Durga Puja Godda: गोड्डा जिले के महागामा स्थित प्राचीन दुर्गा मंदिर में बुधवार को मां दुर्गा की प्रतिमा का विसर्जन किया गया। पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ श्रद्धालुओं ने मां को विदाई दी। यह मंदिर अपनी पुरानी पूजा पद्धति और खास परंपराओं के लिए जाना जाता है।
स्थानीय मान्यता के अनुसार, यह मंदिर करीब 600 साल पुराना है। कहा जाता है कि महागामा स्टेट के खैतोरी राजा मोल ब्रह्मा ने अपनी कुलदेवी मां दुर्गा के लिए इस मंदिर का निर्माण कराया था। मंदिर में मुख्य द्वार सहित कुल 18 दरवाजे हैं। दीवारों पर पुरानी नक्काशी भी देखने को मिलती है। पश्चिमी दीवार पर प्राचीन लिपि में एक लेख बना हुआ है।
महागामा दुर्गा मंदिर में पारंपरिक तांत्रिक विधि से पूजा की जाती है। नवरात्र के दौरान कलश स्थापना और दुर्गा सप्तशती का पाठ होता है। षष्ठी तिथि को बेलभरण की रस्म निभाई जाती है। इस दिन बेल के पेड़ के नीचे पूजा कर मां दुर्गा को मंदिर आने का निमंत्रण दिया जाता है।
सप्तमी की सुबह ढोल-बाजे के साथ बेलभरण को मंदिर लाया जाता है। इस दौरान श्रद्धालु अरहर की हरी डालियों से बने झाड़ू से रास्ते की सफाई करते हैं। कुछ श्रद्धालु दंडवत प्रणाम करते हुए मंदिर पहुंचते हैं। लोग फूल, बेलपत्र और दूध चढ़ाकर मां की पूजा करते हैं।
Durga Puja Godda: दूर-दूर से मन्नत मांगने पहुंचते हैं श्रद्धालु
मंदिर में आने वाले लोगों की मां दुर्गा के प्रति गहरी आस्था है। श्रद्धालुओं का मानना है कि सच्चे मन से मांगी गई मन्नत मां पूरी करती हैं। इसी विश्वास के साथ लोग परिवार की सुख-शांति और खुशहाली की कामना करते हैं।
विसर्जन के साथ पूजा का समापन
बुधवार को श्रद्धालु प्रतिमा को कंधे पर उठाकर जयकारे लगाते हुए पुराने पोखर तक ले गए। इसके बाद प्रतिमा का विसर्जन किया गया। इस तरह दुर्गा पूजा का समापन हुआ। महागामा का यह मंदिर आज भी अपनी पुरानी परंपराओं और लोगों की आस्था के कारण खास पहचान रखता है। हर साल पूजा के दौरान यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन करने पहुंचते हैं।






