धनबाद में बढ़ते साइबर अपराध पर अंकुश लगाने के लिए पुलिस और बैंक अब मिलकर संदिग्ध बैंक खातों की निगरानी बढ़ाएंगे। साइबर सेफ्टी अवेयरनेस वीक के तहत धनबाद समाहरणालय स्थित पुलिस सभागार में विभिन्न बैंकों के प्रबंधकों के साथ हुई बैठक में म्यूल बैंक अकाउंट, फर्जी सिम कार्ड और चोरी के मोबाइल फोन के जरिए होने वाले साइबर अपराध पर विस्तार से चर्चा की गई। धनबाद जिला प्रशासन की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार एस. मोहम्मद याकूब वर्तमान में ग्रामीण पुलिस अधीक्षक हैं।
बैठक में पुलिस ने बैंकों से नए खुले बचत खातों का समय-समय पर फिजिकल वेरिफिकेशन कराने और संदिग्ध खातों की जानकारी तत्काल पुलिस को उपलब्ध कराने की अपील की। पुलिस का मानना है कि बैंकिंग व्यवस्था में अतिरिक्त सतर्कता बढ़ाकर साइबर ठगी के लिए इस्तेमाल होने वाले फर्जी और म्यूल खातों पर प्रभावी रोक लगाई जा सकती है।
ग्रामीण एसपी एस. मोहम्मद याकूब ने बताया कि साइबर अपराध में चोरी के मोबाइल फोन, दूसरे लोगों के नाम पर जारी फर्जी सिम कार्ड और म्यूल बैंक अकाउंट महत्वपूर्ण माध्यम बन चुके हैं। इन तीनों पर प्रभावी नियंत्रण होने से साइबर अपराधियों के लिए ठगी की रकम को इधर-उधर करना काफी मुश्किल हो सकता है।
म्यूल अकाउंट पर विशेष नजर
बैठक में सबसे अधिक जोर म्यूल बैंक खातों की पहचान और निगरानी पर दिया गया। ऐसे खातों का इस्तेमाल अक्सर साइबर ठगी से प्राप्त रकम को रिसीव करने और आगे ट्रांसफर करने के लिए किया जाता है। हाल के एक मामले में धनबाद पुलिस ने ऐसे व्यक्ति को गिरफ्तार किया था, जो साइबर अपराधियों को बैंक खाते उपलब्ध कराता था और जांच में उन खातों के साइबर ठगी से जुड़े होने की बात सामने आई थी।
बैंकों से कहा गया है कि नए खुले खातों का समय-समय पर भौतिक सत्यापन किया जाए। खाताधारक को बैंक बुलाकर मोबाइल नंबर और अन्य जरूरी विवरणों की पुष्टि की जाएगी। साथ ही यह भी जांचने की कोशिश होगी कि बैंक खाता वास्तव में संबंधित व्यक्ति ने ही खोला है या किसी अन्य व्यक्ति ने उसके दस्तावेजों का इस्तेमाल कर खाता खुलवाया है।
कमीशन के लालच में खुलवाए जाते हैं खाते
पुलिस के अनुसार साइबर अपराध से जुड़े नेटवर्क में कई बार लोगों को पैसे या कमीशन का लालच देकर उनके नाम पर बैंक खाते खुलवाए जाते हैं। कुछ लोग जानबूझकर अपने खाते उपलब्ध कराते हैं, जबकि कई लोग पूरे साइबर नेटवर्क की जानकारी के बिना इस तरह के लेनदेन में फंस जाते हैं।
ऐसे मामलों में खाते का इस्तेमाल साइबर ठगी की रकम प्राप्त करने, ट्रांसफर करने या निकालने के लिए किया जा सकता है। यही वजह है कि पुलिस बैंक खातों के फिजिकल वेरिफिकेशन को साइबर अपराध रोकने की रणनीति की अहम कड़ी मान रही है।
संदिग्ध खाते की सूचना पुलिस को देने की अपील
पुलिस ने बैंकों से स्पष्ट कहा है कि यदि किसी खाते की गतिविधियां संदिग्ध लगती हैं या उसके म्यूल अकाउंट होने की आशंका है, तो इसकी जानकारी थाना, डीएसपी या संबंधित पुलिस अधिकारियों को दी जा सकती है। सूचना मिलने के बाद पुलिस खाते और उससे जुड़े लेनदेन की जांच कर आगे की कार्रवाई करेगी।
बैंकिंग क्षेत्र में केवाईसी और ग्राहक की पहचान का सत्यापन पहले से ही महत्वपूर्ण सुरक्षा प्रक्रिया मानी जाती है। धनबाद में आयोजित वित्तीय साक्षरता कार्यक्रम में भी बैंक अधिकारियों ने केवाईसी को फर्जी खातों और साइबर अपराध पर नियंत्रण के लिए अहम प्रक्रिया बताया था।
अन्य अनुमंडलों में भी होगी बैठक
फिलहाल धनबाद के सिंदरी अनुमंडल क्षेत्र के बैंक प्रबंधकों के साथ बैठक की गई है। पुलिस अब बाघमारा, निरसा समेत जिले के अन्य अनुमंडलों के बैंक प्रबंधकों के साथ भी बैठक करने की तैयारी में है। इन बैठकों के माध्यम से पुलिस और बैंकों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर साइबर अपराध के खिलाफ संयुक्त रणनीति तैयार की जाएगी।
पुलिस का मानना है कि नए बैंक खातों के फिजिकल वेरिफिकेशन, संदिग्ध खातों की निगरानी और समय पर पुलिस को सूचना देने से साइबर अपराधियों के लिए म्यूल खातों का इस्तेमाल करना कठिन होगा। इसके साथ ही फर्जी सिम और चोरी के मोबाइल फोन पर निगरानी बढ़ाने से साइबर ठगी के पूरे नेटवर्क पर प्रभावी प्रहार किया जा सकता है।
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