BJPके प्रदेश प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने हेमंत सरकार पर लगया आरोप। घोटाले को दबाने की कोशिश कर रही है। सरकार बता दें कि राज्य मुख्यालय में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए भारतीय जनता पार्टी BJPके प्रदेश प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने हेमंत सरकार पर एक गंभीर आरोप लगाया। प्रतुल शाहदेव ने सरकार पर खजाना घोटाले को दबाने की कोशिश करने का आरोप लगाया।

प्रतुल शाहदेव ने कहा कि सबसे पहले जब यह घोटाला सामने आया तो सरकार ने काफी समय तक मामले को लटकाए रखा।दबाव में आकर एक SIT का गठन किया गया।हालांकि इस टीम के गठन और इसके सदस्यों के चयन को लेकर तब से कई सवाल उठ रहे हैं।खास बात यह है कि जिन खजाना अधिकारियों और DDOs के कार्यकाल में यह घोटाला हुआ था।वे अभी भी अपने-अपने पदों पर बने हुए है।
प्रतुल शाहदेव ने आगे आरोप लगाया कि केवल दिखावे के लिए राज्य सरकार ने 17 अप्रैल, 2026 को महालेखाकार को एक सिफारिश भेजी जिसमें एक विशेष ऑडिट का अनुरोध किया गया था। इस अनुरोध को स्वीकार करते हुए महालेखाकार ने उसी सप्ताह राज्य सरकार से खजाना घोटाले से संबंधित सभी दस्तावेज मांगे।प्रतुल आगे ने बताया कि मिली जानकारी के अनुसार राज्य सरकार ने डेढ़ महीने से अधिक समय बीत जाने के बावजूद अभी तक घोटाले से संबंधित वे दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए है, जिनकी मांग AG ने की थी। इसके बाद विशेष ऑडिट शुरू नहीं हो पाया है। यह पूरी घटना सरकार की मंशा पर संदेह की एक बड़ी छाया डालती है। ऐसा प्रतीत होता है कि सरकार किसी भी तरह से समय बिताने की कोशिश कर रही है।ताकि पूरे मामले को रफा-दफा किया जा सके।
प्रतुल शाहदेव ने आगे कहा कि राज्य सरकार के वित्त विभाग द्वारा गठित SIT और साथ ही आबकारी सचिव के नेतृत्व वाली अलग SIT ने अब तक केवल एक ही जिले का दौरा किया है।बोकारो में दो महीने बीत जाने के बावजूद इस समिति ने अभी तक उस एक जिले के संबंध में भी सरकार को अपनी रिपोर्ट नहीं सौंपी है।
प्रतुल शाहदेव ने शुरुआती चरण में राज्य सरकार ने पांच जिलों में जांच की सिफारिश की थी।जिनमें मुख्य रूप से बोकारो, हजारीबाग, रांची,रामगढ़ और देवघर शामिल थे।बाकी जिलों की बात करें तो SIT ने अभी तक उनका दौरा भी नहीं किया है। प्रतुल ने टिप्पणी की कि पूरी जांच कछुए की गति से आगे बढ़ रही है,जिससे यह संकेत मिलता है कि इसे पूरा होने में संभवत कई साल लग जाएंगे।
प्रतुल ने झारखंड सरकार से आग्रह किया कि वह चारा घोटाला मामले में लालू प्रसाद यादव के साथ जो हुआ उससे सबक लेने की जरूरत है। लालू प्रसाद पर आरोप था कि चारा घोटाला सामने आने के बाद भी उन्होंने तुरंत ज़रूरी सुधारात्मक कदम नहीं उठाए।इसके बजाय, उन्होंने पूरे मामले को दबाने की कोशिश की।जब बाद में यह जांच CBI को सौंप दी गई।इसी आधार पर लालू प्रसाद को साज़िश में शामिल होने और तुरंत उचित कार्रवाई न करने के लिए अदालतों ने दोषी ठहराया। प्रतुल ने मांग की है कि राज्य सरकार SIT जाँच के लिए एक समय सीमा तय करे और जाँच की गति तेज़ करे नहीं तो पूरा मामला पूरी तरह से किसी केंद्रीय एजेंसी को सौंप दिया जाना चाहिए।
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