रांची : झारखंड की राजनीति पिछले कई दिनों से लगातार गरमाई हुई है। इसी बीच भाजपा सांसद निशिकांत दुबे के एक बयान ने राज्य की सियासत में नई हलचल पैदा कर दी है। “झारखंड की सरकार को एनडीए का पाठ पढ़ना पड़ेगा” वाले बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। इसे संभावित राजनीतिक बदलाव के संकेत के तौर पर भी देखा जा रहा है।

निशिकांत दुबे के बयान पर झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) और कांग्रेस ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। झामुमो प्रवक्ता मनोज पांडेय ने कहा कि निशिकांत दुबे कभी मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की आलोचना करते हैं तो कभी अलग तरह के बयान देते हैं। उन्होंने कहा कि“वे जरूरत से ज्यादा बड़बोले हैं। क्या होगा और क्या नहीं होगा, इसका फैसला जनता और राजनीतिक परिस्थितियां करती हैं। न तो वे भविष्यवक्ता हैं और न ही किसी दूसरी पार्टी के मालिक।”
मनोज पांडेय ने आगे कहा कि भाजपा नेताओं को अपनी पार्टी पर ध्यान देना चाहिए और अनावश्यक बयानबाजी से बचना चाहिए।
वहीं कांग्रेस प्रवक्ता राकेश सिन्हा ने भी निशिकांत दुबे पर निशाना साधते हुए कहा कि “उनकी राजनीतिक हैसियत इतनी नहीं है कि वे झारखंड की सरकार को लेकर भविष्यवाणी करें। वे सिर्फ बयानबाजी कर अपना राजनीतिक ग्राफ बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं।”
कांग्रेस ने आरोप लगाया कि भाजपा द्वारा पहले भी “ऑपरेशन लोटस” और केंद्रीय एजेंसियों के जरिए सरकार को अस्थिर करने की कोशिश की गई, लेकिन हेमंत सोरेन के नेतृत्व वाली सरकार और इंडिया गठबंधन ने उन प्रयासों को विफल कर दिया।
हालांकि दोनों दलों ने निशिकांत दुबे के बयान को गंभीरता से खारिज करने की कोशिश की है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या आने वाले दिनों में झारखंड की राजनीति में कोई बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। फिलहाल यह सवाल राज्य की राजनीति में चर्चा का प्रमुख विषय बना हुआ है।





