धनबाद के पूर्वी टुंडी स्थित झारखंड बालिका आवासीय विद्यालय में बुधवार को साइबर अपराध के खिलाफ जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। वरीय पुलिस अधीक्षक प्रभात कुमार के निर्देश पर आयोजित इस कार्यक्रम में स्कूल की छात्राओं को ऑनलाइन ठगी के बढ़ते मामलों और उससे बचने के सुरक्षित तरीकों की जानकारी दी गई। धनबाद जिला प्रशासन की आधिकारिक वेबसाइट पर प्रभात कुमार को वर्तमान में वरीय पुलिस अधीक्षक के रूप में दर्ज किया गया है।
कार्यक्रम में पूर्वी टुंडी थाना प्रभारी नीतीश कुमार और अंचल अधिकारी सुरेश प्रसाद वर्णवाल समेत अन्य अधिकारी मौजूद रहे। अंचल अधिकारी सुरेश प्रसाद वर्णवाल की पदस्थापना की पुष्टि धनबाद जिला प्रशासन की आधिकारिक जानकारी से भी होती है।
पुलिस अधिकारियों ने छात्राओं को समझाया कि साइबर अपराधी लोगों को डर, लालच और झांसे के जरिए अपने जाल में फंसाते हैं। इसके लिए फर्जी कॉल, अनजान लिंक, ओटीपी, फर्जी संदेश और डिजिटल अरेस्ट जैसे तरीकों का इस्तेमाल किया जाता है। ऐसे मामलों में थोड़ी सी लापरवाही भी आर्थिक नुकसान का कारण बन सकती है।
अधिकारियों ने छात्राओं से अपील की कि किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक न करें और न ही उसे डाउनलोड करें। बैंक खाते, एटीएम, यूपीआई या मोबाइल से जुड़ी गोपनीय जानकारी किसी अनजान व्यक्ति के साथ साझा नहीं करनी चाहिए। खास तौर पर ओटीपी किसी के साथ साझा नहीं करने की सलाह दी गई।
डिजिटल अरेस्ट को लेकर भी छात्राओं को विशेष रूप से जागरूक किया गया। पुलिस ने स्पष्ट किया कि कानून में डिजिटल अरेस्ट जैसी कोई व्यवस्था नहीं है। यदि कोई व्यक्ति पुलिस, सीबीआई, ईडी या किसी अन्य सरकारी एजेंसी का अधिकारी बनकर फोन करे और गिरफ्तारी के नाम पर डराए या पैसे की मांग करे, तो घबराने के बजाय इसकी सूचना पुलिस को देनी चाहिए।
साइबर सुरक्षा को लेकर आयोजित ऐसे जागरूकता कार्यक्रमों का उद्देश्य बच्चों और युवाओं को सुरक्षित डिजिटल व्यवहार के प्रति सजग बनाना है। धनबाद में विद्यार्थियों के बीच साइबर अपराध से बचाव को लेकर पहले भी जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं, जिनमें अनजान लिंक, फर्जी कॉल और ओटीपी साझा नहीं करने जैसे सुरक्षा उपायों पर जोर दिया गया है।
पुलिस ने छात्राओं को संदेश दिया कि साइबर ठगी से बचने का सबसे प्रभावी तरीका सतर्कता है। छात्राएं खुद जागरूक होकर अपने परिवार और आसपास के लोगों को भी साइबर अपराध के नए तरीकों के प्रति सचेत कर सकती हैं। इस तरह विद्यालय स्तर से शुरू होने वाली साइबर जागरूकता भविष्य में ऑनलाइन धोखाधड़ी के मामलों को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
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