बोकारो स्टील सिटी में केंद्रीय ट्रेड यूनियनों एवं संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर आयोजित देशव्यापी ‘जेल भरो आंदोलन’ के तहत किसान और मजदूर बड़ी संख्या में सड़क पर उतरे। आंदोलन को सफल बनाने के लिए मजदूरों की रैली हवाई अड्डे से निकलकर चास स्थित गरगा पुल पहुंची। वहीं दूसरी ओर से किसानों की रैली चेक पोस्ट से गरगा पुल पहुंची। दोनों रैलियों के एक साथ पहुंचने के बाद गरगा पुल पर आवागमन बाधित हो गया।
प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने हस्तक्षेप किया। करीब आधे घंटे तक सड़क पर आवागमन प्रभावित रहने के बाद पुलिस ने आंदोलनकारियों को हिरासत में लेकर कैंप जेल के रूप में निर्धारित अमृत पार्क पहुंचाया। आंदोलन में बड़ी संख्या में किसान और मजदूर शामिल हुए।
प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए भाकपा माले लिबरेशन के नेता राजू दूबे ने कहा कि देश में बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी, किसानों की बदहाली, मजदूरों के अधिकारों पर लगातार हो रहे हमले तथा सार्वजनिक क्षेत्र और प्राकृतिक संसाधनों के बढ़ते निजीकरण को लेकर आम लोगों में व्यापक असंतोष है। उन्होंने कहा कि पेपर लीक जैसी संस्थागत समस्याओं ने भी युवाओं और छात्रों के बीच आक्रोश पैदा किया है।
राजू दूबे ने कहा कि पिछले 13 महीने तक चले किसान आंदोलन से लेकर मजदूर संगठनों की हड़ताल और विरोध-प्रदर्शनों तक जनता ने लगातार अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाई है। उत्तर भारत के औद्योगिक क्षेत्रों में मजदूरों के बीच उभरे आंदोलनों और पेपर लीक के मुद्दे पर छात्रों के सड़क पर उतरने का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक अधिकारों पर बढ़ते हमलों के बीच मजदूर-किसान एकता के आधार पर जनपक्षीय नीतियों के लिए संघर्ष को मजबूत करना समय की आवश्यकता है।
आंदोलनकारियों की प्रमुख मांगों में चारों लेबर कोड के मजदूर विरोधी प्रावधानों को रद्द करना, सभी के लिए खाद्य सुरक्षा, स्वास्थ्य, शिक्षा और आवास की गारंटी, सार्वभौमिक सामाजिक सुरक्षा एवं पेंशन, सभी कृषि उपज की वैधानिक न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर खरीद की गारंटी और किसानों की संपूर्ण कर्जमाफी शामिल रही।
इसके अलावा सम्मानजनक रोजगार और न्यूनतम मजदूरी की कानूनी गारंटी, ग्रामीण एवं शहरी रोजगार गारंटी, स्कीम वर्करों तथा अनुबंधित और अस्थायी कर्मचारियों के नियमितीकरण जैसी मांगें भी आंदोलन के केंद्र में रहीं। केंद्रीय ट्रेड यूनियनें लंबे समय से श्रमिक अधिकारों, सामाजिक सुरक्षा और श्रम कानूनों से जुड़े मुद्दों को लेकर संयुक्त रूप से आंदोलन करती रही हैं।
जेल भरो अभियान में एटक के महामंत्री रामाश्रय प्रसाद सिंह, सीटू के महामंत्री आरके गोराई, एक्टू के महामंत्री देव दीप सिंह दिवाकर, जेकेएमयू के महामंत्री डीसी गोहाई, एआईयूटीयूसी के महामंत्री मोहन चौधरी, एचएमएस के आरके वर्मा तथा संयुक्त किसान मोर्चा के कुमुद महतो, विश्वनाथ बनर्जी और शकुर अंसारी समेत कई किसान-मजदूर नेताओं एवं कार्यकर्ताओं ने सक्रिय भूमिका निभाई।
इस दौरान आरएस शर्मा, धनंजय कुमार, रामागार सिंह, आईडी प्रसाद, गया राम शर्मा, भीम रजक, शांति भारत, देव कुमार और कुमार सत्येन्द्र सहित बड़ी संख्या में किसान-मजदूर आंदोलन में शामिल हुए। आंदोलन के दौरान किसान-मजदूर एकता और श्रमिकों एवं किसानों की विभिन्न मांगों को लेकर जोरदार नारेबाजी की गई।
बोकारो में हुए इस प्रदर्शन ने एक बार फिर श्रमिक अधिकार, रोजगार, कृषि संकट, सामाजिक सुरक्षा और सार्वजनिक क्षेत्र से जुड़े मुद्दों को लेकर किसान-मजदूर संगठनों की संयुक्त लामबंदी को सामने ला दिया।
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