रांची में जेपीएससी-जेएसएससी की परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग को लेकर जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में पिछले 26 दिनों से चल रहा छात्र आंदोलन बुधवार को फिलहाल स्थगित कर दिया गया। छात्र नेताओं ने स्पष्ट किया कि आंदोलन समाप्त नहीं हुआ है बल्कि इसके पहले चरण को दो महीने के लिए रोका गया है।
आंदोलनकारी छात्रों ने बुधवार शाम करीब 4:30 बजे आपसी सहमति से आंदोलन के पहले चरण को स्थगित करने का फैसला लिया। इसके बाद पुलिस-प्रशासन की मौजूदगी में अनशन पर बैठे दो छात्रों का अनशन भी समाप्त कराया गया। छात्र नेताओं के मुताबिक, सरकार की ओर से उनकी कई प्रमुख मांगों पर आश्वासन मिलने और कुछ मामलों में कार्रवाई शुरू होने के बाद यह निर्णय लिया गया है।
सरकार को दिया 60 दिन का समय
छात्र नेताओं ने सरकार को 60 दिनों का अल्टीमेटम दिया है। उनका कहना है कि जेपीएससी-जेएसएससी की परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष और न्यायिक जांच की मांग अभी भी पूरी तरह लंबित है। छात्रों की मांग है कि जांच ऐसी व्यवस्था के तहत हो जिससे पूरी प्रक्रिया पर अभ्यर्थियों का भरोसा कायम हो सके।
छात्र नेता राधे कुमार और उमेश प्रसाद ने कहा कि आंदोलन को समाप्त नहीं किया गया है। सरकार को दो महीने का समय दिया गया है। इस दौरान यदि लंबित मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो छात्र दोबारा आंदोलन शुरू करेंगे।
25 जुलाई से चल रहा था आंदोलन
रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में यह आंदोलन 25 जुलाई से शुरू हुआ था। छात्रों ने जेपीएससी और जेएसएससी की भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों, परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता और आयोगों में सुधार सहित कई मांगों को लेकर धरना शुरू किया था।
आंदोलन के दौरान बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं स्टेडियम में जुटे। छात्रों ने भूख हड़ताल, सत्याग्रह, सांस्कृतिक कार्यक्रम और तिरंगा यात्रा के माध्यम से अपनी मांगें सरकार तक पहुंचाईं। स्वतंत्रता दिवस के मौके पर भी छात्रों ने स्टेडियम से अल्बर्ट एक्का चौक तक तिरंगा यात्रा निकाली थी।
सरकार से कई दौर की बातचीत के बाद बनी सहमति
लगातार आंदोलन के बीच सरकार और छात्र प्रतिनिधियों के बीच कई दौर की बातचीत हुई। सरकार की ओर से छात्रों की कई प्रमुख मांगों पर कार्रवाई और सुधार का आश्वासन दिए जाने के बाद आंदोलन के पहले चरण को स्थगित करने पर सहमति बनी। सरकार ने आठ नोटिफिकेशन के जरिए कुल 44 परिक्षाएं रद्द कर दी गईं।
हालांकि छात्रों ने साफ कर दिया है कि वे सरकार के अगले कदम पर नजर रखेंगे। खासकर कथित परीक्षा अनियमितताओं की जांच को लेकर उनकी मांग अभी भी स्पष्ट है। छात्रों का कहना है कि केवल आश्वासन पर्याप्त नहीं होगा बल्कि 60 दिनों के भीतर ठोस कार्रवाई दिखाई देनी चाहिए।
आंदोलनकारियों ने जताया आभार
आंदोलन स्थगित होने के बाद छात्रों की ओर से आभार यात्रा भी निकाली गई। छात्र नेताओं ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के प्रति आभार जताते हुए कहा कि सरकार ने छात्रों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए उनकी कई प्रमुख मांगों पर सकारात्मक रुख अपनाया है।
छात्रों ने रांची जिला प्रशासन, मीडिया, सामाजिक संगठनों और उन सभी लोगों का भी धन्यवाद किया, जिन्होंने आंदोलन के दौरान छात्रों के लिए भोजन, पानी और अन्य जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराईं।
राजनीतिक दलों और संगठनों को भी धन्यवाद
छात्र नेताओं ने आंदोलन को समर्थन देने वाले विभिन्न राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों का भी आभार जताया। उन्होंने झामुमो, कांग्रेस, भाजपा, झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा, आजसू, सीपीआई समेत अन्य संगठनों का धन्यवाद किया।
छात्रों का कहना है कि अलग-अलग राजनीतिक और सामाजिक संगठनों के समर्थन से आंदोलन को व्यापक स्तर पर आवाज मिली।
60 दिन बाद तय होगा आंदोलन का अगला चरण
26 दिनों तक चले आंदोलन का पहला चरण भले ही बुधवार को स्थगित हो गया हो, लेकिन छात्रों की लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है। अब अगले 60 दिन सरकार के लिए महत्वपूर्ण होंगे। छात्रों ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि इस अवधि में उनकी लंबित मांगों, खासकर निष्पक्ष जांच को लेकर ठोस कदम नहीं उठाया गया, तो वे फिर से आंदोलन शुरू करेंगे।
ऐसे में फिलहाल रांची का छात्र आंदोलन शांत हुआ है लेकिन इसकी अगली दिशा सरकार के फैसलों पर निर्भर करेगी। आने वाले दो महीनों में सरकार की कार्रवाई यह तय करेगी कि यह आंदोलन स्थायी रूप से खत्म होता है या झारखंड में इसका दूसरा चरण पहले से ज्यादा जोरदार तरीके से शुरू होता है।
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