दुमका जिला के मसलिया में कुछ दिन पहले कौशल विकास केंद्र में फूड पॉइजनिंग (food poisoning) के वजह से कुछ बच्चे -बच्चियों बीमार पड़ गए थे। फूड पॉइजनिंग (food poisoning) के बाद से दुमका जिला प्रशासन रेस हो गई और जांच पड़ताल का सिलसिला शुरू हो गया केंद्र संचालक और रसोईया पर कार्रवाई भी हुआ। लेकिन दुमका जिला प्रशासन सुस्त पड़ गई और कौशल विकास केंद्र संचालक आराम फरमाने रहे है वही स्कूल के बच्चें food poisoning के शिकार हो रहे है, रजरमुंडी प्रखंड के जरमुंडी में संचालित झारखंड सरकार के कौशल विकास योजना केंद्र का जब जायजा लिया गया। कई खामियां देखने को मिला बच्चों को मिलने वाला शुद्ध भोजन के नाम पर बिना हाइजीनिक वाली भोजन परोसा जा रहा हैं। खाना पकाने वाले रसोई में बर्तन धोने वाला नल नल के समीप बर्तनों अंबार लगा है बर्तन के समीप सैकड़ो की संख्या में मक्खी भन भना रहे थे।

स्टोर में शौचालय बना है गंदगी से घिरे पड़े हैं ताजी हरी सब्जियां कार्टून में पैक, बच्चों को खिलाने वाले जगह पर वर्षा का पानी के बीच बच्चे खाने को मजबूर हैं।इस मामले को लेकर जब रसोईया से बात की गई तो उन्होंने कहा कि जल्द ही सफाई इसका कर दिए जाएंगे। केंद्र प्रबंधक राहुल कुमार सिंह ने कहा कि खामियां छोटी है समाधान किए जाएंगे जब संवाददाता के द्वारा पूछा गया मसलिया जैसे जगह पर इस तरह की घटना इसके बावजूद भी लापरवाही या जानबूझकर बच्चों को दूषित भोजन खिलाई जा रहे हैं इसकी जिम्मेदार कौन है।
आश्चर्य की बात यह है कि जरमुंडी के केंद्र प्रबंधक मसलिया में जांच टीम बनाकर भेजा गया और राहुल कुमार सिंह के द्वारा ऐसी लापरवाही क्या माफ करने लायक है। क्या दुमका जिला प्रशासन खबर चलने के बाद संज्ञान लेती है क्या ऐसे लापरवाह केंद्र पर प्रशासन द्वारा करवाई किया जाएगा यह भी सवाल खड़ा होता है। क्योंकि मसलिया कार्रवाई के बाद जिला प्रशासन सुस्त पड़ गई है स्वस्थ रवैया के कारण ऐसा तस्वीर देखने को मिल रहा है। घरेलू उपयोग करने वाले गैस भी केंद्र में बच्चों को भोजन पकाने के लिए उपयोग किया जा रहे हैं। इस पूरे मामले पर फूड सेफ्टी ऑफिसर से जानकारी लेनी चाहिए तो रविवार होने के कारण उनसे संपर्क नहीं हो पाया।
अगर बात करे कौशल विकास केंद्र जरमुंडी की तो यहां पर दो ट्रेड का प्रशिक्षण दिया जा रहा है पहला सिलाई तो दूसरा जनरल ड्यूटी असिस्टेंट दोनों के प्रशिक्षण में गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण तो दिए जा रहे हैं। लेकिन जीडीए के प्रशिक्षण में प्रैक्टिकल के लिए जमशेदपुर के अस्पताल में बच्चे -बच्चियों को दिए जाते आ रहे हैं। सुदूर ग्रामीण क्षेत्र के बच्चे अगर जमशेदपुर में प्रशिक्षण दिए जाएंगे तो आधा से अधिक बच्चे इस प्रशिक्षण से प्रभावित हो सकते हैं। प्रशिक्षण ले रहे बच्चों का कहना है प्रशिक्षण में आपातकालीन स्थिति में कैसे मेडिकल सपोर्ट दिए जाएंगे।इसकी पूरी जानकारी और सिखाया भी गया है लेकिन जमशेदपुर की जगह जरमुंडी अस्पताल में प्रशिक्षण दिए जाते तो ज्यादा बेहतर होता।
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