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Diesel आपूर्ति की समस्या अब ट्रांसपोर्ट कारोबार पर पड़ रहा भारी: ट्रेलर, ट्रक और अन्य भारी वाहनों को नहीं मिल पा रहा पर्याप्त डीजल

On: June 14, 2026 12:17 PM
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Diesel आपूर्ति की समस्या अब ट्रांसपोर्ट कारोबार पर पड़ रहा भारी: ट्रेलर, ट्रक और अन्य भारी वाहनों को नहीं मिल पा रहा पर्याप्त डीजल
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झारखंड में Diesel आपूर्ति की समस्या अब ट्रांसपोर्ट कारोबार पर भारी पड़ने लगी है। जमशेदपुर-चाईबासा-सरायकेला-कांड्रा मार्ग पर चलने वाले ट्रेलर, ट्रक और अन्य भारी वाहनों को पर्याप्त मात्रा में Diesel नहीं मिल पा रहा है। वाहन मालिकों का आरोप है कि पेट्रोल पंपों पर 200 लीटर से अधिक Diesel नहीं दिया जा रहा है। कई जगहों पर वाहनों की संख्या अधिक होने पर सिर्फ दो से पांच हजार रुपये तक का ही डीजल उपलब्ध कराया जा रहा है। इसके कारण दर्जनों ट्रक और ट्रेलर 36-36 घंटे तक डीजल के इंतजार में खड़े रहने को मजबूर हैं।

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वाहन खड़े रहने से किस्त, चालक-खलासी का खर्च और माल ढुलाई का काम प्रभावित हो रहा है, जिससे ट्रांसपोर्टरों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। ट्रक ट्रेलर ऑनर एसोसिएशन ने सरकार से जल्द समाधान निकालने की मांग की है। एसोसिएशन के अध्यक्ष जसवीर सिंह सीरे ने चेतावनी दी है कि यदि समस्या का समाधान नहीं हुआ तो 20 जून से पूरे झारखंड में ट्रक ट्रेलर ऑनर एसोसिएशन अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चला जाएगा।

डीजल संकट के कारण जमशेदपुर समेत आसपास के औद्योगिक और खनन क्षेत्रों में मालवाहक वाहनों का परिचालन प्रभावित होने लगा है। ट्रांसपोर्टरों का कहना है कि सीमित मात्रा में डीजल मिलने से लंबी दूरी की गाड़ियों का संचालन मुश्किल हो गया है। कई वाहन सड़क किनारे और पेट्रोल पंपों के पास खड़े हैं, जिससे कारोबार पर असर पड़ रहा है। एसोसिएशन ने सरकार और तेल कंपनियों से तत्काल पर्याप्त डीजल उपलब्ध कराने की मांग की है, ताकि परिवहन व्यवस्था सुचारू रूप से चल सके।

बता दें कि इनमें से 500 गाड़ियां खास तौर पर बारबिल-चाइबासा और सरायकेला रूट पर चलती हैं। और इस तरह समय पर डीज़ल न मिलने के कारण गाड़ियों का चलना 50 प्रतिशत तक कम हो गया है जहाँ पहले गाड़ियाँ महीने में 10 चक्कर लगाती थीं, वहीं अब वे सिर्फ़ चार से पांच चक्कर ही लगा पा रही हैं। नतीजतन, मालिकों के लिए गाड़ियों की किश्तें और टैक्स चुकाना मुश्किल हो गया है। गाड़ी मालिक अब किश्तों, सरकारी टैक्स, परमिट और इंश्योरेंस का खर्च उठाने में असमर्थ हैं। इसके अलावा, पिछले छह सालों में माल ढुलाई के किराए में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई है।

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