सरकार नहीं कर पा रही है योजनाओं से आदिवासी का परंपराओं का संरक्षण, आदिवासी समाज का कहना है कि सरहुल सरना स्थल पर दो साल पहले गिरा मंडप (mandap) का नहीं हुआ मरम्मत लेकिन उनमें कई योजनाएं लूट और भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ रही हैं , लातेहार सदर प्रखंड के जड़ेयांग गांव स्थित सरहुल सरना स्थल पर करीब दो वर्ष पहले बनाया गया मंडप (mandap) का छत ध्वस्त हो गया।छत गिरने के बाद ग्रामीणों में काफी नाराजगी है। ग्रामीणों ने निर्माण कार्य की उच्चस्तरीय जांच कर दोषियों पर कार्रवाई और गुणवत्तापूर्ण तरीके से मंडप का पुनर्निर्माण कराने की मांग की है।ग्रामीणों का आरोप है कि मंडप(mandap) निर्माण के दौरान ही कार्य की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठाए गए थे।मंडप (mandap) की छत गिरने से इसकी शिकायत संबंधित स्तर पर भी की गई थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। अब महज दो वर्ष में ही मंडप (mandap) की छत गिरने से निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
जिले के विभिन्न ग्रामीण क्षेत्रों में सरना स्थल, मसना स्थल और देवस्थल के संरक्षण के लिए कई योजनाएं संचालित की गई हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि इनमें कई योजनाओं के निर्माण में गुणवत्ता का ध्यान नहीं रखा गया है। जड़ेयांग का मामला भी इसी तरह की अनियमितता का उदाहरण है । दरअसल, लातेहार मे कल्याण मंत्रालय के माध्यम से आदिवासियों के पारंपरिक स्थलों को सुरक्षित करने के लिए बड़े पैमाने पर सौंदर्यीकरण और चहारदीवारी निर्माण की योजनाएं संचालित की जा रही हैं।इसी क्रम में लातेहार सदर प्रखंड के जड़ेयांग गांव में गांव में मसना स्थल के घेराबंदी के लिए लगभग 49 लाख रुपये का आवंटन सरकार के द्वारा किया गया था. हैरत की बात यह है कि वर्ष 2023 में आरंभ हुए इस कार्य को दोनों योजनाओं को कागज में पूरा कर दिया गया, लेकिन धरातल पर सिर्फ एक ही योजना पाई गई जिसमें वह भी आधा अधूरा काम किया गया एवं दूसरी योजना में योजना के नाम पर आज तक एक ईंट की भी जुड़ाई नहीं हुई है कुछ भी कार्य नहीं किया गया और लगभग बिना काम किये ही 25 लख रुपए की निकासी हो गई इसी क्रम में सदर प्रखंड के रजवार गांव में सरना स्थल के सौंदर्यीकरण के लिए लगभग 49 लाख रुपये का आवंटन सरकार के द्वारा किया गया था।
हैरत की बात यह है कि वर्ष 2023 में आरंभ हुए इस कार्य को कागज में पूरा कर दिया गया, लेकिन धरातल पर योजना के नाम पर सिर्फ रंग-रोंगन का कार्य किया गया है अब यह मामला धीरे-धीरे तूल पकड़ने लगा है जिप सदस्य विनोद उरांव ने विभाग पर आरोप लगाते हुए कहा की इस भ्रष्टाचार के खेल में बिचौलिए, विभाग के बड़ा बाबू क्लर्क जेई ,एई एव पदाधिकारी की मिली भगत से करोड़ों रुपए का घोटाले हुआ है अगर पूरे जिले मे कल्याण विभाग 5 साल की योजनाओं की जांच हो जाए तो बहुत बड़ा घोटाले का खुलासा हो सकता है कल्याण विभाग बिचौलियों का अड्डा बन चुका है एवं लातेहार के भोले -भाले आदिवासियों को 2000 से ₹4000 देखकर अध्यक्ष सचिव बना कर चेक में साइन करवा कर पैसा का निकासी भी किया जा रहा है।जिप सदस्य विनोद उरांव के द्वारा आगे बताया गया कि मेरे द्वारा इस घोटाला की शिकायत लगातार जिले के डीसी एव कई अधिकारियों से किया गया एवं जिला परिषद की बैठक में भी मामला को उठाया गया लेकिन आज तक कोई कार्रवाई नहीं की गई आगे हम प्रशासन को चेतावनी दे रहे हैं कि अगर निष्पक्षता से जांच करके दोषियों के ऊपर कारवाई नहीं हुई तो आगे हम अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल के लिए भी धरना देंगे।
उन्होंने कहा कि आदिवासियों के हित के लिए जो योजनाएं बन रही हैं उसकी मॉनिटरिंग सही तरीके से नहीं होने के कारण ही योजनाएं धरातल पर नहीं उतर पा रही हैं। मंडप की छत गिरने की सूचना मिलने पर जिला परिषद सदस्य विनोद उरांव ने योजना स्थल का निरीक्षण किया। उन्होंने निर्माण की स्थिति पर नाराजगी जताते हुए कहा कि कल्याण विभाग की योजनाओं में गुणवत्ता की अनदेखी की जा रही है। उन्होंने कहा कि आदिवासी कल्याण और परंपराओं के संरक्षण के नाम पर संचालित योजनाओं की जांच होनी चाहिए।विनोद उरांव ने बताया कि उन्होंने पूर्व में भी कल्याण विभाग और जिला प्रशासन के अधिकारियों से मामले की शिकायत कर उच्चस्तरीय जांच की मांग की थी। इसके बावजूद कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने कहा कि मंडप की छत दो साल में गिरना निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल है। निरीक्षण के दौरान उन्होंने सरना स्थल पर चापाकल और दरवाजे के निर्माण की स्थिति पर भी सवाल उठाए आगे जीप सदस्य विनोद उरांव ने कहा कि कल्याण विभाग द्वारा संचालित योजनाएं इसी प्रकार भ्रष्टाचार की भेंट चल रही है।
उन्होंने कहा कि यहां आदिवासी कल्याण और परंपराओं के संरक्षण के नाम पर लूट मची हुई है।उन्होंने कहा कि जिस प्रकार सरहुल सरना स्थल के मंडप का छत ध्वस्त हुआ है, इससे निर्माण कार्य की गुणवत्ता की पोल खुल गई है. यहां चापाकल लगाने के नाम पर भी सिर्फ मजाक किया गया है. दरवाजा भी सिर्फ नाम के लिए लगाया गया है. उन्होंने कहा कि यह तो एकमात्र उदाहरण है. यदि विभागीय स्तर पर अन्य योजनाओं की भी जांच की जाए तो बड़े पैमाने पर गड़बड़ी का खुलासा होगा।
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