झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की 14वीं सिविल सेवा परीक्षा में कथित गड़बड़ी से जुड़े मामले में आयोग के पूर्व अध्यक्ष एल. ख्यांग्ते को शनिवार को बड़ा झटका लगा। CID की विशेष अदालत ने उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी। इससे पहले 2 सितंबर को जमानत याचिका पर दोनों पक्षों की बहस पूरी होने के बाद अदालत ने अपना आदेश सुरक्षित रख लिया था और 5 सितंबर को फैसला सुनाने की तारीख तय की थी।
14वीं JPSC परीक्षा में कथित गड़बड़ी का मामला
एल. ख्यांगते पर 14वीं JPSC सिविल सेवा परीक्षा में कथित अनियमितताओं से जुड़े मामले में जांच चल रही है। सीआईडी ने इस मामले में उन्हें 10 अगस्त को गिरफ्तार किया था। गिरफ्तारी के बाद उन्हें न्यायिक हिरासत में भेजा गया और जांच एजेंसी ने उनसे पूछताछ भी की।
इस मामले में सीआईडी परीक्षा प्रक्रिया, OMR शीट की स्कैनिंग, डेटा प्रोसेसिंग, परीक्षा आयोजन और कथित तौर पर अभ्यर्थियों से पैसे के लेनदेन से जुड़े पहलुओं की जांच कर रही है। जांच के दौरान कई दस्तावेज और अन्य साक्ष्य जुटाए जाने का दावा किया गया है।
जमानत का विरोध करते हुए CID ने क्या कहा
जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान सीआईडी की ओर से ख्यांगते की भूमिका को लेकर गंभीर आरोप लगाए गए। जांच एजेंसी का कहना था कि परीक्षा में कथित गड़बड़ी की जांच अभी जारी है और कई महत्वपूर्ण पहलुओं पर आगे जांच की जरूरत है।
सीआईडी ने इससे पहले अदालत में करीब 1,000 पन्नों की केस डायरी भी पेश की थी। इसमें जांच के दौरान जुटाए गए दस्तावेज, पूछताछ और अन्य साक्ष्यों से संबंधित जानकारी शामिल होने की बात सामने आई थी।
बचाव पक्ष ने जमानत के लिए रखी अपनी दलील
वहीं, एल. ख्यांगते की ओर से उनके अधिवक्ता ने अदालत में जमानत के पक्ष में दलील दी। बचाव पक्ष का कहना था कि उनके खिलाफ कोई ऐसा ठोस प्रत्यक्ष साक्ष्य नहीं है, जिसके आधार पर उन्हें हिरासत में रखा जाए। अधिवक्ता ने यह भी दलील दी कि जांच के दौरान की गई छापेमारी में भी ऐसा कोई आपत्तिजनक दस्तावेज बरामद नहीं हुआ, जो सीधे तौर पर उन्हें अपराध से जोड़ता हो।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने 2 सितंबर को अपना आदेश सुरक्षित रखा था। अब 5 सितंबर को अदालत ने जमानत देने से इनकार कर दिया है।
परीक्षा एजेंसी की भूमिका भी जांच के घेरे में
JPSC परीक्षा में कथित गड़बड़ी की जांच का दायरा केवल आयोग के अधिकारियों तक सीमित नहीं है। जांच एजेंसी परीक्षा आयोजन और उत्तर पुस्तिकाओं की प्रोसेसिंग से जुड़ी एजेंसी TDPL की भूमिका की भी जांच कर रही है। रिपोर्टों के अनुसार, जांच में परीक्षा प्रक्रिया की पारदर्शिता और OMR शीट से जुड़े पहलुओं की भी पड़ताल की जा रही है।
इस मामले में पूर्व परीक्षा नियंत्रक श्वेता गुप्ता समेत कई अन्य आरोपी भी जांच के दायरे में हैं। अलग-अलग आरोपियों की जमानत याचिकाओं पर भी अदालत में सुनवाई चल रही है।
अब ऊपरी अदालत का रुख कर सकते हैं ख्यांगते
सीआईडी की विशेष अदालत से जमानत याचिका खारिज होने के बाद अब एल. ख्यांगते के पास ऊपरी अदालत में जमानत के लिए जाने का विकल्प है। फिलहाल उन्हें निचली अदालत से राहत नहीं मिली है और JPSC परीक्षा में कथित गड़बड़ी से जुड़े मामले की जांच एवं न्यायिक प्रक्रिया आगे जारी रहेगी।
गौरतलब है कि मामले में लगाए गए आरोप अभी न्यायिक प्रक्रिया के अधीन हैं। आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष अदालत में चल रही पूरी कानूनी प्रक्रिया और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही सामने आएगा।
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