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धनबाद: रंजय सिंह हत्याकांड में 9 साल 9 महीने और 337 तारीखों के बाद भी नहीं आया फैसला

On: September 5, 2026 5:23 PM
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धनबाद: रंजय सिंह हत्याकांड में 9 साल 9 महीने और 337 तारीखों के बाद भी नहीं आया फैसला
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धनबाद के बहुचर्चित रंजय सिंह हत्याकांड में शनिवार, 5 सितंबर को प्रस्तावित फैसला टल गया। करीब नौ साल नौ महीने से चल रहे इस मामले में जिला एवं सत्र न्यायाधीश-16 दुर्गेश चंद्र अवस्थी की अदालत ने फैसला सुनाने के लिए नई तारीख निर्धारित कर दी है। एमपी/एमएलए कोर्ट ने 19 सितंबर को मुकर्रर की है अगली तारीख यानी कि फैसले के लिए 19 तारीख तक करना होगा इंतजार करना होगा।

करीब 337 तारीखों की लंबी सुनवाई के बाद शनिवार को अदालत के फैसले का इंतजार था। मामले की गंभीरता को देखते हुए मृतक के परिजनों के साथ-साथ धनबाद के राजनीतिक और आपराधिक घटनाक्रम पर नजर रखने वाले लोगों की निगाहें भी अदालत की कार्यवाही पर टिकी थीं। अब फैसला जानने के लिए सभी को कुछ और समय इंतजार करना होगा।

29 जनवरी 2017 को हुई थी रंजय सिंह की हत्या

रंजय सिंह की 29 जनवरी 2017 की शाम धनबाद के सरायढेला थाना क्षेत्र स्थित चाणक्य नगर मोड़ के पास गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। वह पूर्व विधायक और धनबाद के मेयर रहे संजीव सिंह के करीबी माने जाते थे। हत्या के बाद यह मामला धनबाद के सबसे चर्चित आपराधिक मामलों में शामिल हो गया।

पुलिस की जांच के बाद नंद कुमार सिंह उर्फ रूना सिंह उर्फ बबलू सिंह उर्फ मामा और हर्ष सिंह के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया गया। अभियोजन के अनुसार नंद कुमार सिंह उर्फ मामा पर गोली चलाने और हर्ष सिंह पर हत्या की साजिश में शामिल होने का आरोप है। हालांकि, इन आरोपों पर अंतिम निर्णय अदालत को उपलब्ध साक्ष्यों और दोनों पक्षों की दलीलों के आधार पर करना है।

337 तारीखों में पूरी हुई लंबी कानूनी प्रक्रिया

रंजय सिंह हत्याकांड का ट्रायल लंबे समय तक चला। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार अभियोजन पक्ष की गवाही और साक्ष्य के लिए 144 तारीखें लगीं, जबकि कुल 23 गवाहों का परीक्षण कराया गया। इसके बाद बचाव पक्ष की दलीलों और गवाही के लिए भी लंबी प्रक्रिया चली। अंतिम सफाई बयान और दोनों पक्षों की बहस के लिए भी कई तारीखें निर्धारित हुईं।

अभियोजन पक्ष की ओर से घटना के प्रत्यक्षदर्शी राजा यादव सहित पुलिस पदाधिकारी, चिकित्सक और तकनीकी साक्ष्यों से जुड़े गवाहों को अदालत में पेश किया गया। मई 2024 में मामले के अनुसंधानकर्ता का प्रतिपरीक्षण भी पूरा हुआ था।

अभियोजन ने पूर्व नियोजित हत्या की दी दलील

अभियोजन पक्ष ने अदालत के समक्ष दलील दी कि रंजय सिंह की हत्या पूर्व नियोजित साजिश के तहत की गई थी और आरोपियों के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य मौजूद हैं। वहीं, आरोपी हर्ष सिंह ने अपने सफाई बयान में हत्या कराने के आरोप से इनकार किया था। हर्ष सिंह ने अदालत में कहा था कि घटना के दिन वह अपने धैया स्थित आवास पर थे और उन्हें रंजय सिंह की हत्या की जानकारी बाद में मिली।

नंद कुमार सिंह उर्फ मामा जेल में बंद

मामले के आरोपी नंद कुमार सिंह उर्फ मामा फिलहाल जेल में बंद हैं। उनके खिलाफ गोली चलाने वाले आरोपी के रूप में ट्रायल चला है। वहीं, पुलिस की जांच में सामने आए अन्य नामों को लेकर भी अलग-अलग कानूनी प्रक्रिया का उल्लेख किया गया है। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक पटना के चंदन शर्मा के खिलाफ अलग ट्रायल शुरू हुआ है, जबकि रेकी के आरोपी बताए गए हरेंद्र सिंह का सत्यापन अब तक नहीं हो सका है।

फैसले को लेकर सुरक्षा पर भी नजर

रंजय सिंह हत्याकांड का संबंध धनबाद के दो चर्चित राजनीतिक गुटों से जोड़ा जाता रहा है। इसी कारण अदालत के फैसले को लेकर पुलिस और प्रशासन भी सतर्क रहे हैं। पहले से ही आशंका जताई जाती रही है कि फैसले के दौरान दोनों पक्षों के समर्थकों की भीड़ जुट सकती है, जिसे देखते हुए न्यायालय परिसर में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाए जाने की तैयारी थी।

अब शनिवार को फैसला टलने के बाद इस करीब नौ साल पुराने मामले में अगली सुनवाई और फैसले की नई तारीख का इंतजार है। अदालत का अंतिम निर्णय आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि इतने लंबे समय से चल रहे इस चर्चित हत्याकांड में आरोपों पर न्यायालय का निष्कर्ष क्या रहता है।

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