झारखंड सरकार के स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी ने राज्यसभा चुनाव और कांग्रेस नेताओं के प्रस्तावित दिल्ली दौरा रद्द होने को लेकर भाजपा और चुनाव आयोग पर तीखा हमला बोला है। मीडिया से बातचीत में उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा ने निर्वाचन आयोग को अपनी जेब में रख लिया है। इसी वजह से निर्दलीय राज्यसभा प्रत्याशी परिमल नाथवानी का नामांकन रद्द नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि चुनावी प्रक्रिया में निष्पक्षता बनाए रखना आयोग की जिम्मेदारी है लेकिन इस मामले में कई सवाल खड़े हो रहे हैं।

इरफान अंसारी ने भाजपा पर दोहरी नीति अपनाने का आरोप लगाते हुए कहा कि अतीत में छोटी-छोटी त्रुटियों के आधार पर कई उम्मीदवारों के नामांकन रद्द कराए गए हैं लेकिन परिमल नाथवानी के मामले में कथित तौर पर कई त्रुटियां होने के बावजूद उनका नामांकन स्वीकार कर लिया गया। उन्होंने कहा कि यदि नियम सभी के लिए समान हैं तो इस मामले में अलग रवैया क्यों अपनाया गया।
स्वास्थ्य मंत्री ने भाजपा से सवाल करते हुए कहा कि क्या दलित समाज की बेटी को संसद जाने का अधिकार नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा ने दलित समाज की भावनाओं को ठेस पहुंचाने का काम किया है। साथ ही बताया कि कांग्रेस का एक प्रतिनिधिमंडल इस मुद्दे को लेकर दिल्ली जाने वाला था लेकिन चुनाव आयोग की ओर से केवल छह लोगों को मिलने की अनुमति मिलने की जानकारी के बाद दौरा स्थगित कर दिया गया।
भाजपा पर निशाना साधते हुए इरफान अंसारी ने कहा कि पार्टी आज उद्योगपतियों के समर्थन में खड़ी नजर आ रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि भाजपा के पास अपने योग्य उम्मीदवार थे, तो बाहरी व्यक्ति को समर्थन देने की आवश्यकता क्यों पड़ी। उन्होंने कहा कि झारखंड की जनता ने शिबू सोरेन और अन्य नेताओं को राज्य के सम्मान और विकास के लिए चुना है, न कि राजनीति को खरीद-फरोख्त और हॉर्स ट्रेडिंग का माध्यम बनाने के लिए। अंत में उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि भाजपा को पहले अडानी और अंबानी से प्रेम था, अब परिमल नाथवानी से भी विशेष लगाव दिखाई दे रहा है।
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