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रांची में रामदास आठवले का बड़ा बयान: जाति व्यवस्था रहेगी तो आरक्षण भी रहेगा, JPSC-JSSC विवाद पर भी रखी बात

On: September 5, 2026 1:28 AM
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रांची में रामदास आठवले का बड़ा बयान: जाति व्यवस्था रहेगी तो आरक्षण भी रहेगा, JPSC-JSSC विवाद पर भी रखी बात
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रांची में केंद्रीय मंत्री और रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (ए) के अध्यक्ष रामदास आठवले ने शुक्रवार को प्रेस कांफ्रेंस कर केंद्र सरकार की उपलब्धियों, झारखंड की राजनीतिक स्थिति, आरक्षण और JPSC-JSSC परीक्षा विवाद समेत कई मुद्दों पर अपनी बात रखी। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश के विकास का दावा करते हुए कहा कि केंद्र सरकार झारखंड के विकास के लिए लगातार काम कर रही है। राज्य में हाईवे समेत कई विकास परियोजनाओं को आगे बढ़ाया गया है।

आठवले ने झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और झामुमो के संस्थापक शिबू सोरेन के साथ अपने पुराने संबंधों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि शिबू सोरेन के साथ उनके अच्छे संबंध रहे हैं और अलग झारखंड राज्य के आंदोलन के दौरान भी उनके साथ संपर्क रहा। उन्होंने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व वाली राज्य सरकार पर पिछड़ी जातियों के साथ न्याय नहीं करने का आरोप लगाया। उनके इस बयान को झारखंड की मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

JPSC-JSSC विवाद पर बोले आठवले, पारदर्शी भर्ती नीति की जरूरत

JPSC और JSSC की परीक्षाओं को लेकर झारखंड में लंबे समय से चल रहे विवाद पर भी रामदास आठवले ने अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि जिन युवाओं ने परीक्षा में कथित गड़बड़ियों के खिलाफ आंदोलन और अनशन किया, उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए। आठवले के मुताबिक, अगर किसी परीक्षा में गड़बड़ी हुई है तो उसकी निष्पक्ष जांच के बाद उचित कार्रवाई होनी चाहिए। साथ ही उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि परीक्षा में सफल होकर नियुक्ति पाने वाले अभ्यर्थियों के साथ अन्याय नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि भविष्य में ऐसी स्थिति उत्पन्न न हो, इसके लिए भर्ती प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाने की जरूरत है। नई और स्पष्ट भर्ती नीति के माध्यम से सरकारी नियुक्तियों को निष्पक्ष एवं पारदर्शी तरीके से कराने पर जोर दिया जाना चाहिए।

झारखंड में JPSC-JSSC विवाद को लेकर हाल के दिनों में बड़ा राजनीतिक और प्रशासनिक घटनाक्रम देखने को मिला है। अगस्त में राज्य सरकार ने JSSC-CGL परीक्षा रद्द करने के साथ TDPL से जुड़ी परीक्षाओं, परिणामों और चयन प्रक्रिया पर भी कार्रवाई का फैसला लिया था तथा कथित अनियमितताओं की जांच का आदेश दिया था।

आरक्षण खत्म करने की मांग पर आठवले ने दिया जवाब

आरक्षण व्यवस्था को लेकर पूछे गए सवाल पर केंद्रीय मंत्री ने कहा कि अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षण सामाजिक न्याय से जुड़ा विषय है। उन्होंने कहा कि SC, ST और OBC को मिलाकर मौजूदा व्यवस्था में करीब 49 प्रतिशत आरक्षण है, जिसमें OBC के लिए 27 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान बताया जाता है।

आठवले ने कहा कि शहरों में जातिगत भेदभाव पहले की तुलना में कम दिखाई देता है, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी कई जगह जाति के आधार पर भेदभाव की स्थिति बनी हुई है। उनके मुताबिक, जब तक समाज में जातिगत भेदभाव पूरी तरह खत्म नहीं होता, तब तक आरक्षण की जरूरत बनी रहेगी।

‘जातिगत भेदभाव खत्म हो तो आरक्षण छोड़ने को तैयार’

रामदास आठवले ने कहा कि अगर देश से जाति व्यवस्था और जातिगत भेदभाव पूरी तरह समाप्त हो जाए तो वह भी आरक्षण छोड़ने के लिए तैयार हैं। उन्होंने आरक्षण की व्यवस्था को सामाजिक असमानता से जोड़ते हुए कहा कि जब तक भेदभाव मौजूद है, तब तक वंचित वर्गों को प्रतिनिधित्व और अवसर देने की जरूरत है।

उन्होंने यह भी कहा कि अगर आरक्षण की व्यवस्था जारी रखी जाती है तो सभी जातियों की आबादी के अनुपात में प्रतिनिधित्व देने पर भी विचार किया जाना चाहिए। इस बयान के जरिए उन्होंने आरक्षण नीति की समीक्षा में जनसंख्या के आंकड़ों को महत्व देने की बात रखी।

झारखंड में राजनीतिक मुद्दों को लेकर सरकार पर निशाना

रांची में आयोजित प्रेस कांफ्रेंस के दौरान आठवले ने राज्य सरकार पर रोजगार और पिछड़े वर्गों से जुड़े मुद्दों को लेकर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि युवाओं को रोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध कराने और भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की जरूरत है। उनके मुताबिक, खनिज संपदा से समृद्ध झारखंड में औद्योगिक विकास और रोजगार के अवसरों को बढ़ाने की काफी संभावनाएं हैं। केंद्र और राज्य के बेहतर समन्वय से विकास की गति को और तेज किया जा सकता है।

रामदास आठवले के बयानों से साफ है कि झारखंड में आरक्षण, रोजगार और प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता आने वाले दिनों में भी बड़े राजनीतिक मुद्दे बने रह सकते हैं। खासकर JPSC-JSSC विवाद के बाद सरकार, अभ्यर्थियों और राजनीतिक दलों के बीच इन मुद्दों को लेकर बहस लगातार जारी है। वहीं, हालिया घटनाक्रम में JPSC से जुड़ी कुछ परीक्षाओं को रद्द करने के सरकारी फैसले पर झारखंड हाईकोर्ट की ओर से अंतरिम राहत भी दी गई है, जिससे मामला कानूनी स्तर पर भी महत्वपूर्ण बना हुआ है।

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