गढ़वा जिले के भवनाथपुर प्रखंड अंतर्गत सिंदुरिया पंचायत में बुनियादी सुविधाओं(Amenities) की बदहाली से नाराज ग्रामीणों का आक्रोश सड़क पर उतर आया। ग्रामीणों ने सड़क पर धान रोपकर विरोध प्रदर्शन किया और सेल प्रबंधन के खिलाफ जमकर नाराजगी जताई। ग्रामीणों का आरोप है कि घाघरा माइंस क्षेत्र से पुनर्वास के दौरान सेल प्रबंधन ने सड़क, बिजली, पानी समेत तमाम जरूरी सुविधाएं (Amenities) उपलब्ध कराने का भरोसा दिया था, लेकिन वर्षों बाद भी वादे अधूरे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि घाघरा माइंस से विस्थापित कर उन्हें भवनाथपुर लाकर बसाया गया था। पुनर्वास के समय बेहतर जीवन के लिए बुनियादी सुविधाएं (Amenities) उपलब्ध कराने की बात कही गई थी। लेकिन वर्तमान स्थिति में सड़क की बदहाली और अन्य मूलभूत समस्याओं के कारण ग्रामीणों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
ग्रामीणों ने सेल प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि माइंस क्षेत्र से लगातार आर्थिक लाभ लिया जा रहा है, लेकिन जिन ग्रामीणों की जमीन और जीवन प्रभावित हुआ, उनकी समस्याओं के समाधान पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जा रहा। इसी नाराजगी में ग्रामीणों ने सड़क पर धान रोपकर अपना विरोध दर्ज कराया।
विरोध प्रदर्शन के दौरान ग्रामीणों ने सिंदुरिया पंचायत के मुखिया नंदलाल पाठक की भूमिका पर भी सवाल खड़े किए। ग्रामीणों का आरोप है कि पंचायत स्तर पर उनकी समस्याओं को गंभीरता से नहीं लिया गया और सड़क समेत अन्य बुनियादी सुविधाओं के लिए प्रभावी पहल नहीं की गई।
ग्रामीणों का कहना है कि एक ओर सेल प्रबंधन पर पुनर्वास के दौरान किए गए वादे पूरे नहीं करने का आरोप है, वहीं दूसरी ओर स्थानीय पंचायत प्रतिनिधियों की कथित निष्क्रियता ने उनकी परेशानी और बढ़ा दी है।
ग्रामीणों ने कहा कि जब सड़क पर पानी और कीचड़ की स्थिति बनी रहती है तो आवागमन मुश्किल हो जाता है। बार-बार समस्या उठाने के बावजूद समाधान नहीं होने पर उन्हें मजबूर होकर सड़क पर उतरना पड़ा। धान रोपकर ग्रामीणों ने प्रशासन और सेल प्रबंधन का ध्यान क्षेत्र की बदहाल स्थिति की ओर आकर्षित किया।
ग्रामीणों ने मांग की है कि पुनर्वास से जुड़े वादों की समीक्षा कर सड़क, बिजली, पानी और अन्य जरूरी सुविधाएं तत्काल उपलब्ध कराई जाएं। साथ ही पंचायत स्तर पर भी ग्रामीणों की समस्याओं के समाधान के लिए ठोस पहल की जाए।
अब सवाल यह है कि घाघरा माइंस से विस्थापन के बाद पुनर्वासित ग्रामीणों से किए गए विकास के वादे आखिर कब पूरे होंगे? ग्रामीणों के विरोध के बाद क्या सेल प्रबंधन और पंचायत प्रतिनिधि उनकी समस्याओं का स्थायी समाधान करेंगे, यह देखने वाली बात होगी।





