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हूल दिवस (Hul Diwas) के अवसर पर CM ने सिद्धो-कान्हू के प्रतिमा पर अर्पित की श्रद्धांजलि

On: June 30, 2026 6:10 PM
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हूल दिवस (Hul Diwas) के अवसर पर CM ने सिद्धो-कान्हू के प्रतिमा पर अर्पित की श्रद्धांजलि
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हूल दिवस (Hul Diwas) के अवसर पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन रांची स्थित सिद्धो-कान्हू पार्क पहुंचे और सिद्धो-कान्हू, चांद-भैरव की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित की। Hul Diwas के अवसर पर विभिन्न राजनीतिक दलों के कई वरिष्ठ नेता भी मौजूद रहे। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू, कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष केशव महतो कमलेश, मंत्री राधाकृष्ण किशोर सहित कई जनप्रतिनिधियों ने भी श्रद्धासुमन अर्पित किए। मीडिया से बातचीत करते हुए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि हूल दिवस  (Hul Diwas) क्रांति और संघर्ष का ऐतिहासिक दिवस है। उन्होंने कहा कि उस समय आदिवासी समाज लगातार शोषण का शिकार हो रहा था और उससे मुक्ति का कोई रास्ता नजर नहीं आ रहा था। ऐसे समय में सिद्धो-कान्हू, चांद और भैरव ने शोषण के खिलाफ विद्रोह का बिगुल फूंका। उन्होंने परिणाम की चिंता किए बिना अन्याय के विरुद्ध संघर्ष शुरू किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि उस क्रांति की चिंगारी लगातार जलती रही और अंततः वही देश की आजादी की लड़ाई की प्रेरणा बनी।

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झारखंड के सभी जिले के मुख्यालय, ब्लॉक मुख्यालय और ग्रामीण इलाकों में ‘हूल दिवस’ बहुत उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। ज़िला मुख्यालय में स्थित सिदो-कान्हू मुर्मू पार्क में प्रशासनिक अधिकारियों, राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों, ग्राम प्रधानों और सामाजिक व छात्र संगठनों के सदस्यों ने शहीद सिदो-कान्हू और चांद-भैरव की मूर्तियों पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि दी।

ग्राम प्रधानों ने शहीद सिदो-कान्हू और चांद-भैरव के सम्मान में पारंपरिक रीति-रिवाजों का पालन किया। हूल दिवस के मौके पर कॉलेज के छात्रों ने झांकी जुलूस निकाला। झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के सैकड़ों कार्यकर्ता रैली के रूप में पार्क पहुंचे और मूर्तियों पर माल्यार्पण किया। इस बीच, डिप्टी डेवलपमेंट कमिश्नर अरविंद लाल, पुलिस अधीक्षक अनुदीप सिंह और नगर परिषद अध्यक्ष सबरी पाल के साथ-साथ BJP, कांग्रेस, AJSU, JD(U) और RJD के कार्यकर्ताओं और नेताओं ने अमर स्वतंत्रता सेनानियों सिदो-कान्हू और चांद-भैरव की मूर्तियों पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित की। लिट्टीपाड़ा के डुमरिया में, पूर्व विधायक दिनेश विलियम मरांडी और विधायक हेमललाल मुर्मू ने अपने समर्थकों के साथ शहीद सिदो-कान्हू की मूर्ति पर माल्यार्पण किया। लोग आज भी सिदो-कान्हू और चांद-भैरव को याद करते हैं।

बता दें कि आज़ादी की लड़ाई की पहली लड़ाई 1855 में पाकुड़ के धनुष पूजा में ब्रिटिश सैनिकों के खिलाफ हुई थी। अंग्रेजों ने एक ही रात में मार्टेलो टॉवर बनाया था और उसी टॉवर से आज़ादी की लड़ाई में शामिल हजारों लोगों जिनमें सिदो-कान्हू और चांद-भैरव भी शामिल थे, उन पर गोलियां चलाई गई थीं। हालांकि, सिदो-कान्हू और चांद-भैरव के नेतृत्व में आंदोलन में शामिल लोगों ने तीर-धनुष का इस्तेमाल करते हुए ब्रिटिश सैनिकों का कड़ा मुकाबला किया और उन्हें उस इलाके से भागने पर मजबूर कर दिया। पाकुड़ ज़िला मुख्यालय में धनुष पूजा स्थल पर सिदो-कान्हू मुर्मू के नाम पर एक पार्क बनाया गया है, और वहां स्थित मार्टेलो टॉवर उन घटनाओं की याद दिलाता है।

बोकारो में भी हूल दिवस के मौके पर शहीदों को याद किया गया। चास के ITI मोड़ पर स्थित सिदो-कान्हू की आदमकद प्रतिमा पर झारखंड मुक्ति मोर्चा के नेताओं और कार्यकर्ताओं जिनमें ज़िला अध्यक्ष रतनलाल मांझी भी शामिल थे,  माला पहनाकर उन्हें श्रद्धांजलि दी। इस मौके पर सभी ने सिदो-कान्हू और फूलो-झानो मुर्मू की वीरता को याद किया। उन्होंने इन शहीदों के संदेश को हर गाँव तक पहुँचाने की ज़रूरत पर ज़ोर दिया।  बता दें कि 1857 की क्रांति जिसे अक्सर पहला बड़ा विद्रोह माना जाता है, पहले ही संथाल आदिवासियों ने अंग्रेज़ों के ख़िलाफ़ जंग छेड़ दी थी। इसे भारत का पहला संगठित विद्रोह माना जाता है। इस विद्रोह के बाद जन-आंदोलन की लहर दौड़ गई, जिससे अलग-अलग जगहों पर छिटपुट विरोध-प्रदर्शन होने लगे। अंग्रेज़, ज़मींदारों और सूदखोरों के साथ मिलकर आदिवासियों की ज़मीन हड़पने की साज़िश रच रहे थे। लगान वसूली में ज़्यादती, सूदखोरी और महिलाओं पर अत्याचार आम बात थी; इसी अन्याय के ख़िलाफ़ सिदो और कान्हू ने विद्रोह का बिगुल फूंका था।

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