पश्चिमी सिंहभूम के कोल्हान, पोड़ाहाट और सारंडा के जंगलों में माओवादी संगठन को एक और बड़ा झटका लगा है। झारखंड सरकार की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति और सुरक्षा बलों के लगातार बढ़ते दबाव के बीच सोमवार को 10 लाख रुपये के इनामी जोनल कमांडर सालुका कायम समेत चार सक्रिय माओवादियों ने पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया।
डीआईजी कोल्हान क्षेत्र और डीआईजी सीआरपीएफ रेंज चाईबासा की मौजूदगी में हुए इस आत्मसमर्पण को ऑपरेशन नवजीवन-III के तहत बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। इससे पहले भी ऑपरेशन नवजीवन के विभिन्न चरणों में बड़ी संख्या में माओवादी हथियार छोड़कर मुख्यधारा में लौट चुके हैं।
आत्मसमर्पण करने वालों में सोनुवा थाना क्षेत्र के कुदाबुरू निवासी सालुका कायम उर्फ भुवनेश्वर उर्फ मारू प्रमुख हैं। सालुका पर चाईबासा में 90 और सरायकेला में 6 समेत कुल 96 मामले दर्ज बताए गए हैं। आत्मसमर्पण के दौरान उसके पास से एक AK-47 राइफल, दो मैगजीन और 843 कारतूस बरामद किए गए।
दूसरे माओवादी के रूप में टोंटो थाना क्षेत्र के रंगड़ाहातु निवासी कोदोमुनी कोड़ा उर्फ कितामाई ने आत्मसमर्पण किया। उसके खिलाफ सात मामले दर्ज हैं। उसके पास से एक वायरलेस सेट और 697 कारतूस बरामद हुए।
तीसरी महिला माओवादी गोईलकेरा थाना क्षेत्र के ईचागोड़ा निवासी पिंकी पूर्ती उर्फ सुकांती पूर्ती है। उसके खिलाफ 13 मामले दर्ज हैं। आत्मसमर्पण के दौरान उसके पास से एक वायरलेस सेट और 639 कारतूस मिले।
चौथी महिला माओवादी मुफ्फसिल थाना क्षेत्र के अंजेदबेड़ा निवासी अनिता तामसोय उर्फ अनिता कायम है। उसके खिलाफ भी 13 मामले दर्ज बताए गए हैं। उसके पास से एक INSAS राइफल, पांच मैगजीन और 97 कारतूस बरामद किए गए।
सालुका कायम लंबे समय से सुरक्षा एजेंसियों के निशाने पर था। हाल के महीनों में भी उसके दस्ते की सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ हुई थी। सालुका पोड़ाहाट और कोल्हान के जंगलों में सक्रिय माओवादी दस्ते का महत्वपूर्ण सदस्य रहा है।
पुलिस के अनुसार, पश्चिमी सिंहभूम में माओवादियों के खिलाफ लगातार चलाए जा रहे अभियान का असर अब साफ दिखाई देने लगा है। पिछले साल 10, मई 2026 में ऑपरेशन नवजीवन-I के तहत 25 और जुलाई 2026 में ऑपरेशन नवजीवन-II के तहत 14 माओवादियों के आत्मसमर्पण किया है। इस तरह जुलाई 2026 तक जिले में कुल 49 माओवादी आत्मसमर्पण कर चुके थे। इसी दौरान 22 माओवादी मुठभेड़ में मारे गए, जबकि 60 को गिरफ्तार कर जेल भेजे जाने की जानकारी पुलिस ने दी है। जुलाई के अंत में भी 16 माओवादियों के आत्मसमर्पण की खबर सामने आई थी, जिससे कोल्हान क्षेत्र में माओवादी संगठन पर बढ़ते दबाव का संकेत मिलता है।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि केवल सुरक्षा अभियान ही नहीं, बल्कि आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति भी माओवादियों को मुख्यधारा में लौटने के लिए प्रेरित कर रही है। सारंडा क्षेत्र में नए सुरक्षा कैंपों की स्थापना, लगातार सघन अभियान और ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य शिविरों के जरिए सुरक्षा बलों ने लोगों के बीच विश्वास मजबूत करने का प्रयास किया है।
पुलिस के मुताबिक, एसडीपीओ चक्रधरपुर डॉ. सैयद मुस्तफा हाशमी की ओर से आयोजित स्वास्थ्य शिविरों और ग्रामीणों से लगातार संवाद का भी सकारात्मक असर पड़ा है। अधिकारियों का दावा है कि सुरक्षा और विकास की गतिविधियों के बढ़ने से माओवादी प्रभाव वाले इलाकों में परिस्थितियां तेजी से बदल रही हैं।
चार माओवादियों का एक साथ आत्मसमर्पण कोल्हान में माओवादी संगठन के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। खास तौर पर 10 लाख के इनामी जोनल कमांडर सालुका कायम का हथियार छोड़ना सुरक्षा बलों के लगातार अभियान और सरकार की पुनर्वास नीति की अहम सफलता के तौर पर देखा जा रहा है।
पुलिस का कहना है कि पश्चिमी सिंहभूम में नक्सलवाद अब कमजोर पड़ चुका है और जिला विकास की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। आने वाले दिनों में सुरक्षा अभियान, ग्रामीण विकास और पुनर्वास नीति के जरिए माओवादी प्रभाव को पूरी तरह समाप्त करने की रणनीति पर जोर जारी रहेगा।
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