इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने आशंका जताई है कि रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ईरान को किसी प्रकार की सहायता दे रहे हैं। यदि ऐसा होता है, तो यह संघर्ष और जटिल हो सकता है साथ ही अमेरिका और रूस के बीच तनाव बढ़ने की संभावना भी बन सकती है।

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव ने दुनिया भर की राजनीति और एनर्जी बाज़ारों को झकझोर दिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व में अमेरिका और उसके सहयोगियों द्वारा ईरान पर किए जा रहे सैन्य हमलों से मध्य-पूर्व में हालात तेजी से तनावपूर्ण होते जा रहे हैं।
तेल आपूर्ति पर मंडराया संकट
इस संघर्ष का सबसे बड़ा असर वैश्विक तेल बाज़ार पर देखा जा रहा है। मध्य-पूर्व में स्थित महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग होर्मुज स्ट्रेट से दुनिया की लगभग 20% तेल आपूर्ति गुजरती है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि यह मार्ग बंद होने से वैश्विक स्तर पर गंभीर ऊर्जा संकट पैदा हो सकता है।
रूस के तेल पर प्रतिबंधों में अस्थायी ढील
स्थिति को नियंत्रित करने और तेल बाज़ार को स्थिर रखने के लिए अमेरिका ने रूस के तेल पर लगाए गए कुछ प्रतिबंधों में अस्थायी ढील दी है। इसका उद्देश्य वैश्विक स्तर पर तेल की कमी को कम करना है, क्योंकि युद्ध के कारण मध्य-पूर्व से आपूर्ति प्रभावित हो रही है।
यूरोपीय देशों की आलोचना
अमेरिका के इस फैसले पर कई यूरोपीय देशों ने चिंता जताई है। उनका मानना है कि प्रतिबंधों में ढील देने से रूस को आर्थिक लाभ मिल सकता है और इससे यूक्रेन के खिलाफ चल रहे युद्ध में उसकी स्थिति मजबूत हो सकती है।
तेल की कीमतों में भारी उछाल की आशंका
विश्लेषकों का मानना है कि यदि यह युद्ध लंबे समय तक चलता है, तो वैश्विक तेल कीमतों में तेज उछाल आ सकता है। इसका असर दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ेगा और ऊर्जा संकट के साथ-साथ आर्थिक दबाव भी बढ़ सकता है।
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