कार्डधारियों की जांच की जा चुकी है, जिनकी आय या कारोबारी गतिविधियां खाद्य सुरक्षा योजना की पात्रता से मेल नहीं खातीं। एक रिपोर्ट के अनुसार, छह लाख रुपये से अधिक वार्षिक टर्नओवर वाले 809 लोगों और जीएसटी धारक 18 लोगों के नाम भी जांच के लिए सामने आए थे।
विभाग का कहना है कि अभियान का मुख्य उद्देश्य सरकारी खाद्यान्न योजना का लाभ वास्तविक जरूरतमंद और पात्र परिवारों तक पहुंचाना है। लंबित 21 हजार से अधिक मामलों का भौतिक सत्यापन पूरा होने के बाद अपात्र लाभुकों के खिलाफ कार्रवाई का दायरा और बढ़ सकता है।
जामताड़ा में राशन कार्ड सत्यापन की यह प्रक्रिया ऐसे समय में महत्वपूर्ण मानी जा रही है, जब विभाग ई-केवाईसी और लाभुकों के रिकॉर्ड को भी दुरुस्त करने पर जोर दे रहा है। जुलाई 2026 की एक रिपोर्ट में जिले में कुल मिलाकर करीब 80 प्रतिशत ई-केवाईसी पूरी होने की जानकारी दी गई थी।
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