बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव के लिए मतदान की प्रक्रिया गुरुवार को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो गई। निर्वाचन आयोग के अनुसार सीट पर कुल 34.16 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। यह सीट भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन के इस्तीफे के बाद खाली हुई थी। अब मुकाबला मुख्य रूप से भाजपा के नीरज कुमार सिन्हा, जनसुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर और राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के राकेश कुमार के बीच माना जा रहा है। हालांकि चुनावी चर्चा भाजपा और जनसुराज के बीच सीधी टक्कर पर अधिक केंद्रित रही। उपचुनाव के नतीजे 3 अगस्त को घोषित किए जाएंगे।

कम मतदान ने खड़े किए बड़े सवाल
मतदान खत्म होने के साथ सबसे बड़ा सवाल यही उभरकर सामने आया है कि क्या बांकीपुर की जनता ने बदलाव की राजनीति को लेकर वह उत्साह नहीं दिखाया, जिसकी उम्मीद जनसुराज और प्रशांत किशोर कर रहे थे? पूरे दिन मतदान की रफ्तार सुस्त रही और अंत तक कोई ऐसा उछाल नहीं आया, जो किसी बड़े जनउभार का संकेत देता।
प्रशांत किशोर लंबे समय से बिहार में “व्यवस्था परिवर्तन” की राजनीति का संदेश लेकर मैदान में हैं। बांकीपुर उपचुनाव को उनकी राजनीति की पहली बड़ी परीक्षा माना जा रहा था। माना जा रहा था कि उनके मैदान में उतरने से बड़ी संख्या में वे मतदाता मतदान केंद्रों तक पहुंचेंगे, जो अब तक भाजपा और राजद दोनों से दूरी बनाए हुए थे। लेकिन मतदान का अंतिम आंकड़ा इस दावे को मजबूती देता नजर नहीं आया।
बदलाव की उम्मीद पर क्यों नहीं उमड़ी भीड़?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना था कि बांकीपुर में पिछले डेढ़ दशक से मतदान प्रतिशत 39 से 42 प्रतिशत के बीच रहने के पीछे एक बड़ा कारण यह रहा कि सक्रिय मतदान मुख्य रूप से भाजपा और राजद के परंपरागत वोटरों तक सीमित रहा। वहीं लगभग 60 प्रतिशत मतदाता ऐसे रहे, जो या तो मतदान करने नहीं निकलते या किसी भी दल के प्रति स्पष्ट झुकाव नहीं रखते।
जनसुराज की रणनीति इसी वर्ग को मतदान केंद्र तक लाने की थी। यह वही तबका माना जाता है जो भ्रष्टाचार, बेरोजगारी, शिक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था से नाराज है और नई राजनीति की बात करता है। लेकिन मतदान के आंकड़े बताते हैं कि यह वर्ग बड़े पैमाने पर मतदान के लिए बाहर नहीं निकला।
पिछले तीन चुनावों का रिकॉर्ड
वर्ष मतदान प्रतिशत जीत का अंतर
2015 40.24% 39,767 वोट
2020 25.91% 39,036 वोट
2025 40.97% 51,936 वोट
2026 (उपचुनाव) 34.16% परिणाम 3 अगस्त को
स्पष्ट है कि उपचुनाव में मतदान प्रतिशत पिछले विधानसभा चुनाव के मुकाबले काफी कम रहा।
हर चरण में पिछड़ा मतदान
मतदान की शुरुआत से ही सुस्ती दिखाई दी।
समय विधानसभा चुनाव 2025 उपचुनाव 2026
सुबह 9:00 बजे तक 5.10% 4.21%
पहले चार घंटे 14.00% 11.50%
दोपहर 1:00 बजे तक 25.00% 20.01%
दोपहर 3:00 बजे तक 28.50% 27.90%
अंतिम मतदान 40.97% 34.16%
मतदान के हर चरण में यह स्पष्ट होता रहा कि मतदाताओं में वह उत्साह नहीं दिखा, जिसकी राजनीतिक दलों को उम्मीद थी।
क्या नैरेटिव बनाने में चूक गए प्रशांत किशोर?
बांकीपुर उपचुनाव को सिर्फ एक सीट का चुनाव नहीं, बल्कि प्रशांत किशोर की राजनीतिक स्वीकार्यता की परीक्षा भी माना गया। उनकी कोशिश दो बड़े राजनीतिक संदेश स्थापित करने की थी।
पहला, जातीय समीकरणों से ऊपर उठकर विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य और भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों पर मतदान कराया जाए।
दूसरा, यदि भाजपा इस सीट पर हारती है तो यह संदेश जाए कि बिहार की जनता राज्य सरकार और उसके नेतृत्व से नाराज है।
लेकिन कम मतदान ने इन दोनों दावों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। आमतौर पर जब किसी नए राजनीतिक विकल्प के पक्ष में मजबूत जनलहर बनती है तो मतदान प्रतिशत में उल्लेखनीय वृद्धि देखने को मिलती है। बांकीपुर में ऐसा होता नहीं दिखा।
अब पूरी नजर 3 अगस्त पर है। मतगणना के बाद ही यह साफ होगा कि बांकीपुर की जनता ने परंपरागत राजनीति पर भरोसा जताया है या फिर बदलाव की राजनीति को अपनी स्वीकृति दी है। फिलहाल 34.16 प्रतिशत मतदान ने चुनावी परिणाम से पहले राजनीतिक बहस को जरूर और दिलचस्प बना दिया है।





