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धूल और धुएं ने दिया सांस की परेशानी का तोहफा तुबेद कोल माइंस के संचालन की जमीनी हकीकत

On: May 15, 2026 6:12 PM
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धूल और धुएं ने दिया सांस की परेशानी का तोहफा तुबेद कोल माइंस के संचालन की जमीनी हकीकत
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झारखंड के हर जगह सिर्फ विस्थापितों को दर्द ही मिला है अगर उन्हें जमीन के बदले कुछ मिला है तो वह अभाव में जीवन यापन करने की मजबूरी जिले में कोल माइंस ग्रामीणों के लिए काल बन गया है. कोयले की ढुलाई शुरू होने से कई गांव के ग्रामीणों के जीवन मे भयंकर त्रासदी का माहौल कायम है.शुरुआत में खनन परियोजना से क्षेत्र में विकास के बड़े-बड़े दावे और वादे किए गए थे लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही है ऐसा ही देखने को मिल रहा है लातेहार के तुबेद कोल माइंस पर जहां पर विस्थापितों की जिंदगी नरक बन चुकी है यहां का कोयला दूसरे राज्यों को उज्ज्वला देने का काम करता है लेकिन यहां के लोग जिंदगी अंधेरे मे रहने को भी विवश हैं लातेहार जिले में तुबेद कोल माइंस के संचालन के बावजूद स्थानीय ग्रामीण आज भी मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं। कोल माइंस खुलने से पहले वरीय अधिकारियों द्वारा क्षेत्र के विकास को लेकर अस्पताल, पक्की सड़क, स्कूल, पेयजल और बिजली जैसी सुविधाओं को प्राथमिकता के आधार पर उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल विपरीत नजर आ रही है। ग्रामीणों का कहना है कि कोलियरी से क्षेत्र को लाभ मिलने के बजाय समस्याएं और बढ़ गई हैं। ग्राम भालोवाड़ी की निवासी उषा देवी ने बताया कि सड़क निर्माण की बात तो दूर, लोग आज भी जर्जर और कच्ची सड़कों पर चलने को मजबूर हैं। जगह-जगह गड्ढों के कारण आवागमन मुश्किल हो गया है। बच्चों को स्कूल जाने में भारी परेशानी होती है, खासकर बरसात के दिनों में स्थिति और भी भयावह हो जाती है। उन्होंने यह भी बताया कि कई ग्रामीणों की जमीन कोलावरी क्षेत्र में चली गई, लेकिन अब तक मुआवजे का भुगतान नहीं किया गया है, जिससे परिवारों की आर्थिक स्थिति कमजोर होती जा रही है। ग्रामीण हरिजन मांझी ने बताया कि कोल माइंस से उड़ने वाली धूल और धुएं से लोगों को सांस लेने में परेशानी हो रही है। धूलकण के कारण बीमारियों का खतरा बढ़ गया है, लेकिन पानी का छिड़काव नियमित रूप से नहीं किया जाता। इसके अलावा कोयले की ढुलाई रात भर चलती रहती है, जिससे शोर, दुर्घटनाओं का खतरा और प्रदूषण लगातार बना रहता है। इससे ग्रामीणों की नींद और दैनिक जीवन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है,वहीं ग्रामीण विश्वनाथ ने बताया कि कोलियरी खुलने के बाद भी रोजगार के स्थायी अवसर नहीं मिलने के कारण लोग पलायन करने को मजबूर हैं। कोल माइंस से स्थानीय युवाओं को रोजगार मिलने की जु उम्मीद थी, वह पूरी नहीं हो सकी। उन्होंने कहा कि कोलियरी खुलने से पहले विकास की जो आशा दिखाई गई थी, वह अब सिर्फ आश्वासन बनकर रह गई है।

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ग्रामीण बताते है कि कोल माइंस खुलवाने के लिए स्थानीय से लेकर जिले के नेताओं ने हमलोगों को बरगलाकर जमीन दिलवाया कि माइंस खुल जाने के बाद आपलोगों को वो तमाम मूल भूत सुविधा दिलाएंगे रोजगार मिलेगा बिजली पानी सड़क स्वास्थ्य शिक्षा सभी मूलभूत सुविधा मिलेगी लेकिन, नेता सिर्फ अपना झोली भरकर किनारे हो गए और ग्रामीण की समस्या में एक दिन भी उसका हाल जानने नही पहुँचे ग्रामीणों का कहना है कि कोयले से कंपनी को करोड़ों की कमाई हो रही है, पर प्रभावित गांवों का विकास आज भी अधूरा है आगे लोगो ने कहा की डीवीसी अपनी उपलब्धियों का सिर्फ एसी कमरों में बैठकर गिनवाता है,कभी गाँव मे आकर हमारी समस्या को नही देखता अगर देखता तो आज हमारी यह स्थिति नहीं रहती नेता तो छोड़िए आज तक हमारे गांव में प्रशासन के एक भी अधिकारी कभी भी गांव में आकर ग्रामीणों की समस्या से रूबरू नहीं हो रहे हैं. प्रशासनिक अधिकारियों के व्यवहार से ऐसा लग रहा है कि अधिकारियों ने कंपनी को खुली छूट दे दी है.
ग्रामीणों का कहना है कि वे लंबे समय से अपनी समस्याओं को प्रशासन और संबंधित कंपनी के समक्ष उठाते आ रहे हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस पहल नहीं की गई है। लोगों में असंतोष बढ़ता जा रहा है, लेकिन भय और उपेक्षा के कारण कोई खुलकर आगे आने को तैयार नहीं है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि विकास कार्यों, मुआवजा भुगतान, प्रदूषण नियंत्रण और बुनियादी सुविधाओं की बहाली को लेकर शीघ्र ठोस कदम उठाए जाएं, ताकि कोल माइंस का वास्तविक लाभ स्थानीय लोगों को मिल सके।






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