देवघर की महिलाएं रच रही है नया इतिहास,आम की खेती कर कमा रही हजारों का मुनाफा।अब महिलाओं के लिए कोई भी काम चुनौती भरा नहीं है, हर क्षेत्र में महिलाए लहरा रही है परचम। देवघर आम की खेती के क्षेत्र में महिलाएं अपना अहम भूमिका निभा रही है।आम की खेती में देवघर की ग्रामीण महिलाओं ने JSLPS से जुड़कर आम की खेती को एक नया स्वरूप देने का काम कर रही है।वे न केवल शहर में आम की बढ़ते मांगों को पूरा कर रही है। बल्कि अपनी आमदनी भी बढ़ा रही हैं।

हेंमत सरकार की ‘बिरसा हरित ग्राम योजना’ के तहत, 2018 में महिलाओं को प्रति एकड़ 112 आम के पौधे दिए गए थे। इस आम की खेती के लिए MGNREGA के ज़रिए मदद दी जा रही है। हालांकि उन्हें शुरुआत में कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा जैसे मिट्टी की खराब गुणवत्ता,पौधों का सूखना और कम पैदावार लेकिन महिलाओं ने हार नहीं मानी।
महिलाओं की लगातार मेहनत की बदौलत अब बाग आमों से लदे हुए हैं और महिलाएं अपनी उपज को बाज़ार में बेचकर आर्थिक रूप से मज़बूत हो रही हैं। रिखिया इलाके के हिंदना पूर्वी गांव की महिलाओं ने बताया कि इस साल पहली बार उन्हें अपने बागों से आम बेचकर कमाई करने का मौका मिला है। पहले,उन्हें अपने आम स्थानीय व्यापारियों को कम कीमत पर बेचने पड़ते थे,जिससे बहुत कम मुनाफा होता था।और उन्हें दुगुना मुनाफा मिल रहा है।
ज़िला प्रशासन ने अलग-अलग ब्लॉक में बिक्री के स्टॉल लगाए हैं।जिससे महिलाएं रोज़ाना ₹1,000 से ₹1,200 तक कमा पा रही हैं। उन्होंने बताया कि खेती पर आधारित इस काम ने रोज़गार और आमदनी के नए रास्ते खोले हैं। महिलाएं खुद ही पूरी प्रक्रिया संभालती है।
आम तोड़ने से लेकर उन्हें बाज़ार तक ले जाने और बिक्री का प्रबंधन करने तक। हालांकि,आम की खेती से जुड़ी महिलाओं ने बताया कि उन्हें अभी भी अलग-अलग जगहों पर स्टॉल लगाकर अपनी उपज बेचनी पड़ती है। क्योंकि आम बेचने के लिए कोई स्थायी बाज़ार अभी तक नहीं बना है। उनका मानना है कि अगर स्थायी बाज़ार मिल जाए, तो आम की खेती और भी ज़्यादा फायदेमंद हो जाएगी।
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