खनिज अधिनियम 2026 के प्रावधानों को लेकर कांग्रेस ने केंद्र सरकार (Central Government) के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के निर्देश पर मंगलवार को झारखंड के सभी जिलों में संवाददाता सम्मेलन आयोजित कर केंद्र सरकार (Central Government) के फैसले का विरोध किया गया। लोहरदगा में राजेंद्र भवन स्थित कांग्रेस कार्यालय में मंगलवार को आयोजित संवाददाता सम्मेलन को प्रदेश कांग्रेस कमेटी के पूर्व अध्यक्ष एवं विधायक डॉ. रामेश्वर उरांव ने संबोधित किया। उन्होंने केंद्र सरकार (Central Government) के फैसले को झारखंड के आर्थिक और संवैधानिक अधिकारों पर प्रतिकूल प्रभाव डालने वाला बताते हुए कहा कि कांग्रेस इस मुद्दे पर अपना आंदोलन जारी रखेगी।डॉ. रामेश्वर उरांव ने कहा कि वर्ष 2024 में सर्वोच्च न्यायालय के महत्वपूर्ण फैसले के बाद राज्यों के खनिज अधिकारों और उन पर कर लगाने की शक्तियों को लेकर स्थिति स्पष्ट हुई थी। इसी आधार पर राज्य सरकार ने कोयले को छोड़कर अन्य खनिजों पर सेस लगाना शुरू किया।
उन्होंने कहा कि कोयले के मामले में भारत सरकार और राज्य सरकार दोनों को रॉयल्टी प्राप्त होती है। खनिजों पर सेस लगाए जाने से राज्य को वर्ष 2025-26 और 2026-27 में करीब 13 करोड़ रुपये सालाना की अतिरिक्त आय हो रही है। उन्होंने कहा कि इस अतिरिक्त राजस्व का इस्तेमाल राज्य सरकार जनकल्याणकारी योजनाओं और मूलभूत सुविधाओं के विकास में कर रही है। धोती-साड़ी योजना, मंईयां सम्मान योजना, राशन कार्ड, पेंशन सहित कई योजनाओं में इस राशि का उपयोग किया जा रहा है। ऐसे में राज्यों से परामर्श किए बिना केंद्र सरकार द्वारा खनिज राजस्व से जुड़े अधिकारों को प्रभावित करने वाला निर्णय लेना संघीय व्यवस्था की भावना के अनुरूप नहीं है। डॉ रामेश्वर उरांव ने कहा कि संघीय व्यवस्था में केंद्र और राज्यों के बीच परामर्श लोकतंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह जरूरी नहीं कि केंद्र सरकार राज्यों की हर मांग को स्वीकार करे, लेकिन किसी महत्वपूर्ण निर्णय से पहले राज्यों की राय लेना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि झारखंड को पहले से ही केंद्रीय सहायता समय पर नहीं मिलती है और ऐसे में खनिज राजस्व से जुड़े अधिकारों को सीमित करने का प्रयास राज्य की आर्थिक स्थिति के लिए गंभीर चुनौती बन सकता है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि खनिजों पर कर लगाने का अधिकार राज्यों का संवैधानिक अधिकार है और इसमें किसी भी प्रकार की कटौती स्वीकार नहीं की जाएगी।
प्रदेश कांग्रेस कमेटी के महासचिव आलोक कुमार दूबे ने कहा कि खनिज अधिनियम में प्रस्तावित बदलाव झारखंड के संवैधानिक और लोकतांत्रिक अधिकारों पर सीधा हमला है। यह केवल टैक्स और सेस का विषय नहीं, बल्कि झारखंड के जल, जंगल और जमीन तथा यहां की जनता के अधिकारों से जुड़ा सवाल है। उन्होंने कहा कि झारखंड ने देश के औद्योगिक विकास के लिए अपनी धरती के बहुमूल्य खनिज संसाधन दिए हैं, जबकि खनन से होने वाले पर्यावरणीय और सामाजिक दुष्प्रभावों का सामना राज्य की जनता करती है। इसके बावजूद राज्य की रॉयल्टी और सेस से जुड़े अधिकारों पर अंकुश लगाने का प्रयास किया जा रहा है, जिसे कांग्रेस किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं करेगी।
आलोक कुमार दूबे ने कहा कि झारखंड के प्राकृतिक संसाधनों से होने वाली आय का प्राथमिक लाभ राज्य और यहां की जनता को मिलना चाहिए। उन्होंने घोषणा की कि 27 अगस्त को लोहरदगा समाहरणालय परिसर में कांग्रेस की ओर से धरना-प्रदर्शन किया जाएगा। इस दौरान केंद्र सरकार के फैसले का विरोध करते हुए झारखंड के संवैधानिक और आर्थिक अधिकारों की रक्षा की मांग उठाई जाएगी। जिला कांग्रेस अध्यक्ष सुखेर भगत ने कहा कि प्रदेश और राष्ट्रीय नेतृत्व के निर्देश पर लोहरदगा जिला कांग्रेस इस आंदोलन को मजबूती से आगे बढ़ाएगा। कांग्रेस कार्यकर्ता गांव और पंचायत स्तर तक पहुंचकर लोगों को खनिज अधिनियम में प्रस्तावित बदलाव के संभावित प्रभावों की जानकारी देंगे। उन्होंने कहा कि झारखंड की खनिज संपदा केवल राजस्व का माध्यम नहीं, बल्कि राज्य की आर्थिक आत्मनिर्भरता और भविष्य से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय है। इसलिए खनिज अधिकारों में किसी भी प्रकार की कटौती के खिलाफ कांग्रेस लोकतांत्रिक तरीके से अपना संघर्ष जारी रखेगी। संवाददाता सम्मेलन में विशाल डुंगडुंग, सीमा परवीन, मोहन दुबे, संदीप गुप्ता, मुस्ताक अहमद और मोहम्मद दानिश सहित कांग्रेस के अन्य कार्यकर्ता मौजूद थे।





