झारखंड सरकार के परिवहन विभाग की महत्वाकांक्षी योजना धरातल पर तो उतरी, लेकिन Mismanagement के कारण आधी-अधूरी तैयारियों ने इस पर पानी फेर दिया। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के निर्देश पर आज धनबाद जिले के गोविंदपुर प्रखंड सभागार में एक दिवसीय ड्राइविंग लाइसेंस कैंप का आयोजन किया गया था। सरकार की इस पहल को लेकर लोगों में भारी उत्साह था, लेकिन प्रशासन की लचर व्यवस्था (Mismanagement) के कारण यह कैंप देखते ही देखते महा-अव्यवस्था का केंद्र बन गया सुबह से ही हजारों की संख्या में महिला और पुरुष आवेदक प्रखंड कार्यालय पहुंचने लगे।

जगह कम और भीड़ ज्यादा होने के कारण परिसर में जबरदस्त धक्का-मुक्की की स्थिति पैदा हो गई। हद तो तब हो गई जब इस भीषण गर्मी में प्रशासन की तरफ से पीने के पानी तक की बुनियादी व्यवस्था नहीं की गई थी बिना ऑनलाइन स्लॉट बुकिंग के पहुंचे सैकड़ों लोग।
आधिकारिक पत्र में नियमों का स्पष्ट उल्लेख न होने से फूटा गुस्सा आगामी कैंपों में व्यवस्था दुरुस्त करने और नियम पहले सार्वजनिक करने की अपील।इस पूरे कैंप में सबसे बड़ी मुसीबत ‘स्लॉट बुकिंग’ को लेकर आई।
दरअसल, सैकड़ों युवा बिना प्री-बुकिंग के ही कैंप पहुंच गए थे, जिन्हें नियमों का हवाला देकर वापस लौटा दिया गया। दूर-दराज से आए इन युवाओं का काम नहीं हो सका, जिससे उनका गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया सरकार को अपने आधिकारिक पत्र में पहले ही साफ कर देना चाहिए था कि बिना ऑनलाइन स्लॉट बुकिंग के लाइसेंस नहीं बनेगा। यहां आने पर नियम अलग ही दिख रहे हैं। बिना जानकारी के दूर-दूर से आए लोग परेशान हो रहे हैं खास कर ग्रामीण क्षेत्रों में ड्राइविंग लाइसेंस आसानी से बन सके, इसके लिए मुख्यमंत्री का यह कदम वाकई सराहनीय है।
लेकिन अधिकारियों द्वारा भीड़ का सही आकलन न करने और तकनीकी नियमों की जानकारी पहले न देने के कारण गोविंदपुर का यह कैंप अव्यवस्था की भेंट चढ़ गया। अब युवाओं ने मांग की है कि अगले कैंपों में व्यवस्था सुधारी जाए ताकि जनता को ऐसी फजीहत न झेलनी पड़े।
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