झारखंड की राजधानी रांची में झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की कथित अनियमितताओं को लेकर छात्रों का आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। इस आंदोलन का नेतृत्व कर रहे छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो ने सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की सलाह के बाद अपना निर्जला अनशन समाप्त कर दिया है। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया है कि उनका आंदोलन और अनशन दोनों जारी रहेंगे। अब वे स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए पानी का सेवन करेंगे, लेकिन अपनी मांगों से पीछे नहीं हटेंगे।

पिछले कई दिनों से चल रहे इस आंदोलन ने राज्य की राजनीति और प्रशासन का ध्यान अपनी ओर खींचा है। आंदोलनकारी छात्रों का आरोप है कि JPSC और JSSC की विभिन्न भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता की कमी रही है और कई प्रक्रियाओं में गंभीर अनियमितताएं हुई हैं। इसी के विरोध में छात्र लंबे समय से प्रदर्शन कर रहे हैं और सरकार से निष्पक्ष जांच तथा ठोस कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
बुधवार सुबह आंदोलनकारी नेता देवेंद्र नाथ महतो की सामाजिक कार्यकर्ता और पर्यावरणविद् सोनम वांगचुक से वीडियो कॉल पर बातचीत हुई। इस दौरान वांगचुक ने उनके स्वास्थ्य को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि किसी भी जन आंदोलन की सफलता के लिए आंदोलनकारियों का स्वस्थ रहना आवश्यक है। उन्होंने महतो से अपील की कि वे अपनी जान जोखिम में डालने के बजाय पानी का सेवन करें और पूरी ऊर्जा के साथ आंदोलन को आगे बढ़ाएं।
सोनम वांगचुक की सलाह को स्वीकार करते हुए देवेंद्र नाथ महतो ने जल ग्रहण कर अपना निर्जला अनशन समाप्त कर दिया। उन्होंने कहा कि यह फैसला आंदोलन को कमजोर करने के लिए नहीं, बल्कि उसे अधिक प्रभावी ढंग से जारी रखने के उद्देश्य से लिया गया है। उन्होंने दोहराया कि जब तक छात्रों की मांगों पर सरकार सकारात्मक निर्णय नहीं लेती, तब तक उनका संघर्ष जारी रहेगा।
धरना स्थल पर डॉक्टरों की एक टीम लगातार देवेंद्र नाथ महतो के स्वास्थ्य की निगरानी कर रही है। चिकित्सकों द्वारा समय-समय पर उनका स्वास्थ्य परीक्षण किया जा रहा है ताकि किसी भी तरह की चिकित्सीय आपात स्थिति से बचा जा सके। लंबे समय तक निर्जला अनशन के कारण स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभावों को देखते हुए डॉक्टरों ने भी नियमित निगरानी बनाए रखी है।
इधर, देवेंद्र नाथ महतो के साथ अनशन पर बैठे ब्रह्मानंद कुमार अब भी खुले में निर्जला अनशन पर डटे हुए हैं। उन्होंने अभी तक पानी का सेवन नहीं किया है और उनका निर्जला अनशन चौथे दिन में प्रवेश कर चुका है। वहीं महेंद्र मंडल भी मंगलवार से आंदोलन में शामिल होकर अनशन पर बैठे हुए हैं और आंदोलनकारियों के साथ अपनी एकजुटता बनाए हुए हैं।
आंदोलनकारियों का कहना है कि उनका उद्देश्य केवल अपनी मांगों को सरकार तक पहुंचाना नहीं, बल्कि राज्य में भर्ती प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी और निष्पक्ष बनाना है। उनका मानना है कि लाखों युवाओं के भविष्य से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की अनियमितता स्वीकार नहीं की जा सकती। छात्रों ने स्पष्ट किया है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती, तब तक आंदोलन शांतिपूर्ण तरीके से जारी रहेगा।
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