
चुनावी हार की हताशा में संवैधानिक संस्थाओं पर हमला बंद करे कांग्रेस : गीता बालमुचू
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह पर बेबुनियाद आरोप लगाकर राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश कर रही कांग्रेस : भाजपा
निर्वाचन आयोग पर सवाल उठाने से पहले अपने आरोपों के प्रमाण दे कांग्रेस, लोकतंत्र में आरोप नहीं, तथ्यों और संवैधानिक प्रक्रियाओं का महत्व : गीता बालमुचू
- संतोष वर्मा
चाईबासा। झारखंड में कांग्रेस द्वारा तथाकथित काला दिवस मनाने, जिला अध्यक्ष सोनाराम सिंकू एवं महिला कांग्रेस अध्यक्ष के नेतृत्व में पुतला दहन करने तथा मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग किए जाने पर भारतीय जनता पार्टी की पश्चिमी सिंहभूम जिला अध्यक्ष श्रीमती गीता बालमुचू ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि चुनावी हार की हताशा में कांग्रेस अब संवैधानिक संस्थाओं के साथ-साथ देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को भी राजनीतिक निशाना बना रही है।
गीता बालमुचू ने कहा कि कांग्रेस को यह स्पष्ट करना चाहिए कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह पर लगाए जा रहे आरोपों का ठोस आधार क्या है? लोकतंत्र में किसी भी व्यक्ति या संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति के विरुद्ध आरोप लगाना आसान है, लेकिन उन आरोपों को प्रमाणित करने के लिए तथ्य और साक्ष्य प्रस्तुत करना आवश्यक है। केवल राजनीतिक बयानबाजी, आरोप-प्रत्यारोप और सड़कों पर प्रदर्शन करके जनता को भ्रमित नहीं किया जा सकता।
उन्होंने कहा कि राहुल गांधी के नेतृत्व में विपक्षी दलों के सांसदों का राष्ट्रपति से मिलना और निर्वाचन आयोग के खिलाफ विरोध जताना उनका राजनीतिक अधिकार हो सकता है, लेकिन यदि कांग्रेस के पास चुनावी प्रक्रिया में अनियमितता के ठोस प्रमाण हैं, तो उन्हें संबंधित संवैधानिक संस्थाओं और न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करना चाहिए। मुख्य निर्वाचन आयुक्त का इस्तीफा मांगने और पुतला दहन करने से चुनावी प्रक्रिया पर लगाए गए आरोप अपने आप प्रमाणित नहीं हो जाते।
भाजपा जिला अध्यक्ष ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत लगातार चुनाव हो रहे हैं और जनता अपने मताधिकार से सरकारें चुनती है। जब परिणाम कांग्रेस के पक्ष में आते हैं, तब लोकतंत्र सही दिखाई देता है, लेकिन जनता जब भाजपा को जनादेश देती है, तो कांग्रेस चुनावी प्रक्रिया और संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल उठाने लगती है। यह दोहरा रवैया लोकतांत्रिक व्यवस्था के प्रति उसकी असहजता को दर्शाता है।
उन्होंने आगे कहा कि गृह मंत्री अमित शाह पर आरोप लगाकर कांग्रेस अपनी राजनीतिक जिम्मेदारियों से बच नहीं सकती। राष्ट्रीय सुरक्षा, लोकतांत्रिक संस्थाओं और संवैधानिक व्यवस्था से जुड़े विषयों पर गंभीर चर्चा होनी चाहिए, न कि बिना प्रमाण के राजनीतिक आरोपों को हथियार बनाकर जनता के बीच भ्रम फैलाया जाए। विपक्ष को सवाल पूछने का पूरा अधिकार है, लेकिन सवालों के साथ तथ्य और तर्क भी होने चाहिए।
गीता बालमुचू ने कहा कि लगातार चुनावी पराजयों के बाद कांग्रेस अपनी राजनीतिक प्रासंगिकता बनाए रखने के लिए आंदोलन और विवादों का सहारा ले रही है। निर्वाचन आयोग जैसी संवैधानिक संस्था की निष्पक्षता पर सवाल उठाने के लिए ठोस आधार होना चाहिए। किसी संस्था से असहमति का अर्थ यह नहीं कि उसकी गरिमा को राजनीतिक संघर्ष का निशाना बना दिया जाए।
उन्होंने कहा कि भाजपा लोकतंत्र, संविधान और स्वतंत्र निर्वाचन व्यवस्था की मजबूती में विश्वास करती है। कांग्रेस को चाहिए कि वह प्रधानमंत्री और गृह मंत्री पर आरोप लगाने, निर्वाचन आयोग के इस्तीफे की मांग करने और पुतला दहन की राजनीति करने के बजाय जनता के वास्तविक मुद्दों पर सकारात्मक विपक्ष की भूमिका निभाए। जनता राजनीतिक नाटक नहीं, बल्कि जवाबदेही, विकास और समाधान चाहती है।

