धनबाद के तीन बार सांसद और तीन बार विधायक रहे जननेता एवं मजदूर आंदोलन के प्रखर नेता स्वर्गीय ए.के. राय की सातवीं पुण्यतिथि पर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई। नूतनडीह मोड़ स्थित केंद्रीय अस्पताल परिसर के समीप स्थापित उनकी प्रतिमा स्थल पर ए.के. राय स्मारक समिति की ओर से श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया।

श्रद्धांजलि सभा में विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं, मजदूर संगठनों के प्रतिनिधियों और बड़ी संख्या में स्थानीय लोगों ने भाग लिया। इस दौरान सभी ने एके राय की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उनके संघर्षपूर्ण जीवन, जनसेवा और मजदूरों के हित में किए गए कार्यों को याद किया।
कार्यक्रम में निरसा विधायक अरूप चटर्जी, टुंडी विधायक मथुरा महतो, कांग्रेस नेता वैभव सिन्हा, स्मारक समिति के अध्यक्ष हरिप्रसाद पप्पू सहित कई गणमान्य लोगों ने श्रद्धासुमन अर्पित किए। उपस्थित लोगों ने एके राय के विचारों और आदर्शों पर चलने का संकल्प लिया।
वक्ताओं ने कहा कि एके राय ने राजनीति को जनसेवा का माध्यम बनाया। उन्होंने हमेशा गरीबों, मजदूरों, किसानों और शोषित वर्गों के अधिकारों की आवाज बुलंद की। धनबाद के कोयला क्षेत्र में मजदूर आंदोलन को मजबूती देने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही, जिसके कारण वे मजदूरों के बीच “जननेता” के रूप में लोकप्रिय हुए।
अजीत कुमार राय (एके राय) झारखंड की राजनीति के प्रमुख समाजवादी नेताओं में शामिल रहे। मूल रूप से पश्चिम बंगाल से आने वाले एके राय ने इंजीनियरिंग की पढ़ाई के बाद सिंदरी स्थित खाद कारखाने में नौकरी की, लेकिन मजदूरों और आम लोगों के मुद्दों को लेकर उन्होंने नौकरी छोड़कर जनआंदोलनों का रास्ता चुना।
उन्होंने धनबाद क्षेत्र में मजदूरों और विस्थापितों के अधिकारों के लिए लंबे समय तक संघर्ष किया। वे तीन बार धनबाद लोकसभा क्षेत्र से सांसद और तीन बार विधायक रहे। उन्होंने मार्क्सवादी समन्वय समिति की स्थापना की और झारखंड की अलग पहचान, मजदूर अधिकारों और सामाजिक न्याय के मुद्दों पर सक्रिय भूमिका निभाई। शिबू सोरेन और बिनोद बिहारी महतो के साथ मिलकर झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के सह-संस्थापक भी रहे।
एके राय अपनी सादगी, ईमानदार छवि और जनसरोकारों वाली राजनीति के लिए जाने जाते थे। 21 जुलाई 2019 को उनका निधन हुआ, लेकिन मजदूर आंदोलन और झारखंड की राजनीति में उनके योगदान को आज भी याद किया जाता है। और आगे भी याद किया जाता रहेगा।
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