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उम्मीदों की उड़ान: रानी दुर्गावती आदिवासी महिला सम्मेलन से खुलेगी आत्मनिर्भरता की नई राह, हुनर और उद्यमिता को मिलेगा बढ़ावा

उम्मीदों की उड़ान–रानी दुर्गावती आदिवासी महिला सम्मेलन" के तहत जिला स्तरीय उद्घाटन- सह- उन्मुखीकरण कार्यक्रम आयोजित

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HIGHLIGHTS

आदिवासी महिलाओं के हुनर को पहचान, महिला उद्यमिता को प्रोत्साहन और कृषि कार्यों के आधुनिकीकरण से आत्मनिर्भरता की नई राह खोलने पर जोर

आदिवासी महिलाओं की प्रतिभा को पहचान दिलाने, उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाने और आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ाने के उद्देश्य से पश्चिमी सिंहभूम जिला समाहरणालय स्थित सभागार में “उम्मीदों की उड़ान–रानी दुर्गावती आदिवासी महिला सम्मेलन” के तहत जिला स्तरीय उद्घाटन-सह-उन्मुखीकरण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता उपायुक्त मनीष कुमार ने की। इस अवसर पर उप विकास आयुक्त उत्कर्ष कुमार, सहायक समाहर्ता ईरा जोरवाल सहित विभिन्न विभागों के पदाधिकारी एवं संबंधित कर्मी उपस्थित रहे।

कार्यक्रम के माध्यम से आदिवासी महिलाओं के पारंपरिक ज्ञान, हुनर और रचनात्मक क्षमता को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने, महिला उद्यमिता को प्रोत्साहित करने, कृषि कार्यों में आधुनिक तकनीकों के उपयोग के प्रति जागरूकता बढ़ाने तथा स्वरोजगार एवं आजीविका के नए अवसर उपलब्ध कराने पर विशेष जोर दिया गया। साथ ही महिला सम्मान, सामाजिक जागरूकता, स्थानीय संसाधनों के बेहतर उपयोग और विकास कार्यों में महिलाओं की सक्रिय भागीदारी को महत्वपूर्ण बताया गया।

महिलाओं के हुनर को पहचान देकर आत्मनिर्भर बनाना जरूरी : उपायुक्त

उपायुक्त मनीष कुमार ने कहा कि आदिवासी महिलाएं अपनी मेहनत, कौशल, पारंपरिक ज्ञान और रचनात्मकता के माध्यम से परिवार, समाज और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। उनके हुनर को उचित पहचान देना, क्षमताओं को निखारने के अवसर उपलब्ध कराना और उनके उत्पादों को व्यापक बाजार तक पहुंचाना समय की आवश्यकता है।

उन्होंने कहा कि महिला सशक्तिकरण का उद्देश्य केवल सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाना नहीं, बल्कि महिलाओं को इस योग्य बनाना है कि वे अपनी प्रतिभा के बल पर आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन सकें। इसके लिए कौशल विकास, स्वरोजगार, उद्यमिता, स्वयं सहायता समूहों की गतिविधियों और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसरों को बढ़ावा देना जरूरी है।

उपायुक्त ने पश्चिमी सिंहभूम जैसे आदिवासी बहुल जिले में पारंपरिक कला, हस्तशिल्प, कृषि और वनोपज आधारित गतिविधियों की संभावनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि इन क्षेत्रों में महिलाओं के अनुभव और ज्ञान को आधुनिक तकनीक, बेहतर प्रशिक्षण, गुणवत्तापूर्ण उत्पादन, आकर्षक पैकेजिंग तथा बाजार से जोड़कर आजीविका के नए अवसर विकसित किए जा सकते हैं।

उन्होंने शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वच्छता, पोषण और आर्थिक भागीदारी के प्रति सामाजिक जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता पर भी बल दिया। उपायुक्त ने संबंधित विभागों को महिलाओं तक सरकारी योजनाओं, प्रशिक्षण कार्यक्रमों और स्वरोजगार से जुड़ी सुविधाओं की जानकारी पहुंचाने तथा उन्हें उपलब्ध अवसरों का लाभ उठाने के लिए प्रेरित करने पर जोर दिया।

कौशल विकास और बाजार से जुड़ाव से मजबूत होगी महिला उद्यमिता

उप विकास आयुक्त उत्कर्ष कुमार ने कहा कि महिलाओं की वास्तविक क्षमता को पहचानकर उन्हें उचित प्रशिक्षण, संसाधन और अवसर उपलब्ध कराना आवश्यक है। प्रत्येक महिला में कोई न कोई विशेष कौशल, अनुभव या प्रतिभा होती है। जरूरत उस हुनर को निखारकर रोजगार और आजीविका से जोड़ने की है।

उन्होंने कहा कि महिलाओं को कौशल विकास कार्यक्रमों, स्वयं सहायता समूहों, स्वरोजगार योजनाओं और उद्यमिता से संबंधित अवसरों की जानकारी दी जानी चाहिए। प्रशिक्षण के साथ उत्पादों की गुणवत्ता, बाजार की मांग, वित्तीय प्रबंधन और विपणन की जानकारी मिलने से महिलाएं अपने छोटे प्रयासों को सफल व्यवसाय में बदल सकती हैं।

