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पूरे झारखंड में मनाया गाया मुहर्रम (Muharram) त्योहार,जमशेदपुर और धनबाद जैसे शहरों शांतिपूर्ण जूलूस संपन्न

On: June 27, 2026 1:07 PM
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पूरे झारखंड में मनाया गाया मुहर्रम (Muharram) त्योहार,जमशेदपुर और धनबाद जैसे शहरों शांतिपूर्ण जूलूस संपन्न
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पूरे झारखंड भर में जगह – जगह पर मुहर्रम (Muharram)  त्योहार को मनाया गाया। जमशेदपुर  में मुहर्रम (Muharram) की दशमी के अवसर पर परसुडीह क्षेत्र के मकदुमपुर एक नंबर, दो नंबर और किताडीह से  पारंपरिक अखाड़ा जुलूस श्रद्धा, उत्साह और सौहार्दपूर्ण माहौल में निकाला गया। मुहर्रम (Muharram) की जूलूस इमामबाड़ा से शुरू हुआ और इस जूलूस में बड़ी संख्या में खिलाड़ी, स्थानीय लोग तथा विभिन्न समुदायों के नागरिक शामिल हुए। जुलूस के दौरान खिलाड़ियों ने लाठी, तलवार और अन्य पारंपरिक करतबों का शानदार प्रदर्शन किया, जिसे देखने के लिए सड़क के दोनों ओर लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी।

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मार्ग में कई स्थानों पर शरबत एवं पेयजल की व्यवस्था की गई थी। स्थानीय युवाओं और सामाजिक संगठनों ने सेवा कार्य में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया, जिससे आपसी भाईचारे और सामाजिक एकता का संदेश देखने को मिला। इस दौरान विभिन्न स्थानों पर अखाड़ा कमेटियों की ओर से सम्मान समारोह आयोजित कर सामाजिक सद्भाव का संदेश दिया गया। जनप्रतिनिधियों, गणमान्य नागरिकों तथा पुलिस अधिकारियों को पारंपरिक पगड़ी पहनाकर सम्मानित किया गया।

अखाड़ा कमेटी के प्रतिनिधियों ने कहा कि मुहर्रम का पर्व सभी को मिल-जुलकर रहने, भाईचारा बनाए रखने और शांति का संदेश देता है। किताडीह सेटलमेंट रेलवे अखाड़ा के लाइसेंसी शेख सलाहुद्दीन ने बताया कि वर्ष 1928 से यह अखाड़ा लगातार निकल रहा है और हर वर्ष शांतिपूर्ण ढंग से आयोजित होता है। वहीं, मकदुमपुर दो नंबर अखाड़ा कमेटी के प्रतिनिधि मोहम्मद जाहिद उर्फ राजी ने प्रशासन के सहयोग की सराहना की।

वही धनबाद में भी मुहर्रम का पर्व शुक्रवार को पूरी श्रद्धा, अनुशासन और सौहार्दपूर्ण वातावरण में शांतिपूर्वक सम्पन्न हुआ।  मुहर्रम के अवसर पर विभिन्न अखाड़ा दलों के खिलाड़ियों ने लाठी, तलवार, बनैती और अन्य पारंपरिक युद्ध कौशल का शानदार प्रदर्शन किया। उनके हैरतअंगेज करतब देखने के लिए सड़क किनारे बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे और “या हुसैन, या अली” के नारों से खिलाड़ियों का उत्साह बढ़ाया।

शहर के विभिन्न मार्गों से होते हुए सभी ताजिया जुलूस करबला पहुंचे, जहां धार्मिक परंपरा के अनुसार उनका अंतिम पड़ाव हुआ। करबला परिसर में भी बड़ी संख्या में अकीदतमंद मौजूद रहे। पूरे आयोजन के दौरान भाईचारे, अनुशासन और सामाजिक सौहार्द की मिसाल देखने को मिली।

मुहर्रम को लेकर जिला प्रशासन और धनबाद पुलिस पूरी तरह मुस्तैद रही। संवेदनशील स्थानों पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात रहा और वरिष्ठ अधिकारी लगातार निगरानी करते रहे। बेहतर सुरक्षा और यातायात व्यवस्था के कारण पूरा आयोजन बिना किसी अप्रिय घटना के शांतिपूर्ण ढंग से सम्पन्न हुआ।

 

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