टेंडर घोटाले और कथित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में गिरफ्तार झारखंड सरकार के पूर्व मंत्री आलमगीर आलम को सोमवार को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली। शीर्ष अदालत ने उनकी जमानत याचिका स्वीकार कर ली है। इसके साथ ही करीब दो वर्षों से जेल में बंद आलमगीर आलम के रिहा होने का रास्ता साफ हो गया है।

मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस एम.एम. सुंदरेश्वर और जस्टिस एन. कोटीश्वर सिंह की बेंच में हुई। सुनवाई के दौरान अदालत ने आलमगीर आलम की जमानत याचिका मंजूर कर ली। इससे पहले 11 जुलाई को झारखंड हाईकोर्ट ने उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी थी। हाईकोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद की अदालत ने उन्हें राहत देने से इनकार किया था, जिसके बाद आलमगीर आलम ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
गौरतलब है कि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने पिछले वर्ष 15 मई को आलमगीर आलम को गिरफ्तार किया था। ईडी की जांच के दौरान उनके आप्त सचिव संजीव कुमार लाल और नौकर जहांगीर आलम के ठिकानों से करीब 32.30 करोड़ रुपये नकद बरामद किए गए थे। इसके बाद एजेंसी ने कार्रवाई करते हुए आलमगीर आलम को गिरफ्तार किया था। ईडी ने उन पर टेंडर घोटाले के जरिए करोड़ों रुपये की मनी लॉन्ड्रिंग करने का आरोप लगाया था।
इधर, सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिलने के बाद कांग्रेस नेताओं ने इसे “सत्य की जीत” बताया है। कांग्रेस की ओर से प्रतिक्रिया देते हुए कहा गया कि “सत्यमेव जयते, इस देश में आज भी न्याय जिंदा है।” पार्टी नेताओं ने कहा कि अदालत के फैसले से यह स्पष्ट हुआ है कि न्यायपालिका पर जनता का विश्वास कायम है।
हालांकि, मामले की सुनवाई अभी जारी है और अंतिम फैसला अदालत में होना बाकी है।