कृषि क्षेत्र में महिलाओं की महत्वपूर्ण भूमिका का उल्लेख करते हुए उन्होंने आधुनिक तकनीकों, वैज्ञानिक पद्धतियों और विविध आजीविका गतिविधियों को अपनाने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर महिलाओं को योजनाओं का लाभ दिलाना और उन्हें आत्मनिर्भर बनने के लिए आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराना जिला प्रशासन की प्राथमिकताओं में शामिल होना चाहिए।

स्थानीय उत्पादों और पारंपरिक कौशल को मिलेगा नया अवसर

कार्यक्रम में महिला उद्यमिता को ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत करने का महत्वपूर्ण माध्यम बताया गया। आदिवासी महिलाओं द्वारा तैयार किए जाने वाले हस्तशिल्प, पारंपरिक वस्तुओं, कृषि उत्पादों और वनोपज आधारित सामग्री को बेहतर पहचान दिलाने की आवश्यकता पर चर्चा की गई।

महिलाओं को छोटे व्यवसाय स्थापित करने, उत्पादों की गुणवत्ता सुधारने, आकर्षक पैकेजिंग अपनाने और बाजार की मांग के अनुसार उत्पादन करने के लिए प्रोत्साहित करने पर जोर दिया गया। स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से सामूहिक उत्पादन, संसाधनों का साझा उपयोग और बाजार से संपर्क स्थापित करने से महिलाओं की आय बढ़ाने की संभावनाओं को भी रेखांकित किया गया।

कार्यक्रम में यह संदेश दिया गया कि स्थानीय स्तर पर उपलब्ध संसाधनों और पारंपरिक कौशल का बेहतर उपयोग कर महिलाएं नए उद्यम विकसित कर सकती हैं। इससे न केवल उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत होगी, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे और स्थानीय अर्थव्यवस्था को गति मिलेगी।

आधुनिक कृषि तकनीक से बढ़ेगी उत्पादकता और आय

कार्यक्रम के दौरान कृषि कार्यों में महिलाओं की भूमिका और कृषि के आधुनिकीकरण पर भी विशेष ध्यान दिया गया। कृषि एवं इससे जुड़ी गतिविधियों पर निर्भर जिले की बड़ी आबादी को ध्यान में रखते हुए महिला किसानों को आधुनिक कृषि पद्धतियों, उन्नत बीजों, वैज्ञानिक खेती, जल संरक्षण, मृदा स्वास्थ्य और प्राकृतिक संसाधनों के बेहतर उपयोग से जोड़ने की आवश्यकता बताई गई।

महिला किसानों को कृषि विभाग और संबंधित संस्थानों के माध्यम से तकनीकी जानकारी, प्रशिक्षण तथा उपलब्ध योजनाओं का लाभ दिलाकर उनकी उत्पादन क्षमता बढ़ाई जा सकती है। आधुनिक कृषि उपकरणों और वैज्ञानिक पद्धतियों का उपयोग श्रम एवं समय की बचत के साथ उत्पादकता और आय बढ़ाने में भी सहायक हो सकता है।

इसके अतिरिक्त सब्जी उत्पादन, बागवानी, पशुपालन, कुक्कुट पालन, मत्स्य पालन और कृषि उत्पादों के प्रसंस्करण जैसी गतिविधियों को आजीविका के वैकल्पिक साधन के रूप में विकसित करने पर जोर दिया गया। उत्पादों के उचित भंडारण, प्रसंस्करण, पैकेजिंग और बाजार तक पहुंच सुनिश्चित होने से महिला किसानों को बेहतर मूल्य प्राप्त करने के अवसर मिल सकते हैं।

रंगोली, हस्ताक्षर पट्टिका और सेल्फी प्वाइंट से दिया महिला सम्मान का संदेश

कार्यक्रम के दौरान रंगोली, हस्ताक्षर पट्टिका, सेल्फी प्वाइंट और गुब्बारे छोड़ने जैसी गतिविधियों का आयोजन किया गया। इन गतिविधियों के माध्यम से महिला सम्मान, सामूहिक सहभागिता और सकारात्मक सामाजिक बदलाव का संदेश दिया गया। साथ ही महिलाओं की भागीदारी को प्रोत्साहित करने और महिला सशक्तिकरण के प्रति जागरूकता बढ़ाने का प्रयास किया गया।

“उम्मीदों की उड़ान–रानी दुर्गावती आदिवासी महिला सम्मेलन” वीरांगना रानी दुर्गावती के साहस, स्वाभिमान और नेतृत्व से प्रेरणा लेते हुए आदिवासी महिलाओं के सम्मान, पहचान, आत्मविश्वास और आर्थिक आत्मनिर्भरता के महत्व को रेखांकित करता है।

कार्यक्रम में इस बात पर जोर दिया गया कि महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए कौशल विकास, महिला उद्यमिता, कृषि आधुनिकीकरण, सामाजिक जागरूकता और विभागीय समन्वय को एक साथ आगे बढ़ाना आवश्यक है। महिलाओं को उचित अवसर, संसाधन, प्रशिक्षण और मार्गदर्शन उपलब्ध कराकर उनकी प्रतिभा को विकास की मुख्यधारा से जोड़ा जा सकता है। इससे वे न केवल अपने परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करेंगी, बल्कि समाज और जिले के समग्र विकास में भी महत्वपूर्ण योगदान दे सकेंगी।

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