झारखंड में चल रही विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया को लेकर झारखंड राज्य अल्पसंख्यक (Minorities Commission) आयोग ने गंभीर सवाल उठाए हैं। आयोग के उपाध्यक्ष शमशेर आलम ने आरोप लगाया कि कई बीएलओ अपने निर्धारित दायित्वों का सही तरीके से पालन नहीं कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि घर-घर जाकर सत्यापन करने के बजाय कई बीएलओ लोगों को बूथ या जनप्रतिनिधियों के घर बुलाकर फॉर्म भरवा रहे हैं, जिससे मतदाताओं को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। रांची में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में झारखंड राज्य अल्पसंख्यक आयोग (Minorities Commission) के उपाध्यक्ष शमशेर आलम ने कहा कि 30 जून से 29 जुलाई तक चल रही एसआईआर प्रक्रिया के दौरान आयोग को बड़ी संख्या में लिखित और टेलीफोनिक शिकायतें मिली हैं। Minorities Commission) के उपाध्यक्ष शमशेर आलम ने शिकायतों में कहा गया है कि कई बीएलओ घर-घर जाकर सत्यापन करने के बजाय मतदाताओं को बूथों या स्थानीय जनप्रतिनिधियों के यहां बुलाकर फॉर्म वितरित और जमा करा रहे हैं, जबकि नियमानुसार बीएलओ को स्वयं प्रत्येक घर जाकर मतदाताओं का सत्यापन करना चाहिए और फॉर्म भरने में सहायता करनी चाहिए।

उन्होंने बताया कि राजधानी रांची के कई अल्पसंख्यक बहुल इलाकों के साथ-साथ अन्य क्षेत्रों से भी ऐसी शिकायतें मिली हैं। शमशेर आलम ने कहा कि उन्होंने स्वयं कुछ क्षेत्रों का दौरा किया, जहां लोगों ने बीएलओ के व्यवहार और कार्यशैली पर नाराजगी जताई।
आयोग का कहना है कि यदि बीएलओ की कार्यशैली में सुधार नहीं हुआ तो वह जल्द ही राज्य निर्वाचन आयोग से मुलाकात कर लापरवाही बरतने वाले बीएलओ की शिकायत करेगा। उन्होंने यह भी कहा कि वर्तमान गति को देखते हुए 29 जुलाई तक एसआईआर प्रक्रिया समय पर पूरी होना मुश्किल दिखाई देता है।
बैठक के दौरान, अधिकारियों ने ब्लॉक स्तर पर नियमित निगरानी, लगातार समीक्षा और बेहतर तालमेल के ज़रिए ‘विशेष गहन समीक्षा अभियान’ को सफल बनाने पर ज़ोर दिया।
इसके अलावा, सभी संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों को रोज़ाना तय लक्ष्यों के अनुसार गुणवत्तापूर्ण काम सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। अगर चाहें, तो इसे और भी प्रभावशाली बनाया जा सकता है और अख़बार के पहले पन्ने की ख़बर के तौर पर पेश किया जा सकता है।
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