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पटना में गंगा का रौद्र रूप, खतरे के निशान से काफी ऊपर पानी, बाढ़ का बढ़ा खतरा

On: September 4, 2026 9:21 PM
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पटना में गंगा का रौद्र रूप, खतरे के निशान से काफी ऊपर पानी, बाढ़ का बढ़ा खतरा
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बिहार की राजधानी पटना में गंगा नदी के लगातार बढ़ते जलस्तर ने बाढ़ का खतरा गंभीर कर दिया है। गंगा कई प्रमुख स्थानों पर खतरे के निशान से ऊपर बह रही है और निचले इलाकों में पानी का दबाव लगातार बढ़ रहा है। गांधी घाट, दीघा घाट, हाथीदह और मनेर समेत कई इलाकों में हालात चिंताजनक बने हुए हैं। पटना के अलावा राज्य के कई अन्य जिलों में भी नदियों के उफान से बाढ़ जैसे हालात पैदा हो गए हैं।

जल संसाधन विभाग के ताजा आंकड़ों के अनुसार, 4 सितंबर को दीघा घाट पर गंगा का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर बना हुआ है। विभागीय निगरानी में मनेर में भी पानी उच्चतम बाढ़ स्तर के बेहद करीब पहुंच गया है। वहीं पटना में गंगा, पुनपुन और दरधा के बढ़ते जलस्तर ने प्रशासन की चिंता और बढ़ा दी है।

घाटों और आसपास के इलाकों में बढ़ा पानी

गंगा के बढ़ते जलस्तर का असर पटना के घाटों और उनसे जुड़े निचले इलाकों में साफ दिखाई दे रहा है। दीघा घाट के आसपास पानी लगातार ऊपर की ओर बढ़ रहा है। कई स्थानों पर नदी का पानी घाटों की सीढ़ियों और आसपास के क्षेत्रों तक पहुंच चुका है।

गंगा के बढ़ते दबाव के कारण मरीन ड्राइव यानी जेपी गंगा पथ से जुड़े कुछ हिस्सों और निचले क्षेत्रों में भी बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। स्थानीय लोगों के लिए सबसे बड़ी चिंता यह है कि यदि जलस्तर में इसी तरह वृद्धि जारी रही तो शहर के और इलाकों में पानी प्रवेश कर सकता है।

दियारा इलाकों से सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन

गंगा के रौद्र रूप का सबसे ज्यादा असर दियारा क्षेत्रों में देखने को मिल रहा है। निचले इलाकों में रहने वाले लोग अपने परिवार, जरूरी सामान और मवेशियों के साथ सुरक्षित स्थानों की ओर जाने को मजबूर हैं। कई स्थानों पर विस्थापित लोगों ने सड़क किनारे, सामुदायिक भवनों और अन्य ऊंचे स्थानों पर शरण लेनी शुरू कर दी है। इतनी बड़ी संख्या में लोगों और मवेशियों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन गया है।

पुनपुन और दरधा ने भी बढ़ाई मुश्किल

पटना में सिर्फ गंगा ही चिंता का कारण नहीं है। पुनपुन और दरधा नदियों के जलस्तर में भी तेज वृद्धि दर्ज की जा रही है। श्रीपालपुर में पुनपुन नदी खतरे के निशान से काफी ऊपर बह रही है, जबकि कोल्हाचक में दरधा नदी का जलस्तर भी खतरे के निशान से कई मीटर ऊपर पहुंच गया है। इससे दक्षिणी पटना और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में बाढ़ का खतरा और गहरा गया है।

मोकामा के जंजीरा दियारा समेत कई निचले इलाकों में पानी फैलने से लोग ऊंचे स्थानों की ओर जा रहे हैं। बख्तियारपुर के कई दियारा पंचायतों में निचले घरों में पानी पहुंचने की सूचना है। वहीं पुनपुन-दरधा के बढ़ते जलस्तर से गौरीचक बाजार सहित आसपास के कई गांव प्रभावित हुए हैं।

कई जिलों में बाढ़ जैसे हालात

पटना के अलावा बक्सर, मुंगेर और भागलपुर में भी गंगा खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। वहीं भोजपुर, वैशाली, खगड़िया समेत कई जिलों के निचले इलाकों में बाढ़ जैसे हालात बने हुए हैं। जल संसाधन विभाग के बाढ़ पूर्वानुमान आंकड़ों में राज्य की कई प्रमुख नदियों के विभिन्न स्थानों पर खतरे के स्तर से ऊपर बहने की जानकारी दर्ज है। प्रशासन प्रभावित क्षेत्रों पर लगातार नजर बनाए हुए है और नदी किनारे तथा निचले इलाकों में रहने वाले लोगों से सतर्क रहने की अपील की जा रही है।

पटना को सुरक्षित रखने के लिए सुरक्षा व्यवस्था कड़ी

बाढ़ की स्थिति को देखते हुए पटना में शहरी सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया जा रहा है। नगर निगम, जल संसाधन विभाग और संबंधित अधिकारियों को संवेदनशील स्थानों पर लगातार निगरानी रखने तथा बाढ़ निरोधक कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन का फोकस फिलहाल शहर में गंगा का पानी प्रवेश करने से रोकने और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित रखने पर है।

मौसम विभाग ने भी जारी किया अलर्ट

बाढ़ के बीच मौसम ने भी चिंता बढ़ा दी है। भारत मौसम विज्ञान विभाग के 4 सितंबर के अपडेट के अनुसार बिहार में 4 सितंबर को गरज-चमक और तेज हवाओं की चेतावनी है, जबकि 5 सितंबर से भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है। आने वाले दिनों में भी बारिश और आंधी-तूफान की स्थिति बन सकती है। लगातार बारिश होने की स्थिति में नदियों के जलस्तर में और वृद्धि हो सकती है। ऐसे में नदी किनारे, तटबंधों और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए खतरा और बढ़ने की आशंका है।

2016 जैसी बाढ़ की याद से बढ़ी चिंता

गंगा के मौजूदा रौद्र रूप ने करीब एक दशक पहले आई 2016 की भीषण बाढ़ की यादें ताजा कर दी हैं। उस समय पटना और बिहार के कई हिस्सों में बाढ़ ने भारी तबाही मचाई थी। मौजूदा हालात में प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती नदियों के बढ़ते जलस्तर के बीच आबादी वाले इलाकों को सुरक्षित रखना और समय रहते प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाना है।

फिलहाल गंगा समेत कई नदियों के जलस्तर पर लगातार नजर रखी जा रही है। यदि जलस्तर में वृद्धि का सिलसिला जारी रहा और साथ में भारी बारिश हुई, तो पटना समेत बिहार के कई इलाकों में बाढ़ की स्थिति और गंभीर हो सकती है।

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